अशोक गहलोत के ताजा बयान में पुरानी बातों के जिक्र से नए राजनीतिक संकेत मिलने लगे हैं. राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनाने का फैसला हो चुका था, लेकिन एक साजिश की वजह से सब कुछ पलट गया - और आज भी लोग वह असली सच नहीं जानते हैं.
जयपुर में मीडिया से बात करते हुए अशोक गहलोत ने कहा, 'मुझे कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से रोकने की साजिश हुई थी... मैं तो राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना चाहता था, मैं क्यों मना करता.'
राजस्थान कांग्रेस की राजनीति में 2020 और 2022 की घटनाओं के बहाने अशोक गहलोत ने बयान ऐसे दौर में दिया है, जब कांग्रेस नेतृत्व निर्णायक और सख्त फैसले लेने लगा है. अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी मिलकर कांग्रेस के हित में फैसले भी ले रहे हैं, और उन पर अमल भी हो रहा है. केरल में मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस नेता का सेलेक्शन और कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन सबसे बड़ा उदाहरण है. एक दौर ऐसा भी रहा है जब अशोक गहलोत (और भूपेश बघेल) जैसे नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व के फैसलों को लागू ही नहीं होने दिया था.
ऐसे वक्त जबकि कांग्रेस नेतृत्व ने राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों ने नाम पर भी फैसला ले लिया है, आखिर अशोक गहलोत पुराने प्रसंगों का नए सिरे से जिक्र कर क्या हासिल करना चाहते हैं? क्या अशोक गहलोत किसी तरह की सफाई देने की कोशिश कर रहे हैं? लेकिन, अब ऐसी क्या जरूरत हो सकती है?
यह भी सुनने में आया है कि कांग्रेस संगठन में बड़े पैमाने पर फेरबदल हो सकता है. कर्नाटक में तो डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बन जाने के बाद प्रदेश कांग्रेस की कमान भी नए नेता को सौंपी जा चुकी है. क्या राजस्थान कांग्रेस में भी कुछ होने वाला है, या फिर अशोक गहलोत की नजर अब मल्लिकार्जुन खड़गे के बाद कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी पर जा टिकी है?
अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष बनना चाहते थे!
सीनियर कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने मीडिया के सामने अपनी बात कहने के साथ साथ सोशल साइट X पर भी अपना बयान पोस्ट किया है. अशोक गहलोत ने कहा, जिस पद पर कामराज, महात्मा गांधी, नेहरू और सरदार पटेल जैसे नेता रहे हों, और सोनिया गांधी मुझे कांग्रेस अध्यक्ष बनाती तो क्या मैं मना करता? वो तो स्थिति ऐसी बना दी... वो भी एक षड्यंत्र था... अचानक ऑब्जर्वर आ गए, तमाशा हो गया. बदनाम मैं हो गया.
सवालिया लहजे में अशोक गहलोत कहते हैं, अरे हाईकमान के खिलाफ बगावत होती तो मैं मुख्यमंत्री रह पाता क्या? अगर हम बगावत करते तो हाईकमान मुझे मुख्यमंत्री क्यों रखता? ये तो आरोप लगाने वाले को समझना चाहिए. अशोक गहलोत का तर्क है, हिंदुस्तान के इतिहास में जब कभी भी हाईकमान ने तय किया कि मुख्यमंत्री बदलना चाहिए, बदलने का फैसला कर लेते हैं तो 90 फीसदी एमएलए पुराने सीएम को छोड़ नए बनने वाले के पास चले जाते हैं... उन्हें पता होता है कि उनके काम तो नए मुख्यमंत्री से ही पड़ेंगे... ये तो मैंने देखा है, कोई नहीं रुकता है.
अशोक गहलोत का कहना है, 25 सितंबर (2022) की घटना उस व्यक्ति के खिलाफ ही हुई थी, जिसका नाम चल गया था कि वो मुख्यमंत्री की शपथ ले सकते हैं, पायलट साहब... इनके खुद के लोगों ने चला दिया... ऐसा माहौल बन गया कि 100 विधायक इकट्ठा हो गए.
किसने की साजिश?
बात 2022 की है. कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव होना था, राहुल गांधी कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत जोड़ो यात्रा पर निकले थे. असल में, 2019 के आम चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था. सोनिया गांधी कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनीं. पंजाब में कांग्रेस की राजनीति में उठापटक के बीच सवाल उठने लगे कि जब कांग्रेस के पास कोई स्थायी अध्यक्ष नहीं है तो फैसले कौन ले रहा है? तब ही कांग्रेस में सीनियर नेताओं का G-23 सामने आया, जिसने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर स्थायी कांग्रेस अध्यक्ष की मांग की, जो काम करता हुआ भी दिखे.
कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव का फैसला हुआ, और सोनिया गांधी चाहती थीं कि अशोक गहलोत नई जिम्मेदारी निभाएं. अशोक गहलोत के नई जिम्मेदारी निभाने का मतलब राजस्थान का मुख्यमंत्री पद छोड़ना होता. तब खबर ये भी आई थी कि अशोक गहलोत मुख्यमंत्री रहते हुए अध्यक्ष बनने को तैयार हैं, लेकिन राहुल गांधी ने यात्रा के दौरान ही आगे बढ़कर बोल दिया कि पार्टी उदयपुर चिंतन शिविर में लिए गए 'एक व्यक्ति, एक पद' के संकल्प का सख्ती से पालन करेगी. मतलब, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद और मुख्यमंत्री पद जैसे दो बड़ी जिम्मेदारियां एक वक्त में एक ही नेता के पास नहीं रहेंगी.
उसी दौरान कांग्रेस आलाकमान की तरफ से मल्लिकार्जुन खड़गे (तब अध्यक्ष नहीं) और अजय माकन ऑब्जर्वर बनाकर जयपुर भेजे गए, लेकिन विधायकों की बगावत के कारण बैरंग लौटना पड़ा. अशोक गहलोत बताते हैं, 'उस समय आलाकमान की ओर से भेजे गए मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन विधायक दल की बैठक तत्काल बुलाकर एक लाइन का प्रस्ताव पारित करवाना चाहते थे, जिसमें लिखा होता... 'विधायक दल के नेता का फैसला तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर छोड़ा गया.'
अशोक गहलोत का कहना है, मैंने दोनों नेताओं से एक दिन बाद बैठक बुलाने के लिए कहा था, लेकिन वे नहीं माने और प्रस्ताव पारित नहीं हो सका... मैंने सोनिया गांधी से मिलकर माफी मांगी.
अशोक गहलोत की हर बात में निशाने पर सचिन पायलट होते हैं, मैं कहना चाहूंगा पायलट साहब को सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए. गलती इंसान से ही तो होती है, मैं भी कर सकता हूं. उन्होंने गलती कर दी, तो स्वीकार कर लेना चाहिए. सचिन पायलट अगर उस दिन मेरी भावना समझ जाते... मैंने ये नहीं कहा कि मेरी गलती नहीं थी, उसकी गलती थी.
कांग्रेस नेता का कहना है कि पूरे मामले की असलियत आज भी बहुत कम लोगों को पता है. अशोक गहलोत का कहना है कि वो लगातार लोगों को समझाने की कोशिश करते हैं, लेकिन जो धारणा बन चुकी है वो हटाना आसान नहीं है. कहते हैं, वो इसलिए नहीं चूके क्योंकि उनकी इच्छा नहीं थी, बल्कि परिस्थितियां और साजिश इसके लिए जिम्मेदार थीं.
बीजेपी के बहाने सचिन पायलट और सचिन पायलट के कंधे पर बंदूक रखकर क्या अशोक गहलोत कांग्रेस आलाकमान को टार्गेट कर रहे हैं? मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन को तो कांग्रेस आलाकमान ने ही ऑब्जर्वर बनाकर भेजा था?
पुरानी बातें दोहराने का मकसद क्या है
कांग्रेस संगठन में काफी फेरबदल होने हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, केरलम और राजस्थान के साथ साथ असम, तमिलनाडु, बिहार, दिल्ली और पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बदले या बनाए जाने हैं. और, कम से कम चार राज्यों के लिए नए महासचिवों या प्रभारियों की नियुक्ति को लेकर भी खबरें आई हैं.
अशोक गहलोत की दिलचस्पी तो राजस्थान कांग्रेस में ही होगी. सोशल मीडिया पर चल रहा है कि सचिन पायलट को राजस्थान कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जा सकता है. हालांकि, राहुल गांधी ने हाल ही में राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद डोटासरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की सरेआम तारीफ भी की है. राहुल गांधी ने डोटासरा और जूली की जोड़ी को पूरे देश के लिए बेहतरीन मॉडल बताया था. ध्यान देने वाली बात यह भी रही कि पुष्कर के चिंतन शिविर जिसमें राहुल गांधी शामिल हुए, अशोक गहलोत नहीं पहुंचे थे. बताया गया कि अशोक गहलोत की सेहत ठीक नहीं थी.
क्या सचिन पायलट को कुछ और न मिले, अशोक गहलोत उसे रोकने की कोशिश में हैं? क्या अशोक गहलोत अब मल्लिकार्जुन खड़गे के बाद कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी पर दावा पेश कर रहे हैं?
मृगांक शेखर