Gen Z Sleep Maxing: नींद पूरी करने की Gen Z टेक्नीक आपकी भी करेगी मदद, करना होगा ऐसा!

जेन जी अच्छी नींद को लेकर काफी गंभीर है और इसके लिए नए-नए तरीके आजमा रही है. स्लीप ट्रैकर, स्मार्टवॉच, कूलिंग डिवाइस, सप्लीमेंट्स और कई वायरल स्लीप हैक्स के जरिए वह अपनी नींद को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है. आखिर क्या है ये स्लीप मैक्सिंग ट्रेंड और जेन जी इसके पीछे क्यों भाग रही है

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जेन जी के बीच क्यों बढ़ रहा है स्लीप मैक्सिंग का ट्रेंड? जेन जी के बीच क्यों बढ़ रहा है स्लीप मैक्सिंग का ट्रेंड?

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:42 PM IST

अच्छी नींद और पूरी नींद किसे अच्छी नहीं लगती. लेकिन सवाल ये है कि सब अच्छी नींद सो पाते है? इसका जवाब है नहीं. जहां पुरानी पीढ़ियां नींद पूरी न होने के कारण से परेशान रहती है वहीं जेन जी इससे कॉम्प्रॉमाइज करती हुई नहीं दिख रही है. जेन जी ने इसके लिए भी एक सल्यूशन निकाल लिया है. जेन जी अपनी नींद को बेहतर और परफेक्ट बनाने के लिए हर तरीके की कोशिश कर रही है. 

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पुराने वक्त से चली आ रही एक बहुत प्रचलित बात है कि आदमी जितना कम सोएगा और जितना ज्यादा मेहनत करेगा उसके लिए उतना बेहतर है. कहने वालों का तो ये भी कहना है कि 5-6 घंटे की नींद एक व्यक्ति के लिए काफी है. लेकिन जेन जी इस चीज से ताल्लुक रखते हुए बिल्कुल नहीं दिख रही है. Gen Z के बीच अच्छी नींद को लेकर सोच काफी अलग और सकारात्मक है. जेन जी मानती है कि एक व्यक्ति के लिए 8-9 घंटे की नींद जरूरी है. हां वो रात तक जग कर मेहनत जरूर करना चाहती है लेकिन बिना अपनी नींद कॉम्प्रमाइज किए.  जेन जी भाषा में इसे 'स्लीप मैक्सिंग' कहा जा रहा है. 

स्लीप मैक्सिंग क्या है?

स्लीप मैक्सिंग जेन जी के बीच एक ऐसा हेल्थ और वेलनेस ट्रेंड है जिसमें जेन जी अपने नींद की क्वालिटी और क्वांटिटी को अधिक से अधिक बेहतर बनाने के लिए लिए अलग-अलग तकनीकों, गैजेट्स और हैबिट्स का यूज करते है. इस ट्रेंड का मुख्य उद्देश्य सिर्फ 7 से 8 घंटे सोना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि वो नींद गहरी, सुकूनभरी और बॉडी को पूरी तरह फ्रेश करने वाली हो.

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फॉर्च्यून बिजनेस इनसाइट्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में नींद पर नजर रखने वाले स्लीप ट्रैकर का बाजार 2026 में करीब 7.74 अरब डॉलर का है और 2034 तक ये बढ़कर 25 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. वहीं, मॉर्डर इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, मैग्नीशियम सप्लीमेंट का बाजार 2026 में करीब 8.34 अरब डॉलर का है और 2031 तक इसके 11.78 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. यानी अच्छी नींद के लिए लोग अब स्लीप ट्रैकर और सप्लीमेंट जैसी चीजों का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं

स्लीप मैक्सिंग में क्या-क्या किया जाता है?-

1. सोने का माहौल बेहतर करना: स्लीप मैक्सिंग में सबसे पहले सोने की जगह को आरामदायक बनाने पर ध्यान दिया जाता है. कमरे को अंधेरा, शांत और ठंडा रखा जाता है, ताकि शरीर और दिमाग आसानी से रिलैक्स हो सकें. कई लोग सोने से पहले फोन और तेज रोशनी से भी दूरी बनाने की कोशिश करते हैं.

2. गैजेट्स और तकनीक का इस्तेमाल: जेन जी अपनी नींद को बेहतर समझने के लिए स्लीप ट्रैकर और स्मार्टवॉच का इस्तेमाल करती है. ये डिवाइस नींद कितने घंटे हुई, हार्ट रेट और नींद के अलग-अलग लेवल्स जैसी जानकारी देते हैं. कुछ लोग व्हाइट नॉइज मशीन, भारी कंबल और रेड लाइट जैसे विकल्प भी आजमाते हैं.

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3. खाने-पीने का ध्यान: स्लीप मैक्सिंग में सोने से पहले क्या खाया-पिया जा रहा है, इस पर भी ध्यान दिया जाता है. कुछ लोग कीवी जैसे फल खाते हैं, जबकि कुछ लोग मैग्नीशियम या मेलाटोनिन जैसे सप्लीमेंट्स लेते हैं. हालांकि सप्लीमेंट्स लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है.

4. वायरल स्लीप हैक्स: सोशल मीडिया पर नींद से जुड़े कई नए तरीके वायरल होते रहते हैं, जिन्हें युवा आजमा रहे हैं. इनमें माउथ टेपिंग, गहरी सांस लेना और मेडिटेशन जैसे तरीके शामिल हैं. हालांकि इंटरनेट पर वायरल होने वाला हर तरीका जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित या सही हो.

यानी जेन जी के लिए नींद अब सिर्फ रात में सोने की चीज नहीं रह गई है. वो इसे अपनी हेल्थ और रोजमर्रा की जिंदगी का जरूरी हिस्सा मान रही है. स्लीप ट्रैकर से लेकर अलग-अलग स्लीप हैक्स तक, जेन जी अच्छी नींद के लिए कई तरीके आजमा रही है. हालांकि हर ट्रेंड या गैजेट जरूरी नहीं कि हर किसी के लिए काम करे. इसलिए अच्छी नींद के लिए ट्रेंड को फॉलो करने से ज्यादा जरूरी है कि शरीर की जरूरत को समझा जाए और नींद को लेकर सही आदतें अपनाई जाएं.
 

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