अखिलेश यादव को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की मौजूदा पॉलिटिकल लाइन बहुत ज्यादा सूट करने लगी है. असल में, अविमुक्तेश्वरानंद उत्तर प्रदेश की राजनीति के उस छोर पर खड़े हो गए हैं, जहां से अखिलेश यादव को खूब राजनीतिक मसाला मिल जाता है. और, वक्त की नजाकत को समझते हुए अखिलेश यादव हर मौके का भरपूर फायदा उठाने की कोशिश भी कर रहे हैं.
असल में, अविमुक्तेश्वरानंद प्रयागराज महाकुंभ के बाद से ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से खफा हैं. और, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को यह काफी फायदेमंद लगता है. अविमुक्तेश्वरानंद ऐसा कोई मौका नहीं छोड़ते जिसमें योगी आदित्यनाथ को कठघरे में खड़ा करने का मौका लगता हो - और यही वजह लगती है कि अखिलेश यादव भी ऐसे मौके गंवाना नहीं चाहते जिनमें अविमुक्तेश्वरानंद का सपोर्ट राजनीतिक रूप से उनके एजेंडे को आगे बढ़ा देता हो.
अपनी 81 दिनों की 'गविष्टि गौ रक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा' के तहत लखनऊ पहुंचे ज्योतिर्मठ के प्रमुख स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने मुलाकात की, और उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी बीजेपी पर नए सिरे से हमला बोला. इससे पहले भी 12 मार्च को अखिलेश यादव की अविमुक्तेश्वरानंद से लखनऊ में ही मुलाकात हुई थी. करीब महीना भर पहले अखिलेश यादव की पत्नी और मैनपुरी सांसद डिंपल यादव ने भी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की थी.
अखिलेश यादव ने मुलाकात का एक एडिटेड वीडियो सोशल साइट X पर शेयर किया है, जिसमें दोनों की बातचीत के दौरान सनातन को समाजवाद से जुड़ा बताया जा रहा है.
सनातन, समाजवाद और राजनीति
आने वाले यूपी चुनाव की तैयारी कर रहे समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सोशल साइट X पर एक वीडियो शेयर किया है, और लिखा है - “जो सनातन है, वही समाजवाद है!”
वीडियो में देखा जा सकता है, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने ऊंचे आसन पर बैठे हैं, और उनके ठीक सामने अखिलेश यादव जमीन पर. अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर मुलाकात की कई तस्वीरें शेयर की हैं, जिनमें से एक में समाजवादी पार्टी नेता शंकराचार्य के पैर छूते हुए भी नजर आ रहे हैं.
अखिलेश यादव की तरफ से शेयर किए गए वीडियो में भी दोनों के बीच सनातन और समाजवाद पर बातचीत सुनाई दे रही है. मुलाकात के बाद अखिलेश यादव की तरफ से मीडिया को बताई गई बातों से मालूम होता है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से राम मंदिर में चढ़ावा चोरी विवाद पर भी चर्चा हुई है.
अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर अखिलेश यादव और अविमुक्तेश्वरानंद दोनों ही हमलावर हैं. अविमुक्तेश्वरानंद से मिलकर करीब आधा घंटा बाद बाहर आए अखिलेश यादव ने मीडिया से कहा, हमारे धर्म में चढ़ावे की चोरी महापाप है... इन्होंने महापाप किया है. भाजपा में भगदड़ शुरू भी हो गई है. बहुत सारे लोग मुझसे अभी से संपर्क करने लगे हैं. एसआईटी सिर्फ लीपापोती कर रही है. सुनने में आया कि एसआईटी पर भी सवाल खड़े हो गए. एक सदस्य पर 420 का मुकदमा है. यह लड़ाई बड़ी है. यह दिल्ली-लखनऊ की लड़ाई है.
चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर ही अखिलेश यादव ने अनुपम खेर के बयान पर भी रिएक्ट किया है. दरअसल, जाने माने एक्टर अनुपम खेर शूटिंग के सिलसिले में अयोध्या पहुंचे हैं. अनुपम खेर ने अपनी फेसबुक पोस्ट में बताया, अयोध्या में नई फिल्म ‘श्री राम भूमि’ की शूटिंग का पहला दिन है. मैंने श्री राम मंदिर जाकर रामलला का आशीर्वाद लिया. अपने लिए, अपने परिवार और दोस्तों के लिए, फिल्म के लिए और आप सभी के लिए भी.
अयोध्या में ही अनुपम खेर ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर भी टिप्पणी की थी, और अखिलेश यादव ने उसी पर सवाल उठाया है. अखिलेश यादव का कहना है, ये अजीब दलील है कि चोर को कोई कुछ न बोले लेकिन चोरी पकड़ने वालों को नसीहत दे. चोरों से इतनी सहानुभूति का कोई तो कारण होगा या कोई राजनीतिक मजबूरी.
असल में, अनुपम खेर ने कहा था, अगर घर में चोरी हो जाए, तो लोग पूरे घर पर जंजीर नहीं लगा देते. जिन्होंने यह किया है, उन्हें जरूर पकड़ा जाना चाहिए, लेकिन इसका दोष सनातन या रामजी पर नहीं लगाया जाना चाहिए.
अव्वल तो अखिलेश यादव की पार्टी राम मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवकों पर फायरिंग के लिए हमेशा ही निशाने पर रही है, लेकिन चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी के नेता सनातन की भी बात करने लगे हैं. खास बात यह है कि अविमुक्तेश्वरानंद का साथ हो जाना मददगार साबित हो रहा है.
योगी बनाम अविमुक्तेश्वरानंद
प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के पवित्र स्नान के दिन पुलिस अफसरों ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को रथ के साथ जाने से रोक दिया था. उसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद वहीं धरने पर बैठ गए. और, बगैर स्नान किए ही अपने मठ वाराणसी लौट गए. तब अखिलेश यादव ने एक्स पर एक लंबी पोस्ट में इस घटना के लिए यूपी में सत्ताधारी बीजेपी को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए हमला भी बोला था.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सनातन के लिए औरंगजेब से भी बुरा करार दिया था. उसके बाद हरियाणा के एक कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ के भाषण में 'कालनेमि' का जिक्र हुआ, तो उसे अविमुक्तेश्वरानंद के लिए संबोधन समझा गया था. योगी आदित्यनाथ ने कहा था, कई कालनेमि धर्म की आड़ लेकर सनातन को कमजोर कर रहे हैं. धर्म के खिलाफ आचरण करने वाला सनातन परंपरा का प्रतिनिधि नहीं हो सकता. बाद में अविमुक्तेश्वरानंद की भी प्रतिक्रिया आई थी.
अविमुक्तेश्वरानंद का कहना था, योगी आदित्यनाथ बताएं कि वो कौन है जो साधु-संत के रूप में धर्म विरोधी कार्य कर रहा है? कौन है जो सनातन विरोधी कार्य कर रहा है? मुख्यमंत्री बताएं कि आखिर 'कालनेमि' कौन है? उनके नाम तो बताएं, तब हम जानें. उनका इशारा किस तरफ है, ये वही जानें, लेकिन बात उन्होंने एकदम सही कही कि धर्म की आड़ में जो अधर्म कर रहे हैं वो 'कालनेमि' से कम नहीं हैं.
उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने में कुछ ही महीने बचे हैं. अगर तय समय पर हुए तो अगले साल 2027 के शुरू में, नहीं तो 2026 के आखिर में भी चुनाव कराए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं. अविमुक्तेश्वरानंद का सत्ताधारी बीजेपी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ हो जाना, अखिलेश यादव के पक्ष में जाता है - और इसी बात का फायदा उठाने की कोशिश हो रही है.
यह तो मौजूदा माहौल और राजनीतिक समीकरण है, जो अखिलेश यादव और अविमुक्तेश्वरानंद एक छोर पर खड़े नजर आ रहे हैं - वरना, जब यूपी पुलिस ने अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों पर जब लाठी बरसाई थी, तब सूबे में समाजवादी पार्टी की ही सरकार हुआ करती थी.
डिंपल की मुलाकात और माफी की गुजारिश
प्रयागराज से पहले बनारस में भी अविमुक्तेश्वरानंद का पुलिस से टकराव हुआ था. 23 सितंबर 2015 अविमुक्तेश्वरानंद गंगा में गणेश की मूर्ति विसर्जन को लेकर आंदोलन कर रहे थे, उसी दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया. लाठीचार्ज में कई लोग घायल भी हो गए थे - और यह तब की बात है जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हुआ करते थे.
महीना भर पहले ही मैनपुरी सांसद डिंपल यादव ने भी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की थी. मुलाकात के दौरान डिंपल यादव ने बताया था कि गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने की मुहिम को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हैं, और आगे भी हमेशा रहेंगे.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से उनके कन्नौज दौरे का ध्यान दिलाते हुए डिंपल यादव ने कहा था, अखिलेशजी को बहुत दुख है. आप उनके चुनाव क्षेत्र में आए और वहां पर आपका अपमान हुआ. आपको सड़क पर सोना पड़ा. उनको जानकारी नहीं थी, नहीं तो व्यवस्था करते. अखिलेशजी ने आपसे माफी मांगी है.
डिंपल यादव की बात सुनकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बोले, इसमें आपकी गलती ही नहीं थी तो माफी किस बात की. फिर भी संवेदनशीलता दिखाते हुए उन्होंने जो ये प्रयास किया, इससे हमको अच्छा लगा.
तब तक शायद 2015 के पुलिस लाठीचार्ज की बातें भूल गई थीं. राजनीति के मामले में माना जाता है कि लोगों की स्मृतियां तो कमजोर होती हैं. लेकिन, यह राजनीति ही है, जिसमें नए मकसद के लिए पुराने गिले शिकवे भुला दिए जाते हैं. तभी तो डिंपल यादव को पुलिस लाठीचार्ज के लिए माफी मांगने की जरूरत नहीं पड़ी, और लगता है अविमुक्तेश्वरानंद को भी बीती बातें भुला देने में ही भलाई नजर आ रही है.
मृगांक शेखर