अक्सर जब भी लोग ट्रेन टिकट बुक करते हैं तो ट्रेन की डिटेल और अपने नाम की डिटेल अच्छे से देख लेते हैं. लेकिन, एज वाले कॉलम को कैजुअली भर देते हैं, जो आपको मुश्किल में डाल सकता है. कई बार होता है कि एज की डिजिट अलग-अलग हो जाती है, जो भी आपको मुश्किल में डाल सकती है. हां, ये बात अलग है कि ट्रेन में टीटीई इस बात पर ज्यादा गौर नहीं करते हैं, लेकिन रूल बुक के हिसाब से आप पर फाइन हो सकता है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर एज को लेकर रेलवे का नियम क्या कहता है...
क्या है रेलवे का नियम?
अब जानते हैं कि रेलवे का नियम क्या है... तो नियमों के हिसाब से तो आपकी टिकट में जो उम्र लिखी हुई है, वो ही उम्र आपके दस्तावेज में होनी चाहिए. रेलवे के अनुसार, यात्रियों को सलाह दी जाती है कि टिकट बुक करने के बाद अपने टिकट के विवरण की जांच कर लें और किसी भी तरह का मिसमैच होने पर चार्ट तैयार होने और यात्रा शुरू होने से पहले निकटतम PRS काउंटर पर उसे ठीक करा लें.
अगर कोई ऐसा नहीं करता है और उसकी ऑरिजनल डिटेल (कागजों में जो लिखा है) से टिकट की डिटेल मैच नहीं करती है तो कार्रवाई की जा सकती है. इस स्थिति में रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 138 के प्रावधानों के तहत उस पर कार्रवाई की जा सकती है. इस स्थिति में यात्री को बिना वैध टिकट का माना जाता है और जुर्माना लगाया जा सकता है.
7000 का कटा था चालान
ऐसा ही एक मामला कुछ वक्त पहले चर्चा में रहा था. उस केस में एक यात्री ने टिकट करवाई, लेकिन उसमें उम्र गलती से 1 लिख दी. इसके बाद टीटीई की ओर से कार्रवाई की गई और 7,035 रुपये का जुर्माना लगाया गया. फिर जब इसकी शिकायत की गई तो उसमें रेलवे ने बताया कि इसमें टीटीई की कोई गलती नहीं है और नियमों के अनुसार उस पर कार्रवाई की जा सकती है.
वैसे आमतौर पर ये माना जाता है कि अगर कोई उम्र में बदलाव करके किसी छूट का उपयोग करता है तो उस पर कार्रवाई की जाती है. जैसे पहले उम्र बढ़ाकर लिखकर सीनियर सिटीजन कोटे का फायदा लेते थे और उम्र कम करके बच्चों की टिकट का फायदा लिया जाता था.
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