सड़क निर्माण के नाम पर लगाए 55 करोड़ के फर्जी बिल, ईडी ने कसा शिकंजा, सीज की नकदी

मध्य प्रदेश में सड़क निर्माण से जुड़े कथित फर्जी बिल मामले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है. छापेमारी के दौरान नकदी बरामद की गई है, जबकि करोड़ों रुपये की बैंक जमा राशि भी फ्रीज की गई है. फिलहाल इस मामले में सरकारी भुगतान हासिल करने के लिए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किए जाने की जांच की जा रही है.

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मध्य प्रदेश में सड़क घोटाले को लेकर ईडी की बड़ी कार्रवाई. (reparation photo) मध्य प्रदेश में सड़क घोटाले को लेकर ईडी की बड़ी कार्रवाई. (reparation photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:30 PM IST

मध्य प्रदेश में सड़क निर्माण के नाम पर 55 करोड़ रुपये के जाली बिल लगाने का एक बड़ा खुलासा हुआ है. इस पूरे फर्जीवाड़े को लेकर ED ने प्रदेश के रीवा और जबलपुर जिलों में बड़ी छापेमारी की. इस कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी ने करीब 23.50 लाख रुपये कैश बरामद किया. साथ ही अलग-अलग बैंक खातों में जमा 2.93 करोड़ रुपये की रकम को भी फ्रीज कर दिया है. ईडी का आरोप है कि सड़क निर्माण कार्यों के लिए 55.60 करोड़ रुपये के फर्जी बिल लगाकर सरकारी भुगतान हासिल किया गया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा.

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ED ने यह कार्रवाई 19 जून को मध्य प्रदेश के रीवा और जबलपुर जिलों में की. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एजेंसी ने बताया कि यह मामला राज्य पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा की ओर से दर्ज FIR के आधार पर सामने आया था. इसके बाद धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत जांच शुरू की गई.

जांच एजेंसी के मुताबिक, कुछ ठेकेदारों ने सड़क निर्माण परियोजनाओं से जुड़े अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी भुगतान हासिल करने की साजिश रची. आरोप है कि इसके लिए कई कंपनियों के नाम पर जाली और मनगढ़ंत बिल तैयार किए गए. इन बिलों को सड़क निर्माण में खर्च दिखाकर भुगतान लिया गया. इस पूरे मामले पर ईडी का कहना है कि फर्जीवाड़े में तेल कंपनियों के जाली चालान इस्तेमाल किए गए, जिनकी कुल कीमत 55.60 करोड़ रुपये पाई गई है.

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छापेमारी में क्या मिला?

ईडी ने बताया कि तलाशी के दौरान 23.50 लाख रुपये नकद बरामद हुए. इसके अलावा 2.93 करोड़ रुपये की बैंक जमा राशि को भी फ्रीज किया गया है. एजेंसी अब पैसों के लेनदेन, कथित साजिश और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है.

फिलहाल ED पूरे मामले की पड़ताल कर रही है. एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश में जुटी है कि फर्जी बिल तैयार करने से लेकर भुगतान हासिल करने तक किन-किन लोगों की भूमिका रही और इस कथित गड़बड़ी से किसे कितना फायदा पहुंचा.

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