क्या आपने कभी देखा है कि ट्रैक्टर के बड़े-बड़े टायरों में कई बार हवा के साथ पानी भी भरा जाता है? पहली नजर में यह बात थोड़ी अजीब लग सकती है. आखिर टायर में पानी भरने की जरूरत क्यों पड़ती है? दरअसल, इसके पीछे एक खास वजह होती है. ट्रैक्टर के टायर में पानी भरने का मुख्य कारण उसका वजन बढ़ाना और जमीन पर पकड़ मजबूत करना होता है. खेती के दौरान ट्रैक्टर को कई बार ऐसी जमीन पर काम करना पड़ता है, जहां टायर आसानी से घूमने लगते हैं. ऐसे में पानी भरा टायर काफी मददगार साबित हो सकता है.
टायर में पानी भरने से क्या होता है?
जब ट्रैक्टर के टायर में कुछ मात्रा में पानी भरा जाता है तो उसका वजन बढ़ जाता है. इससे ट्रैक्टर के टायर जमीन पर ज्यादा दबाव डालते हैं. जमीन और टायर के बीच पकड़ मजबूत होने लगती है. इसका सीधा फायदा खेती के काम में मिलता है. मान लीजिए ट्रैक्टर गीले खेत में चल रहा है. मिट्टी नरम होने की वजह से टायर घूम तो रहे हैं, लेकिन ट्रैक्टर आगे नहीं बढ़ पा रहा. इसे टायर का फिसलना या बिना आगे बढ़े घूमना कहा जा सकता है. ऐसी स्थिति में टायर का वजन बढ़ने से जमीन पर उसकी पकड़ बेहतर हो सकती है और ट्रैक्टर को आगे बढ़ने में मदद मिलती है.
ट्रैक्टर का इस्तेमाल सिर्फ खेत जोतने के लिए नहीं होता. इसके साथ हल, रोटावेटर, कल्टीवेटर, ट्रॉली और कई दूसरे भारी उपकरण भी लगाए जाते हैं. इन उपकरणों को चलाने या खींचने के लिए ट्रैक्टर को अच्छी पकड़ की जरूरत होती है. टायर में पानी भरने से ट्रैक्टर का वजन बढ़ जाता है. इससे इंजन की ताकत जमीन तक बेहतर तरीके से पहुंच सकती है और ट्रैक्टर भारी उपकरणों को आसानी से खींचने में सक्षम हो सकता है. खासकर नरम, गीली या ढीली मिट्टी में इसका फायदा ज्यादा दिखाई दे सकता है.
क्या पूरा टायर पानी से भर दिया जाता है?
ऐसा नहीं है कि टायर को पूरी तरह पानी से भर दिया जाता है. आमतौर पर टायर के अंदर एक निश्चित मात्रा में पानी भरा जाता है और बाकी जगह हवा रहती है. पानी की मात्रा टायर के आकार, ट्रैक्टर के मॉडल और उसके इस्तेमाल के हिसाब से तय की जाती है. कुछ जगहों पर साधारण पानी की जगह खास तरह के तरल पदार्थ का इस्तेमाल भी किया जाता है. ठंडे इलाकों में ऐसे घोल का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे बहुत कम तापमान में तरल के जमने का खतरा कम हो. टायर में पानी भरने का मतलब यह नहीं है कि हर ट्रैक्टर में ऐसा करना जरूरी है. जरूरत से ज्यादा वजन बढ़ाने से ट्रैक्टर के टायर, धुरी और दूसरे हिस्सों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. इससे मशीन के दूसरे हिस्सों पर भी असर पड़ सकता है.
इसलिए टायर में कितना पानी या तरल भरना है, यह ट्रैक्टर और टायर की क्षमता के हिसाब से ही तय किया जाना चाहिए. इसके लिए वाहन निर्माता या विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है.
पानी ही क्यों इस्तेमाल किया जाता है?
पानी आसानी से उपलब्ध होता है और इसका वजन भी काफी होता है. इसलिए कई मामलों में इसे टायर में अतिरिक्त वजन बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. जब ट्रैक्टर के टायर में पानी भरा जाता है तो अतिरिक्त वजन सीधे पहियों के पास रहता है. इससे ट्रैक्टर का संतुलन और जमीन पर पकड़ बेहतर करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, इसका इस्तेमाल सही मात्रा में होना बहुत जरूरी है. गलत तरीके से पानी भरने या टायर का दबाव सही नहीं रखने पर ट्रैक्टर की स्पीड और बैलेंस प्रभावित हो सकता है.
सीधी भाषा में कहें तो ट्रैक्टर के टायर में पानी इसलिए भरा जाता है ताकि उसका वजन बढ़े और टायर की जमीन पर पकड़ मजबूत हो. इससे गीली या नरम मिट्टी में टायर के बेवजह घूमने की समस्या कम करने और भारी एग्रीकल्चर इक्विपमेंट को खींचने में मदद मिल सकती है. यानी टायर में भरा पानी सिर्फ पानी नहीं, बल्कि ट्रैक्टर के लिए एक तरह के एक्स्ट्रा वजन का काम करता है. हालांकि, इसे कितनी मात्रा में भरना है, यह ट्रैक्टर और टायर के हिसाब से ही तय किया जाना चाहिए.
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