घर या जमीन खरीदना हर किसी के लिए बड़ी डील होती है. लोग अपनी सालों की जमा पूंजी लगाकर प्रॉपर्टी खरीदते हैं और उससे जुड़े कागजों को बहुत संभालकर रखते हैं. इनमें रजिस्ट्री के डॉक्यूमेंट सबसे जरूरी होते हैं. लेकिन जरा सोचिए, अगर घर की रजिस्ट्री के ओरिजिनल कागज अचानक खो जाएं तो क्या होगा? घबराने की जरूरत नहीं है. हालांकि, ऐसी स्थिति में लापरवाही करना भारी पड़ सकता है, क्योंकि खोए हुए दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर धोखाधड़ी की कोशिश की जा सकती है. अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है तो परेशान होने के बजाय तुरंत कुछ जरूरी कदम उठाएं. नियमों के मुताबिक, पुलिस में शिकायत से लेकर रजिस्ट्रार ऑफिस में आवेदन तक की प्रक्रिया पूरी करके प्रॉपर्टी के दस्तावेजों की डुप्लीकेट या प्रमाणित कॉपी हासिल की जा सकती है.
सबसे पहले कागज खोने की सूचना पुलिस को दें
अगर आपको पता चलता है कि प्रॉपर्टी के ओरिजिनल कागज नहीं मिल रहे हैं, तो सबसे पहले उनकी अच्छी तरह तलाश करें. घर, ऑफिस, बैंक लॉकर या उन सभी जगहों पर दस्तावेज खोजें, जहां आपने उन्हें सुरक्षित रखने के लिए रखा हो. अगर काफी तलाश के बाद भी कागज नहीं मिलते हैं, तो नजदीकी पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत दर्ज कराएं. शिकायत में यह जानकारी दें कि प्रॉपर्टी के कौन-कौन से दस्तावेज खोए हैं और वे कब और कहां खोए. पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद उसकी कॉपी अपने पास जरूर रखें. कई जगहों पर दस्तावेज खोने की स्थिति में पुलिस की ओर से नॉन-ट्रेसिबिलिटी या लॉस रिपोर्ट जैसे दस्तावेज भी दिए जाते हैं. आगे की प्रक्रिया में इनकी जरूरत पड़ सकती है.
रजिस्ट्री ऑफिस को भी जानकारी दें
पुलिस में शिकायत करने के बाद उस प्रॉपर्टी से जुड़े रजिस्ट्रार या सब-रजिस्ट्रार ऑफिस को भी इसकी जानकारी देना जरूरी हो सकता है. वहां आपको बताना होगा कि आपकी प्रॉपर्टी के मूल दस्तावेज खो गए हैं और इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है. पुलिस शिकायत की कॉपी और प्रॉपर्टी से जुड़े उपलब्ध दस्तावेजों की कॉपी यहां जमा की जा सकती है. हालांकि, अलग-अलग राज्यों और रजिस्ट्रार ऑफिस में प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज अलग हो सकते हैं.
अखबार में विज्ञापन देना पड़ सकता है
प्रॉपर्टी के दस्तावेज खोने के बाद कई मामलों में अखबार में सार्वजनिक सूचना यानी पब्लिक नोटिस भी दिया जाता है. इसका मकसद यह बताना होता है कि प्रॉपर्टी के मूल दस्तावेज खो गए हैं और अगर किसी व्यक्ति को वे दस्तावेज मिलते हैं या वह उस प्रॉपर्टी पर किसी तरह का दावा करता है, तो वह तय समय के भीतर इसकी जानकारी दे सकता है. आमतौर पर स्थानीय प्रक्रिया के अनुसार अंग्रेजी और स्थानीय भाषा के अखबार में ऐसा नोटिस प्रकाशित कराया जा सकता है. विज्ञापन में प्रॉपर्टी की जरूरी जानकारी और दस्तावेज खोने की सूचना दी जाती है. अखबार में प्रकाशित विज्ञापन की कॉपी भी संभालकर रखें, क्योंकि डुप्लीकेट दस्तावेज के लिए आवेदन करते समय इसकी जरूरत पड़ सकती है.
डुप्लीकेट दस्तावेज के लिए आवेदन
पुलिस शिकायत और सार्वजनिक नोटिस की प्रक्रिया पूरी करने के बाद उस रजिस्ट्रार या सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में डुप्लीकेट या प्रमाणित कॉपी के लिए आवेदन किया जा सकता है, जहां प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री हुई थी. इसके लिए एक आवेदन देना होता है. साथ में पुलिस शिकायत की कॉपी, अखबार में प्रकाशित नोटिस और उपलब्ध प्रॉपर्टी दस्तावेज जमा करने पड़ सकते हैं. कुछ मामलों में स्टांप पेपर पर नोटरी से सत्यापित घोषणा या अंडरटेकिंग भी मांगी जा सकती है. इसमें प्रॉपर्टी की पूरी जानकारी, रजिस्ट्री की जानकारी, दस्तावेज खोने की घटना और पुलिस शिकायत से जुड़ी जानकारी दी जाती है.
रजिस्ट्रार ऑफिस करेगा दस्तावेजों की जांच
आवेदन मिलने के बाद संबंधित रजिस्ट्रार या सब-रजिस्ट्रार ऑफिस रिकॉर्ड की जांच करता है. अधिकारी यह देखते हैं कि प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री वास्तव में उस ऑफिस में हुई थी या नहीं और आवेदन में दी गई जानकारी रिकॉर्ड से मेल खाती है या नहीं. सारी जानकारी सही पाए जाने के बाद नियमों के अनुसार रजिस्ट्री की प्रमाणित कॉपी या उपलब्ध डुप्लीकेट दस्तावेज जारी किए जा सकते हैं. इसके लिए निर्धारित फीस भी देनी पड़ सकती है. डुप्लीकेट दस्तावेज मिलने में लगने वाला समय हर राज्य और ऑफिस की प्रक्रिया के हिसाब से अलग हो सकता है. इसलिए 15-20 दिन का समय हर जगह तय मानना सही नहीं होगा.
अगर बैंक से कागज खो जाएं तो?
कई बार प्रॉपर्टी के ओरिजिनल दस्तावेज होम लोन के दौरान बैंक के पास जमा होते हैं. अगर बैंक की कस्टडी में रखे दस्तावेज खो जाते हैं, तो मामला अलग हो जाता है. ऐसी स्थिति में बैंक से तुरंत लिखित शिकायत करनी चाहिए और दस्तावेज खोने की आधिकारिक जानकारी मांगनी चाहिए. बैंक को अपनी रिकॉर्ड और प्रक्रिया के अनुसार दस्तावेजों की समस्या को सुलझाने में मदद करनी होती है. अगर ग्राहक को किसी तरह का आर्थिक नुकसान हुआ है, तो मुआवजे या अन्य राहत का सवाल मामले की परिस्थितियों और लागू नियमों के आधार पर तय हो सकता है.
इसलिए अगर प्रॉपर्टी के कागज खो गए हैं, तो सबसे जरूरी बात है कि मामले को छिपाने या टालने के बजाय तुरंत पुलिस, संबंधित रजिस्ट्रार ऑफिस और जरूरत पड़ने पर बैंक को इसकी जानकारी दें. साथ ही प्रॉपर्टी से जुड़े सभी उपलब्ध दस्तावेजों की कॉपी सुरक्षित रखें. डुप्लीकेट या प्रमाणित कॉपी लेने की प्रक्रिया राज्य और स्थानीय रजिस्ट्रार ऑफिस के नियमों के अनुसार अलग हो सकती है.
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