अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में लगे सोने की चमक हमेशा वैसी ही रहती है. गर्मी में तेज धूप, आंधी और बारिश होने के बाद भी स्वर्ण मंदिर में लगे सोने की चमक बरकरार रहती है. वैसे तो हर गुरुद्वारे में सफाई की खास व्यवस्था होता है, लेकिन श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में सोने को साफ करने की अलग व्यवस्था है. ऐसे में आज जानते हैं कि स्वर्ण मंदिर में लगे सोने की सफाई के लिए क्या व्यवस्था की जाती है और किस वजह से यह हमेशा साफ चमकता नजर आता है.
स्वर्ण मंदिर में सोने की सफाई कैसे और कब-कब की जाती है...ये जानने से पहले आपको बताते हैं कि ये सफाई कौन करता है. बता दें कि स्वर्ण मंदिर में हर साल यह सेवा गुरु नानक निष्काम सेवक जत्था (बर्मिंघम) की ओर से की जाती है. कई सालों ये जत्था हर साल स्वर्ण मंदिर के सोने के गुंबदों और सोने की परत की सफाई कर रहा है. ये सेवा बिना किसी फीस के की जाती है. सफाई के लिए समय-समय पर धुलाई की जाती है और खास तरह से इसे साफ किया जाता है.
इस दौरान श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य गुंबद के अलावा श्री अकाल तख्त साहिब, गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब और घंटा घर ड्योढ़ी के गुंबदों पर लगे सुनहरे पत्तरों की भी सफाई की जाती है. दरबार साहिब के अंदरूनी हिस्से में सुनहरे पत्तरों और मीनाकारी की मरम्मत का काम भी लगातार किया जाता है.
सफाई कैसे की जाती है?
दरअसल, मौसम और प्रदूषण की वजह से सोने की चमक प्रभावित हो जाती है, ऐसे में समय-समय पर इसकी सफाई की जाती है. खास बात ये है कि सोने की सफाई के लिए किसी भी कैमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है और देसी तरीके चमक को बरकरार रखा जाता है. द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, इसके लिए पहले रीठा पाउडर को पानी में कम से कम तीन घंटे तक उबाला जाता है. इसमें नींबू का रस मिलाकर इसे सामान्य तापमान पर ठंडा होने के लिए छोड़ दिया जाता है. फिर इस तरल साबुन का उपयोग सोने की परत को साफ करने के लिए किया जाता है.
रिपोर्ट्स के अनुसार, सफाई के लिए लगभग 20 किलो रीठा की जरूरत होती है और करीब 60 लोग ये काम करते हैं. इनमें काफी लोग इंग्लैंड से आते हैं और हर साल मार्च में ये सफाई अभियान चलता है, जिसमें सोने की परत अच्छे से सफाई की जाती है. करीब 10-12 दिन तक ये सफाई की जाती है और सुबह 9 बजे से शाम तक सफाई की जाती है. इस दौरान सोने की सफाई के साथ मीनाकारी का संरक्षण भी किया जाता है.
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