शुक्रवार को कांस्टिट्यूशन क्लब में सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच हुई बैठक के बाद थोड़ी नरमी दिखी. बैठक में मौजूद रहे CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका ने बताया कि उनकी दो मांगें मान ली गई हैं. सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर फैसला लेने के लिए 24 घंटे का समय मांगा है. लेकिन बाद में सरकार की तरफ से साफ कहा गया कि प्रधान बने रहेंगे. उन्हें हटाना कोई समाधान नहीं है. दोनों दावों में से कौन सा सच है, यह बाद में पता चल ही जाएगा लेकिन फिलहाल इतना तो कहा ही जा सकता है कि प्रधान के इस्तीफे की बात ढाई महीने में पहली बार इस हद तक पहुंची है.
CJP के अलावा कांग्रेस और बाकी विपक्ष भी यही मांग कर रहा है कि प्रधान के इस्तीफे के बिना आगे बात नहीं बढ़ेगी. CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने ‘आजतक’ से बात करते हुए कहा, “सरकार ने अगली बातचीत के लिए 24 घंटे मांगे हैं, लेकिन हमें लगता है कि सरकार को सबसे पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ले लेना चाहिए. कहीं ऐसा न हो कि प्रधान का इस्तीफा मांगने वाले छात्र प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांगने लगें.”
इस पूरे मसले की शुरुआत NEET परीक्षा के पेपर लीक से हुई. मई 2026 में हुई NEET-UG परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आईं. लाखों छात्रों ने मेहनत की, लेकिन पेपर लीक की वजह से परीक्षा रद्द करनी पड़ी और दोबारा कराई गई. इससे छात्रों में गुस्सा बहुत बढ़ गया. जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं. छात्र प्रधान की जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं.
प्रधान के इस्तीफे को लेकर सोनम वांगचुक का स्टैंड बदला?
25-26 दिन तक अनशन करने वाले सोनम वांगचुक ने सरकार के भरोसे पर अपनी भूख हड़ताल बीती रात खत्म कर दी. उन्होंने अस्पताल में जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह जैसे मंत्रियों से मुलाकात के बाद यह फैसला लिया. वांगचुक ने अपने मैसेज में कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर संसद में बहस होनी चाहिए और सरकार इस पर गौर करे. यानी उनके स्टैंड में भी थोड़ी नरमी आई है. लेकिन प्रदर्शन अभी जारी हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद बीती रात NEET मुद्दे पर सरकार के रुख को साफ किया. उन्होंने कहा कि पेपर लीक और नकल रोकने के लिए सख्त कानून बनाया जा रहा है. इसका मसौदा तैयार है. PM ने युवाओं के भविष्य को सबसे ऊपर रखते हुए कहा कि ऐसे अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा. फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जा रहे हैं ताकि जल्दी सजा हो.
पिछले ढाई महीने में क्या-क्या हुआ?
पिछले दो-ढाई महीनों में शिक्षा विभाग, NTA और CBSE से जुड़े कई बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है. NEET 2026 पेपर लीक मामले में NTA के कुछ अंदरूनी लोगों पर शक हुआ. CBI जांच चल रही है. कुछ शिक्षकों और ठेकेदारों को गिरफ्तार किया गया है. NTA के डायरेक्टर जनरल ने कहा था कि सिस्टम में कमियां हैं और हम उन्हें दूर कर रहे हैं. परीक्षा रद्द करने और दोबारा कराने का फैसला लिया गया. छात्रों में भरोसा जगाने के लिए कि Re-NEET ईमानदारी से होगी, टेलीग्राम को बैन किया गया. पेपर को एग्जाम सेंटर तक पहुंचाने के लिए एयरफोर्स की मदद लेने की बात कही गई.
CBSE में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) पोर्टल को लेकर बड़ा विवाद हुआ. छात्रों के मार्क्स में गड़बड़ी की शिकायतें आईं. सरकार ने तुरंत एक्शन लिया. CBSE चेयरमैन राहुल सिंह और सेक्रेटरी हिमांशु गुप्ता को ट्रांसफर कर दिया गया. राहुल सिंह को कृषि मंत्रालय भेजा गया. नए चेयरमैन प्राशांत सीताराम लोकंडे बनाए गए. OSM प्रोक्योरमेंट की जांच के लिए कमिटी भी बनाई गई. इनके अलावा शिक्षा मंत्रालय में भी कुछ टॉप ब्यूरोक्रेट्स की पोस्टिंग बदली गई. गुरुवार को ही एजुकेशन सेक्रेटरी नरेश पाल गंगवार का ट्रांसफर कर दिया गया है.
सरकार का कहना है कि प्रधान इस्तीफा देकर भाग नहीं सकते. वे पूरे सिस्टम को सुधारने का काम देख रहे हैं. विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बना रहा है. संसद में भी NEET पर चर्चा की मांग जोरों पर है. विपक्ष ने प्रधान के इस्तीफे, पुलिस कार्रवाई पर माफी और PM से माफी की मांग रखी है.
CJP के प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सिर्फ गिरफ्तारियां और ट्रांसफर से काम नहीं चलेगा. जवाबदेही तय होनी चाहिए. एक छात्र नेता ने कहा, “हमारे भविष्य से खेला जा रहा है. हर साल पेपर लीक हो रहा है. इस बार हमें इंसाफ चाहिए.”
24 घंटे का समय खत्म होने के बाद कल या परसों कुछ बड़ा फैसला आ सकता है. अगर प्रधान इस्तीफा नहीं देते तो प्रदर्शन और तेज हो सकते हैं. संसद का मॉनसून सेशन भी गरमाया हुआ है. विपक्ष लगातार हंगामा कर रहा है. यह मुद्दा सिर्फ एक मंत्री का नहीं है. पूरे एजुकेशन सिस्टम, कोचिंग माफिया और परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं.
aajtak.in