'Dharm Sansad यूपी चुनाव का माहौल खराब करेंगी, लगे रोक', सुप्रीम कोर्ट में बोले कपिल सिब्बल

हरिद्वार में धर्मसंसद के दौरान नफरत फैलाने वाले भाषणों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है. कोर्ट ने इस मामले पर उत्तराखंड सरकार को नोटिस भेजा है.

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हरिद्वार धर्म संसद मसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई हरिद्वार धर्म संसद मसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई

अनीषा माथुर / संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 12 जनवरी 2022,
  • अपडेटेड 1:37 PM IST
  • धर्म संसद मसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई
  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस भेजा
  • 10 दिनों में जवाब मांगा, तब होगी अगली सुनवाई

हरिद्वार में धर्मसंसद (Haridwar Dharam sansad) के दौरान नफरत फैलाने वाले भाषणों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने भाषण के लिखित हिस्से को कोर्ट को सौंपा और कहा कि उनकी भाषा ऐसी है जिनको वह पढ़ नहीं सकते. इतना ही नहीं सिब्बल ने कहा कि आने वाले वक्त में कुछ और धर्म संसद होने वाली हैं, जिनसे चुनावी माहौल बिगड़ सकता है. फिलहाल कोर्ट ने आने वाले वक्त में होने वाली धर्म संसदों पर रोक नहीं लगाई है. कोर्ट की तरफ से उत्तराखंड की सरकार को इसपर नोटिस जरूर जारी हुआ है. सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस की बेच मसले पर सुनवाई कर रही है, उत्तराखंड और केंद्र सरकार से 10 दिनों के भीतर इसपर जवाब मांगा गया है.

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याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश कपिल सिब्बल ने कहा था कि यूपी के विभिन्न जिलों में आने वाले वक्त में कई धर्म संसद होनी हैं. यहां ऊना, डासना और अलीगढ़ का जिक्र किया गया था. कहा था कि इससे चुनावी माहौल गर्म हो सकता है, सिब्बल ने इनपर रोक की मांग की थी. फिलहाल ऐसी धर्म संसदों पर रोक नहीं लगाई है. वहीं कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि 23 जनवरी को अलीगढ़ में होने वाली धर्म संसद से जुड़े मुद्दे को स्थानीय प्रशासन के सामने उठाया जाए.

सुनवाई के दौरान भाषण के लिखित हिस्से को कपिल सिब्बल ने कोर्ट को सौंपा. उन्होंने कहा कि भाषा ऐसी है कि वो पढ़ नहीं सकते. कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर राज्य सरकार और केंद्र को नोटिस जारी कर उनका रुख जानने से पहले कोई कार्रवाई नहीं हो सकती.

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सुनवाई में क्या कुछ हुआ

कोर्ट ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट ने कहा कि वहां सरकारें भी देख रही हैं. सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों के हवाले से कहा कि उनमें भी ऐसी घटनाओं पर एक्शन लेने के लिए नोडल ऑफिसर की बहाली भी करनी होती है. लेकिन कोर्ट की इन हिदायतों का पालन नहीं किया जा रहा है.

आपस में विचार विमर्श के बाद सीजेआई की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने कहा कि हमें पता चला है कि किसी और पीठ के सामने भी ऐसे ही मामले की सुनवाई लंबित है. याचिकाकर्ता कुर्बान अली और जस्टिस अंजना प्रकाश के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि हमने तो ऐसी कोई अर्जी कहीं और नहीं लगाई है. हमें कहा गया कि जस्टिस खानविलकर की पीठ ने ये मामला आपके सामने लाने की बात कही थी. 

वकील कालीश्वरम ने कोर्ट को बताया कि जस्टिस चंद्रचूड़ की पीठ जरूर सुदर्शन टीवी के एक ऐसे ही कार्यक्रम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है. वकील शादान फरासत ने कहा कि वैसे तो घृणा भाषण के कई मामले हैं लेकिन धर्मसंसद में नफरत फैलाने वाले ऐसे भाषण का ये पहला मामला है.

कोर्ट ने कहा कि अगर आप सभी मामलों को यहीं टैग करना चाहते हैं तो ये मुमकिन नहीं है. कोर्ट ने कहा कि हमने नोटिस जारी कर दिए हैं दस दिन में जवाब मांगे हैं. इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि 23 जनवरी को अलीगढ़ में भी धर्म संसद है. ऐसे में सोमवार को इस पर अगली सुनवाई जरूरी है. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकार्ता उस धर्म संसद के बारे में अपनी आपत्तियों पर वहां के स्थानीय निकायों और प्रशासन को जानकारी दें.

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