लाड़ली बहना पर हाईकोर्ट का नोटिस! MP सरकार से 4 हफ्ते में जवाब, हर महीने 1,900 करोड़ रुपये खर्च का मुद्दा

मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना को लेकर हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में जनहित याचिका दायर हुई है. योजना की उपयोगिता और सरकारी खजाने पर पड़ने वाले आर्थिक भार पर सवाल उठाए गए हैं. कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है. योजना के लाभार्थियों, भुगतान और संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी भी मांगी गई है.

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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट. (File Photo: ITG) मध्य प्रदेश हाईकोर्ट. (File Photo: ITG)

सर्वेश पुरोहित

  • ग्वालियर ,
  • 17 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:22 PM IST

मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना को लेकर अब हाईकोर्ट में सवाल उठाए गए हैं. योजना की उपयोगिता, सरकारी खजाने पर पड़ रहे आर्थिक भार और महिलाओं को दी जा रही राशि के इस्तेमाल को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है. हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने मामले में प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है. ग्वालियर की सुधा दुबे की ओर से दायर इस जनहित याचिका में योजना से जुड़े कई सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने कोर्ट में पक्ष रखा. हाईकोर्ट ने सरकार से योजना के लाभार्थियों, उन्हें दी जा रही राशि और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी भी मांगी है.

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याचिकाकर्ता की ओर से योजना के तहत खर्च होने वाली सरकारी राशि के इस्तेमाल पर सवाल उठाया गया है. वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा का कहना है कि महिलाओं के कल्याण के नाम पर खर्च हो रहे सरकारी पैसे का इस्तेमाल रोजगार और स्थायी आर्थिक अवसर पैदा करने में किया जा सकता था.  उनका तर्क है कि अगर महिलाओं के हित में पैसा खर्च करना था तो इससे उद्योग-धंधे या रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते थे. उनका कहना है कि रोजगार के जरिए पैसा आर्थिक गतिविधियों में बना रह सकता है और महिलाओं को लंबे समय तक इसका फायदा मिल सकता है. अनिल मिश्रा ने सवाल उठाया कि सरकार इस पैसे से क्या फायदा हासिल कर रही है, यह स्पष्ट होना चाहिए. उनके मुताबिक, सीधे राशि देने की बजाय अगर महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाए तो उससे आर्थिक गतिविधियों का एक चक्र बन सकता है.

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सरकारी खजाने पर पड़ रहे बोझ को लेकर उठे सवाल

वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने योजना के खर्च को लेकर दावा किया कि हर महीने करीब 1,900 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. उन्होंने सरकारी खजाने की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अगर कर्ज लेकर पैसा बांटा जाएगा तो बेरोजगारी और बढ़ सकती है. उनके मुताबिक, जनता के टैक्स से आने वाले पैसे का इस्तेमाल डेवलपमेंट, एजुकेशन और रोजगार जैसे क्षेत्रों में किया जाना चाहिए. वकील ने यह भी दावा किया कि मध्य प्रदेश पर करीब 3.08 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है. हालांकि यह आंकड़ा और इससे जुड़े आर्थिक प्रभाव याचिकाकर्ता की ओर से रखी गई दलीलों का हिस्सा हैं. इन दावों पर राज्य सरकार का जवाब अभी सामने आना बाकी है.

याचिकाकर्ता की ओर से लाड़ली बहना योजना के लागू होने के समय को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. अनिल मिश्रा ने कहा कि योजना मार्च 2023 में लागू की गई थी और उस समय चुनाव का माहौल था. उन्होंने योजना को चुनाव के समय तोहफे बांटने जैसी स्थिति बताते हुए इस पर सवाल उठाया. यह याचिकाकर्ता की ओर से रखी गई दलील है. इस मामले में सरकार का पक्ष अभी आना बाकी है.

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मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से योजना से जुड़े आंकड़े और रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा है. कोर्ट ने यह जानकारी भी मांगी है कि योजना के कितने लाभार्थी हैं और उनके लिए कितनी राशि का भुगतान किया जा रहा है. सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करना है. सरकारी वेबसाइट पर वर्तमान में करीब 1 करोड़ 25 लाख पात्र आवेदक दर्ज हैं. याचिकाकर्ता की ओर से इसी योजना के वित्तीय असर और इसके उद्देश्य को लेकर सवाल उठाए गए हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने कहा कि सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी किए हैं, ताकि सरकार इन सवालों पर अपना जवाब दे सके. अब सरकार को योजना से जुड़े आंकड़े और रिकॉर्ड अदालत के सामने रखने हैं.

रोजगार और स्वरोजगार के जरिए महिलाओं को मजबूत किया जाए

लाड़ली बहना योजना को लेकर हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के बावजूद फिलहाल योजना को बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है. कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है और मामले की आगे की कार्रवाई सरकार के जवाब के बाद होगी. याचिकाकर्ता की मुख्य दलील है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए सीधे भुगतान के बजाय रोजगार और स्वरोजगार के स्थायी अवसर पैदा करने पर सरकारी धन खर्च किया जाना चाहिए. अब इस मामले में सरकार के जवाब पर नजर रहेगी. सरकार को यह बताना होगा कि योजना का उद्देश्य क्या है, इसके तहत कितने लाभार्थी हैं, कितनी राशि वितरित की जा रही है और योजना से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड क्या हैं. इसके बाद हाईकोर्ट में मामले की आगे सुनवाई होगी.

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