क्या आप जानते हैं हर घर के जरूरी सामानों में से एक कैंची अब भारत में बनना काफी कम हो गई है. अब ये जरूरी चीज भारत में कम बन रही है और विदेश से ज्यादा आयात हो रही है, जिसमें चीन सबसे बड़ा सोर्स है. पिछले कई सालों से कई ऐसी रिपोर्ट्स आई हैं, जिनमें ये बताया गया है कि अब भारत में कैंची बनाने की फैक्ट्रियां लगातार कम हो रही हैं. दूसरी ओर, चीन से भारत आने वाली कैंचियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर कैसे कैंची कम बन रही हैं?
अंतरराष्ट्रीय व्यापार के आंकड़े बताते हैं कि इस छोटे से औजार के बाजार में चीन की मौजूदगी कितनी बड़ी हो चुकी है. वहीं, भारत के पारंपरिक कैंची उद्योग की हालत चिंता पैदा करती है.
कैंची बाजार में चीन का बढ़ा दबदबा
विश्व बैंक के WITS पोर्टल पर उपलब्ध संयुक्त राष्ट्र के व्यापार आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने साल 2024 में कैंची और टेलरिंग शीयर की श्रेणी में करीब 1.22 करोड़ डॉलर का आयात किया. इसमें से लगभग 1.09 करोड़ डॉलर का सामान चीन से आया. यानी आयात के कुल मूल्य में चीन की हिस्सेदारी करीब 89 फीसदी थी. आम भाषा में समझें तो भारत विदेश से जितने मूल्य की कैंची मंगा रहा था, उसमें से लगभग हर 10 रुपये में 9 रुपये की कैंची चीन से आ रही थी. यह भारतीय बाजार में चीन की मजबूत मौजूदगी दिखाता.
साल 2023 में भारत ने इसी श्रेणी में करीब 1.17 करोड़ डॉलर की कैंची आयात की थी. इसमें चीन से आने वाली कैंची का मूल्य लगभग 1.07 करोड़ डॉलर था. इन आंकड़ों के मुताबिक, 2023 से 2024 के बीच भारत का कुल कैंची आयात मूल्य करीब 4 फीसदी बढ़ा. हालांकि, इन दो साल के आंकड़ों के आधार पर यह कहना ठीक नहीं होगा कि आयात पिछले कई सालों से हर साल लगातार बढ़ रहा है.
भारत से कैंची का निर्यात भी आयात के मुकाबले काफी कम रहा. WITS के मुताबिक, 2024 में भारत ने इस श्रेणी में करीब 8.21 लाख डॉलर की कैंची निर्यात की.
भारत में फैक्ट्रियां हो रही हैं बंद
भारत में कैंची निर्माण की बात हो तो उत्तर प्रदेश के मेरठ का नाम अहम है. यहां लंबे समय से कैंची बनाने का काम होता रहा है और ‘मेरठ स्किसर्स’ को जीआई टैग मिला है. मेरठ के पारंपरिक कैंची उद्योग पर दबाव और कुछ इकाइयों के बंद होने की खबरें पहले भी आई हैं. 2019 की एक रिपोर्ट में मेरठ की करीब 200 इकाइयों में से लगभग 75 के बंद होने और कारोबार के 50 फीसदी तक सिमटने की बात कही गई थी. यह उस समय की मेरठ-विशेष रिपोर्ट है; इसे पूरे भारत में कैंची बनाने वाली फैक्ट्रियों की संख्या घटने का आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए.
ऐसा नहीं है कि भारत में कैंची बनना पूरी तरह बंद हो रहा है. देश में अभी भी कैंची बनाने वाले उद्योग मौजूद हैं. लेकिन मेरठ जैसे पारंपरिक केंद्रों में उत्पादन और कारोबार पर दबाव की खबरें चिंता जरूर बढ़ाती हैं.
aajtak.in