दिखते तो नहीं हैं... फिर कहां बने हैं ताजमहल में वो 22 रहस्यमयी कमरे?

ताजमहल के 22 बंद कमरों को लेकर सोशल मीडिया पर लंबे समय से कई तरह के दावे किए जाते रहे हैं. कोई इन्हें रहस्यमयी बताता है तो कोई इनके अंदर छिपे राज की बात करता है. लेकिन ये कमरे आखिर कहां हैं, क्यों बंद हैं और इनके बारे में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई और इतिहासकार क्या कहते हैं? आइए जानते हैं इसका पूरा सच.

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ताजमहल के बेसमेंट में ऐसे कई मेहराबदार हिस्से हैं (Photo: PTI) ताजमहल के बेसमेंट में ऐसे कई मेहराबदार हिस्से हैं (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:32 PM IST

'है किनारे ये जमुना के इक शाहकार, देखना चांदनी में तुम इसकी बहार, याद-ए-मुमताज में ये बनाया गया, संग-ए-मरमर से इसको तराशा गया...' अमजद हुसैन हाफिज कर्नाटकी की ये लाइन ताजमहल की खूबसूरती को बयां करती हैं. यमुना के किनारे सफेद संगमरमर से बनी यह इमारत करीब चार सदियों से लोगों को अपनी ओर खींच रही है. 

ताजमहल को आज दुनिया प्यार की निशानी के तौर पर जानती है.समय के साथ ताजमहल को देखने का नजरिया भी बदलता गया. आज ताजमहल की खूबसूरती के साथ-साथ इसकी एक और चीज अक्सर चर्चा में रहती है- इसके 22 बंद कमरे.

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सोशल मीडिया पर इन कमरों को लेकर कई तरह के दावे किए जाते हैं. कोई इन्हें रहस्यमयी बताता है, तो कोई दावा करता है कि इनके अंदर कोई बड़ा राज छिपा है. ऐसे में सवाल उठता है कि ये 22 कमरे आखिर हैं कहां? क्या वाकई इनके अंदर कोई रहस्य है?

क्या सच में ताजमहल में हैं 22 कमरे?

ताजमहल के बेसमेंट में ऐसे कई मेहराबदार हिस्से हैं, जिन्हें आम तौर पर '22 कमरे' कहा जाता है. लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, इन्हें सामान्य अर्थों में 22 अलग-अलग कमरे कहना ठीक नहीं होगा. रिपोर्ट के मुताबिक, यह एक लंबा मेहराबदार गलियारा है, जिसके साथ कई दरवाजे बने हुए हैं. इसी वजह से इन्हें आम बोलचाल में 22 कमरे कहा जाता है.अब सवाल आता है कि अगर ये जगह ताजमहल का हिस्सा है, तो आम पर्यटकों को दिखाई क्यों नहीं देती?

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ताजमहल के ये कमरे दिखते क्यों नहीं हैं?

इन कक्षों का हिस्सा ताजमहल के मुख्य संगमरमर वाले चबूतरे के नीचे, यमुना की तरफ है. जिस ऊंचे प्लेटफॉर्म पर मुख्य मकबरा खड़ा है, उसके नीचे ये मेहराबदार संरचनाएं बनी हुई हैं. इसलिए जब कोई पर्यटक ताजमहल के मुख्य हिस्से में घूमता है, तो ये जगह सीधे नजर नहीं आती.

इन हिस्सों में आम पर्यटकों के जाने की अनुमति नहीं है. वहां कोई सामान्य पर्यटन मार्ग या खुला प्रवेश नहीं है. यही वजह है कि ताजमहल देखने आने वाले ज्यादातर लोगों को इन कमरों के बारे में सिर्फ तस्वीरों या खबरों के जरिए ही जानकारी मिलती है.

ASI से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, इन हिस्सों को किसी रहस्य को छिपाने के लिए बंद नहीं रखा गया है. सुरक्षा और संरक्षण इसकी मुख्य वजह है. ताजमहल एक संरक्षित विश्व धरोहर स्थल है. यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. ऐसे में बेसमेंट में अनावश्यक आवाजाही रोकना जरूरी माना जाता है.

Photo: PTI

फिर इन कमरों को बनाया ही क्यों गया था?

यही सवाल इस पूरी कहानी का सबसे अहम हिस्सा है. पूर्व ASI क्षेत्रीय निदेशक (उत्तर) के.के. मुहम्मद ने  बताया था कि उन्होंने इन कक्षों के अंदर किसी धार्मिक प्रतीक या मूर्ति के निशान नहीं देखे.

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उनके मुताबिक, ये कमरे ताजमहल की संरचनात्मक बनावट का हिस्सा हैं. इनके जरिए उस ऊंचे चबूतरे को सहारा देने में मदद मिलती है, जिस पर मुख्य मकबरा और मीनारें खड़ी हैं. ASI के आगरा सर्किल के एक अधिकारी ने भी बताया था कि इतने बड़े ढांचे के नीचे मेहराब बनाने से प्लेटफॉर्म को ऊपर उठाने और भार को समान रूप से फैलाने में मदद मिलती है.

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यह संरचना सिर्फ ताजमहल में ही देखने को नहीं मिलती. के.के. मुहम्मद के मुताबिक, इसी तरह के बेसमेंट कक्ष दूसरे मुगलकालीन मकबरों में भी पाए जाते हैं, जिनमें हुमायूं का मकबरा और सफदरजंग का मकबरा शामिल हैं.

फिर इन कमरों को लेकर इतना रहस्य क्यों है?

इसकी बड़ी वजह है कि आम लोगों के लिए ये हिस्से बंद हैं. जब किसी ऐतिहासिक इमारत का कोई हिस्सा दिखाई नहीं देता, तो उसके बारे में तरह-तरह की कहानियां और दावे सामने आने लगते हैं.

इन कमरों को लेकर यह दावा भी किया गया कि इनके अंदर धार्मिक मूर्तियां या किसी पुराने मंदिर के अवशेष हो सकते हैं. लेकिन ऐसे दावों की ASI या किसी आधिकारिक जांच से पुष्टि नहीं हुई है. ASI से जुड़े अधिकारियों ने इन कमरों को ताजमहल की संरचना का हिस्सा बताया है.

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Photo: PTI

22 कमरों को खुलवाने की मांग पर कोर्ट ने क्या कहा था?

2022 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी. इसमें ताजमहल के बंद कमरों को खोलने और इसके इतिहास की जांच के लिए एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाने की मांग की गई थी.

12 मई 2022 को अदालत ने याचिका खारिज कर दी. अदालत ने कहा कि इस तरह के ऐतिहासिक सवालों पर बहस इतिहासकारों, विशेषज्ञों और अकादमिक जगत के बीच होनी चाहिए.

इसके बाद ASI ने इन भूमिगत कक्षों की तस्वीरें भी सार्वजनिक की थीं. तस्वीरों में वहां हुए संरक्षण और मरम्मत के काम को देखा जा सकता था. रिपोर्टों के मुताबिक, इन तस्वीरों का मकसद भी इन हिस्सों को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करना था.

क्या ASI इन कमरों में जाता है?

हां. ये हिस्से पूरी तरह छोड़े हुए नहीं हैं. ASI के कर्मचारी जरूरत के मुताबिक वहां सफाई, रखरखाव और संरचनात्मक जांच के लिए जाते हैं. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में ASI से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा गया कि इन कमरों की समय-समय पर सफाई की जाती है और वहां दीवारों पर किसी तरह की रहस्यमयी चीज होने की बात सामने नहीं आई.

तो आखिर 22 कमरों का सच क्या है?

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उपलब्ध पुरातात्विक जानकारी के आधार पर इन्हें किसी रहस्यमयी तहखाने के बजाय ताजमहल की संरचना का हिस्सा माना जाता है. ये मुख्य चबूतरे के नीचे बने मेहराबदार कमरे हैं. इनका संबंध स्मारक की संरचना और प्लेटफॉर्म से है.

हां, इनके बारे में सोशल मीडिया पर कई दावे जरूर किए जाते हैं. लेकिन किसी दावे को इतिहास मान लेने से पहले उसके पीछे मौजूद प्रमाण देखना जरूरी है. फिलहाल ASI से जुड़े अधिकारियों और उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी में इन कक्षों के अंदर किसी छिपे धार्मिक रहस्य की पुष्टि नहीं होती.

यानी करीब चार सदियां बीत जाने के बाद भी ताजमहल लोगों की जिज्ञासा बनाए हुए है. लेकिन इसके 22 बंद कमरों की कहानी में रहस्य से ज्यादा इतिहास, वास्तुकला और संरक्षण का पहलू नजर आता है.

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