बेंगलुरु के 90 से ज्यादा अस्पतालों में कैंसर की नकली दवा की सप्लाई, बड़े रैकेट का खुलासा

बेंगलुरु में कैंसर और अन्य क्रिटिकल दवाओं के रैकेट का पर्दाफाश हुआ है. जांचकर्ताओं को शक है कि यह नेटवर्क अस्पतालों, क्लीनिकों और मेडिकल दुकानों को नकली कैंसर की दवाएं, जीवन रक्षक दवाएं और ICU इंजेक्शन सप्लाई कर रहा था.

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अधिकारियों को यह भी शक है कि एक्सपायर हो चुकी दवाओं को नए कंटेनरों में रीपैकेज किया जाता था. (सांकेतिक फोटो) अधिकारियों को यह भी शक है कि एक्सपायर हो चुकी दवाओं को नए कंटेनरों में रीपैकेज किया जाता था. (सांकेतिक फोटो)

सगाय राज

  • बेंगलुरु,
  • 14 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:43 PM IST

बेंगलुरु में कैंसर और अन्य क्रिटिकल दवाओं के रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है. जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि शहर के 90 से ज्यादा अस्पतालों और क्लीनिकों में नकली या रीपैक्ड दवाइयां सप्लाई की गई थीं.

बेंगलुरु पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट की संयुक्त जांच के बाद फार्मेसी के मालिक वीरेश कुमार जैन को गिरफ्तार किया गया है. वीरेश पर इस नेटवर्क का हिस्सा होने का शक है.

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मिनर्वा सर्कल के पास कृपा हेल्थकेयर पर अधिकारियों की छापेमारी के बाद जांच में तेजी आई. वहां से बड़ी मात्रा में नकली दवाएं बरामद की गईं.

जांचकर्ताओं को शक है कि यह नेटवर्क अस्पतालों, क्लीनिकों और मेडिकल दुकानों को नकली कैंसर की दवाएं, जीवन रक्षक दवाएं और ICU इंजेक्शन सप्लाई कर रहा था. 

बताया जा रहा है कि ये दवाएं कथित तौर पर लगभग 50 प्रतिशत छूट पर बेची जा रही थीं. जांचकर्ताओं के मुताबिक, इस रैकेट में सस्ती दवाएं खरीदी जाती थीं और उन्हें अलग-अलग नामों से रीब्रांड करके ज़्यादा कीमत पर बेचा जाता था.

अधिकारियों को यह भी शक है कि एक्सपायर हो चुकी दवाओं को नए कंटेनरों में रीपैकेज किया जाता था और उन पर नकली लेबल लगाए जाते थे. इनमें से कुछ लेबल कथित तौर पर जानी-मानी फार्मास्युटिकल कंपनियों की ब्रांडिंग जैसे दिखते थे.

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मिनर्वा सर्कल के पास कृपा हेल्थकेयर के परिसर में मेडिकल दुकानों, अस्पतालों और क्लीनिकों में दवाएं भेजने से पहले स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट के तौर पर काम करने का संदेह है.

जांचकर्ता अब यह पता लगा रहे हैं कि क्या इस संदिग्ध रैकेट का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था. शक है कि 15 से ज़्यादा मेडिकल रेप्रेज़ेन्टेटिव्स ने दवाओं के ट्रांसपोर्टेशन या डिस्ट्रीब्यूशन में भूमिका निभाई थी.

जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (पश्चिम) और SIT के प्रमुख वामसी कृष्णा ने कहा कि नेटवर्क के पूरे दायरे का अभी पता लगाया जाना बाकी है. पुलिस दवाओं की आवाजाही और पैसे के लेन-देन का पता लगाने के लिए जांच के दौरान ज़ब्त किए गए बैंक ट्रांज़ैक्शन की जानकारी, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज़ों की जांच कर रही है.

पुलिस को शक है कि वीरेश कुमार लगभग पांच साल से यह फर्म चला रहा था. जांचकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि उनका संबंध प्रशांत से था, जिसे वे मुख्य आरोपी और नेटवर्क का संदिग्ध सरगना बताते हैं. प्रशांत अभी फरार है और पुलिस टीमें उसे खोजने की कोशिश कर रही हैं. इस मामले में अभी तक केवल वीरेश कुमार की गिरफ्तारी हुई है.

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