जब गुब्बारों से ऑस्ट्रिया ने वेनिस पर अटैक किया, ये था इतिहास का पहला हवाई हमला

आज के दिन ही पहली बार गुब्बारों का इस्तेमाल युद्ध में किया गया. यह इतिहास का पहला हवाई हमला भी कहलाता है. ऑस्ट्रिया ने वेनिस पर गुब्बारे से बम गिराए थे.

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जब वेनिस पर हॉट एयर बैलून से बम बरसाए गए (Photo - AI Generated) जब वेनिस पर हॉट एयर बैलून से बम बरसाए गए (Photo - AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:41 PM IST

22 अगस्त 1849 को इतिहास के पहले हवाई हमले को अंजाम दिया गया. जब लगभग 200 मानवरहित गुब्बारों के बेड़े का उपयोग करते हुए, ऑस्ट्रिया ने वेनिस पर हमला किया था. यह हमला शहर के खिलाफ जवाबी हमले का हिस्सा था, जिसने एक साल पहले ऑस्ट्रियाई शासन को उखाड़ फेंका था. साथ ही सैन मार्को गणराज्य के रूप में थोड़े समय के लिए स्वतंत्रता प्राप्त की थी.

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हालांकि, ऐतिहासिक रूप से गुब्बारों का इस्तेमाल युद्ध के दौरान केवल टोही गतिविधियों के लिए किया जाता था. लेकिन वेनिस पर फिर से कब्जे  प्करने के अपने युद्ध में ऑस्ट्रियाई सेना के गतिरोध में फंस जाने के बाद उन्होंने गुब्बारों को बमवर्षक के तौर पर इस्तेमाल करने का विचार आया. उसने शहर को घेर रखा था, लेकिन जमीन या समुद्र के रास्ते निर्णायक हमला करके आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना उसके लिए मुश्किल था. इसका कारण यह था कि वेनिस का यूनिक भूगोल, उथले लैगून में स्थित द्वीपों की श्रृंखला, उसे एक मजबूत प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करता था.

ऐसे में फ्रांज वॉन उचैटियस नामक एक युवा ऑस्ट्रियाई तोपखाने के लेफ्टिनेंट ने कागज के गुब्बारे बनाने का फैसला किया. यह आधे घंटे के टाइमर वाले फ्यूज से लैस बम ले जा सकते थे. मार्च 1849 में, साइंटिफिक अमेरिकन ने ऑस्ट्रिया के प्रेसे की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इन्हें किनारे पर रखी एक बड़ी गैल्वेनिक बैटरी के साथ एक लंबे पृथक तांबे के तार के माध्यम से विद्युत चुंबकत्व द्वारा दागा गया.  

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ऑस्ट्रेलिया के मोनाश विश्वविद्यालय के शोधकर्ता रसेल नॉटन के अनुसार , प्रत्येक गुब्बारे में 33 पाउंड विस्फोटक भरे हुए थे. योजना यह थी कि गुब्बारे वेनिस के ऊपर अपने आप फट जाएं और बम नीचे लड़ रहे सैनिकों पर गिरें. कुछ गुब्बारे फट गए, लेकिन अप्रत्याशित हवा के रुख में बदलाव के कारण कुछ गुब्बारे वापस ऑस्ट्रियाई मोर्चे पर जा गिरे.

फिर भी, इतिहासकारों ने गौर किया कि गुब्बारों ने ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाया, हालांकि एक गुब्बारा शहर के मुख्य सार्वजनिक चौक, पियाज़ा सैन मार्को में उतरा था. लेकिन इसका पहले से ही घिरे शहर पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव जरूर पड़ा होगा, जिसके चलते शहर ने जल्द ही आत्मसमर्पण कर दिया. 

फरवरी 1863 में, चार्ल्स पर्ली नामक एक न्यू यॉर्कर ने एक गर्म हवा के गुब्बारे के लिए एक पेटेंट पंजीकृत किया, जो टाइमर समाप्त होने के बाद बम गिराता और उसी समय उसकी बत्ती जल जाती.  बम पहुंचाने और गिराने के लिए गुब्बारों का इस्तेमाल अगली शताब्दी तक जारी रहा. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान , जापान ने उत्तरी अमेरिका की ओर लगभग 10,000 बम ले जाने वाले गुब्बारे भेजने का प्रयास किया - इस प्रयास के परिणामस्वरूप कुछ नागरिकों की मौत हुई.

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