क्या आपने कभी बीयर के गिलास में मूंगफली डालते हुए देखा है? अगर हां, तो आपने एक अजीब चीज जरूर नोटिस की होगी. मूंगफली को बीयर में डालते ही वह पहले नीचे चली जाती है, लेकिन कुछ देर बाद अचानक ऊपर आने लगती है. फिर ऊपर पहुंचकर दोबारा नीचे जाती है और कुछ समय बाद फिर ऊपर आ जाती है. ऐसा बार-बार होता है, जैसे मूंगफली बीयर के गिलास में ‘डांस’ कर रही हो. यह कोई जादू या बीयर का कमाल नहीं, बल्कि इसके पीछे पूरा विज्ञान काम करता है. वैज्ञानिकों ने भी इस दिलचस्प घटना पर रिसर्च की है.
पहले नीचे क्यों जाती है मूंगफली?
जब साबुत, भुनी और छिली हुई मूंगफली को बीयर में डाला जाता है, तो वह शुरुआत में नीचे की तरफ जाती है. इसकी वजह यह है कि मूंगफली बीयर से ज्यादा घनी होती है. इसलिए उसका वजन उसे नीचे खींचता है. लेकिन कुछ ही समय बाद कहानी बदलने लगती है. मूंगफली की सतह पर बीयर में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड गैस के बहुत छोटे-छोटे बुलबुले बनने लगते हैं. यही बुलबुले आगे चलकर मूंगफली को ऊपर उठाने का काम करते हैं.
मूंगफली पर ही क्यों बनते हैं बुलबुले?
बीयर में कार्बन डाइऑक्साइड गैस घुली होती है. जब बीयर को बोतल या कैन से बाहर निकालकर गिलास में डाला जाता है, तो दबाव कम होने की वजह से यह गैस बाहर निकलने लगती है. मूंगफली की सतह ऐसी जगह उपलब्ध कराती है, जहां गैस के छोटे बुलबुले आसानी से बन सकते हैं. वैज्ञानिक भाषा में इसे ‘न्यूक्लिएशन साइट’ कहा जाता है. यानी मूंगफली की सतह बुलबुले बनने के लिए एक तरह का आधार बन जाती है.धीरे-धीरे मूंगफली की सतह पर कई बुलबुले जमा हो जाते हैं. अब यहां सबसे दिलचस्प चीज होती है.
बुलबुले मूंगफली को ऊपर कैसे उठाते हैं?
अकेली मूंगफली बीयर से भारी होने के कारण नीचे जाती है. लेकिन जब उसकी सतह पर बड़ी संख्या में गैस के बुलबुले चिपक जाते हैं, तो मूंगफली और बुलबुलों का पूरा समूह बीयर की तुलना में हल्का हो जाता है. इस वजह से मूंगफली पर ऊपर की तरफ लगने वाला उछाल बढ़ जाता है और वह धीरे-धीरे ऊपर की ओर जाने लगती है. आखिरकार वह बीयर की सतह तक पहुंच जाती है.
ऊपर पहुंचते ही फिर नीचे क्यों जाती है?
अब मूंगफली का ‘डांस’ शुरू होता है. जैसे ही मूंगफली बीयर की सतह पर पहुंचती है, उसके ऊपर चिपके बुलबुले फूटने लगते हैं और गैस बाहर निकल जाती है. मूंगफली सतह पर थोड़ा घूमती या पलटती भी है, जिससे उसके दूसरे हिस्सों पर चिपके बुलबुले भी बाहर निकलकर फूट जाते हैं. बुलबुले कम होते ही मूंगफली का अतिरिक्त उछाल खत्म हो जाता है. अब मूंगफली फिर से बीयर से भारी हो जाती है और नीचे जाने लगती है. लेकिन जैसे ही वह दोबारा बीयर के अंदर जाती है, उसकी सतह पर नए बुलबुले बनने शुरू हो जाते हैं. बुलबुले पर्याप्त संख्या में जमा होते हैं तो मूंगफली फिर ऊपर उठ जाती है.
यह डांस कब तक चलता है?
मूंगफली का यह ऊपर-नीचे होना हमेशा नहीं चलता. जब बीयर में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड धीरे-धीरे बाहर निकल जाती है और नए बुलबुले पर्याप्त मात्रा में बनना बंद हो जाते हैं, तो मूंगफली का डांस भी रुक जाता है. इसके बाद वह गिलास के नीचे बैठ जाती है. वैज्ञानिकों के मुताबिक अलग-अलग तरह की बीयर और मूंगफली में इस प्रक्रिया का असर अलग हो सकता है. बीयर में जितनी ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड होगी, बुलबुले बनने की प्रक्रिया उतनी ज्यादा एक्टिव हो सकती है.
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