घर की रौनक उसकी दीवारों से होती है. बाहर और अंदर चाहे कितनी भी डेकोरेशन और डिजाइनिंग कर लें. महंगे फर्नीचर लगा लें, लेकिन दीवारें सही ढंग से सजी ना हों तो घर का लुक अधूरा लगता है. घर की दीवारों को चमकाने के कई विकल्प आज मौजूद है. चाहे तो आप पेंट करें या वॉलपेपर लगाएं. ऐसे में जानते हैं कि इनमें से सस्ता क्या पड़ेगा और घर की रौनक किससे बढ़ेगी.
वॉलपेपर और पेंट दोनों के अपने-अपने फायदे और नुकसान हैं. वॉलपेपर और पेंट में से किसी एक को चुनना एक बड़ा फैसला है. अगर आपने गलत चुनाव किया, तो यह एक महंगी गलती साबित हो सकती है, जिसे आपको हर दिन देखना पड़ेगा. यहां हम कुछ ऐसे ही फैक्टर्स पर बात करेंगे, जो वॉलपेपर और पेंट के बीच सही चुनाव करने में आपकी मदद करे.
पेंट या वॉलपेपर क्या है सस्ता
दीवारों को सजाने में वॉलपेपर और पेंट में से कौन सा विकल्प सस्ता होगा, यह वॉलपेपर या पेंट की गुणवत्ता पर निर्भर करता है. फिर भी वॉलपेपर और पेंट की लागत में कुछ अंतर तो होता ही है. वॉलपेपर लगाने की शुरुआती लागत अधिक होती है. क्योंकि, इसे लगाने में प्रोफेशनल लोगों और कई तरह के मशीनों का इस्तेमाल करना होता है. वॉलपेपर लगाते समय, घर की सजावट के साथ पैटर्न का मिलान करना भी जरूरी होता है. इसमें खर्च ज्यादा बैठता है.
नॉर्मल वॉलपेपर लगाने में 30 से 50 रुपये प्रति वर्ग फुट का खर्च आता है. वहीं अच्छी क्वालिटी वाले विनाइल वॉलपेपर लगाने में 60 से 150 रुपये प्रति वर्ग फुट खर्चा बैठता है. वॉलपेपर की शुरुआती किस्त की लागत भले ही अधिक हो, लेकिन इसकी टिकाऊपन इसे खर्च के लायक बनाती है. एक बार वॉलपेपर लगा लेने के बाद यह 15 साल तक चल सकते हैं और इनमें उच्च स्तर की मजबूती होती है.
दूसरी ओर, दीवारों पर पेंट करना वॉलपेपर की तुलना में सस्ता होता है. हालांकि, पेंटिंग के लिए भी कुशल कारीगरों की आवश्यकता होती है. फिर भी यह वॉलपेपर की तुलना में काफी किफायती और सस्ता होता है. साधारण पेंट, डिस्टेंपर या इमल्शन लगाने का खर्चा 10 से 25 रुपे प्रति वर्ग फुट आता है. वहीं टेक्सचर या डिज़ाइनर पेंट का खर्च 60 से 250 रुपये प्रति वर्ग फुट होता है.
पेंट लगाना सस्ता तो होता है, लेकिन दीवारों पर लगे पेंट आसानी से खराब हो जाते हैं. अच्छी तरह से तैयार की गई सतह पर पेंट 5-6 साल तक टिक सकता है. फिर भी इसे हर एक या दो साल में टच-अप की जरूरत होती है.
वॉलपेपर और पेंट से जुड़े रिस्क
आपकी दीवारों का पेंट कितनी भी बार खराब हो जाए. छोटी-मोटी खामियों को दोबारा पेंट करके आसानी से ठीक किया जा सकता है. दोबारा पेंट आपके मौजूदा रंग से मेल खा सकता है. दीवार को पहले जैसा सुंदर बनाने और दोबारा पेंट करने के लिए किसी पेशेवर की मदद की जरूरत नहीं है और इसे आप खुद भी कर सकते हैं.
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दूसरी ओर, वॉलपेपर भी उखड़ने या फटने से अछूते नहीं होते. एक छोटा सा छेद भी आपको वॉलपेपर उतारने और इसे फिर से चिपकाने के लिए मजबूर कर सकता है. यानी वॉलपेपर लगाने की पूरी प्रक्रिया को दोहराना पड़े सकता है. यह दोबारा पेंट करने से अधिक समय लेने वाला और महंगा साबित हो सकता है. यहां तक कि मूल वॉलपेपर के अतिरिक्त रोल भी प्राकृतिक प्रकाश में फीके पड़ चुके वॉलपेपर से मेल नहीं खाते.
दोनों के फायदे और नुकसान
वॉलपेपर और वॉल पेंट दोनों के अपने-अपने फायदे और नुकसान हैं. इनमें से किसी एक को चुनना आपकी जरूरतों और घर की बनावट पर डिपेंड करता है. सही जगह पर इस्तेमाल करने पर दोनों ही घर को खूबसूरत लुक देते हैं. हालांकि, वॉल पेंट ऑलटाइम सबसे सटीक विकल्प है. क्योंकि इसका इस्तेमाल किसी भी मौसम और कमरे में किया जा सकता है. वॉल पेंट को मौजूदा वॉलपेपर के ऊपर भी लगाया जा सकता है, जिससे आपके घर को एक नया रूप मिलता है.वॉलपेपर हर कमरे के लिए नहीं होते हैं. इसे किचन और बाथरूम में नहीं लगाया जा सकता है.
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