बच्चों की फोन की लत से हैं परेशान? बिना डांटे ऐसे कम करें स्क्रीन टाइम, अपनाएं 5 आसान तरीके

आजकल छोटे बच्चों में मोबाइल और स्क्रीन की लत एक बड़ी समस्या बन चुकी है. अचानक फोन छीनने से बच्चे अक्सर रोने-चिल्लाने लगते हैं. इस आर्टिकल में हम आपको 5 ऐसे आसान और असरदार पैरेंटिंग टिप्स बताने जा रहे हैं, जिनकी मदद से आप बिना किसी लड़ाई-झगड़े के बच्चों का स्क्रीन टाइम आसानी से कम कर सकते हैं.

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बच्चों को खेल में लगाकर उनको फोन से दूर किया जा सकता है. (PHOTO:AI) बच्चों को खेल में लगाकर उनको फोन से दूर किया जा सकता है. (PHOTO:AI)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:30 PM IST

How to Reduce Kids Screen Time: आजकल मोबाइल के बिना छोटे बच्चे भी रहते नहीं है और फोन में कार्टून देखकर ही खाना खाते हैं. मोबाइल फोन के बिना जैसे उनकी लाइफ ही नहीं है, फोन उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है. बच्चों के घरों में फोन, टैबलेट या टीवी के ज्यादा देखने की वजह से घरों में काफी बहस भी होती है और जैसे ही आप स्क्रीन बंद करते हैं या बच्चों के हाथ से मोबाइल छीनते हैं, उनका रोना-धोना शुरू हो जाता है. 

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इतना ही नहीं क उम्र में ही बच्चों लड़ने-झड़ने लगते हैं, लोग सोचते हैं कि सिर्फ मेरा ही बच्चा ऐसा कर रहा है तो आप गलत है. क्योंकि आजकल हर दूसरे बच्चे की समस्या है. आज कई माता-पिता बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करना चाहते हैं, लेकिन सख्ती या अचानक फोन छीनने से स्थिति और बिगड़ जाती है. अगर आप भी अपने बच्चों को स्क्रीन से दूर रखना चाहते हैं तो इसके लिए आपको यह समझना जरूरी है कि उन पर सीधे रोक लगाने की बजाय आप उनको प्यार और मजेदार एक्टिविटी के साथ उनका रूटीन बदल सकते हैं. 

आइए जानते हैं 5 ऐसे आसान तरीके, जिनसे बिना लड़ाई-झगड़े के बच्चों का स्क्रीन टाइम कम किया जा सकता है.

स्क्रीन टाइम का टाइम डिसाइड करें

बच्चे जब मन करे तब फोन या टीवी देखने लगें, तो स्क्रीन टाइम कम करना मुश्किल हो जाता है. इसलिए दिन में स्क्रीन देखने के लिए दो से तीन निश्चित समय तय करें. जैसे- लंच के बाद 30 मिनट या होमवर्क पूरा करने के बाद 45 मिनट. बच्चे को पहले से बता दें कि उसे कब स्क्रीन मिलेगी. आप इसके लिए एक छोटा सा टाइम-टेबल भी बना सकते हैं, जिसमें खाने, खेलने, पढ़ने और स्क्रीन टाइम का समय लिखा हो. इससे बच्चे को यह फील नहीं होगा कि उससे फोन छीना जा रहा है, बल्कि उसे पता रहेगा कि स्क्रीन देखने का उसका समय कब आएगा.

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अचानक फोन न छीनें, पहले दें चेतावनी

बच्चा किसी वीडियो या गेम में बिजी हो और अचानक फोन बंद कर दिया जाए, तो उसका गुस्सा होना स्वाभाविक है. इसलिए स्क्रीन टाइम खत्म होने से पहले उसे धीरे-धीरे तैयार करें. पहले 10 मिनट बाकी होने की जानकारी दें. फिर 5 मिनट और आखिर में 2 मिनट की चेतावनी दें. आप बच्चे के साथ मिलकर टाइमर भी लगा सकते हैं.

इसके साथ ही यह भी बताएं कि फोन बंद करने के बाद क्या करना है, जैसे- टाइमर बजने के बाद हम बाहर गेंद खेलेंगे या इसके बाद तुम अपनी ड्राइंग पूरी कर सकते हो. इस तरह स्क्रीन हटाने के बजाय बच्चे का ध्यान किसी दूसरी एक्टिविटी की ओर आसानी से मोड़ा जा सकता है.

घर में कुछ जगहों और समय को स्क्रीन-फ्री रखें

स्क्रीन टाइम कम करने के लिए पूरे घर में नियम बनाने की जरूरत नहीं है. शुरुआत कुछ खास जगहों और समय से करें. जैसे डाइनिंग टेबल पर फोन नहीं चलेगा, बेडरूम में स्क्रीन नहीं होगी और सुबह उठने के बाद या सोने से पहले कुछ समय फोन से दूरी रहेगी. इन नियमों को बच्चे के लिए सजा की तरह न बनाएं. इसे पूरे परिवार का नियम बनाएं. अगर माता-पिता भी खाने के समय फोन दूर रखेंगे, तो बच्चे के लिए रूल फॉलो करना आसान होगा.

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स्क्रीन के बदले मजेदार चीजें पहले से तैयार रखें

अगर आप बच्चे से सिर्फ यह कहेंगे कि अब टैबलेट बंद करो, लेकिन उसके बाद करने के लिए कुछ नहीं देंगे, तो वह दोबारा स्क्रीन देखने की मांग करेगा. इसलिए यह सबसे ज्यादा जरूरी है कि आप स्क्रीन के बदले उनको दूसरी एक्टिविटी में बिजी करें. बच्चों को पजल, ड्राइंग, कलरिंग, ब्लॉक्स, बोर्ड गेम, गेंद खेलने या छोटी-सी क्राफ्ट एक्टिविटी में लगाया जा सकता है.

छोटे बच्चों के लिए शेप मैचिंग, बीड्स को अलग-अलग करना, ड्राइंग या खिलौनों को ठीक से रखने जैसी एक्टिविटी भी अच्छी हो सकती हैं. कोशिश करें कि अगली एक्टिविटी बच्चे को मजेदार लगे, ताकि उसे स्क्रीन से दूर जाना सजा जैसा महसूस न हो.

प्यार से बच्चों को स्क्रीन से दूर रखें

स्क्रीन टाइम कम करते समय बच्चे का नाराज होना, रोना या जिद करना नॉर्मल हो सकता है. ऐसे समय पर उसके गुस्से को समझें, लेकिन तय नियम को बार-बार न बदलें. अगर बच्चा रोता है और आप उसके स्क्रीन टाइम को बढ़ा देते हैं तो इससे उसको लगने लगता है कि रोने से प्रेशर बनता है. 

सबसे जरूरी है माता-पिता की कंसिस्टेंसी

बच्चों की स्क्रीन की आदत एक दिन में नहीं बदलेगी. शुरुआत में वे विरोध कर सकते हैं, लेकिन अगर स्क्रीन टाइम का समय तय हो, स्क्रीन बंद करने से पहले चेतावनी मिले और उसके बाद मजेदार ऑप्शन मौजूद हों, तो धीरे-धीरे यह नई लाइफस्टाइल काका हिस्सा बन सकता है.

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