जब माओत्से तुंग ने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की घोषणा की

आज के दिन ही पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की घोषणा हुई थी. माओत्से तुंग ने खुद को राष्ट्राध्यक्ष घोषित करते हुए यह ऐलान किया था.

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माओत्से तुंग ने ने चीन को कम्युनिस्ट स्टेट घोषित किया था (Photo - Pexels) माओत्से तुंग ने ने चीन को कम्युनिस्ट स्टेट घोषित किया था (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:11 PM IST

1 अक्तूबर 1949 को कम्युनिस्ट चीनी नेता माओत्से तुंग ने स्वयं को राष्ट्राध्यक्ष घोषित करते हुए आधिकारिक तौर पर पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के स्थापना की घोषणा की. झोउ एनलाई को प्रधानमंत्री बनाया गया. यह घोषणा माओ की कम्युनिस्ट सेनाओं और राष्ट्रवादी चीनी नेता च्यांग काई-शेक की सरकार के बीच वर्षों से चल रहे संघर्ष के अंत के साथ हुई. चीन अब कम्युनिस्टों के हाथ में जा चुका था. इससे अमेरिका नाराज था और तब से दोनों देशों के बीच तल्खियां बढ़ती चली गई.

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अमेरिकी सरकार से च्यांग काई-शेक को माओत्से तुंग के खिलाफ धन और हथियारों का मिलता था. फिर भी एशिया के सबसे बड़े राष्ट्र चीन का साम्यवाद के हाथों में चले जाना अमेरिका के लिए एक गंभीर आघात था. खासकर तब, जब एक महीने पहले सोवियत संघ ने सफल परमाणु टेस्ट किया हो. 

यूएस के राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन के प्रशासन में विदेश विभाग के अधिकारियों ने अगस्त 1949 में एक श्वेत पत्र जारी करके अमेरिकी जनता को सबसे बुरे हालात के लिए तैयार करने की कोशिश की. रिपोर्ट में तर्क दिया गया कि च्यांग काई शेक का शासन इतना भ्रष्ट, अक्षम और अलोकप्रिय था कि अमेरिका की किसी भी सहायता से उसे बचाया नहीं जा सकता था.

 फिर भी, चीन में कम्युनिस्टों की जीत ने रिपब्लिकनों की ओर से आलोचनाओं की लहर पैदा कर दी. रिपब्लिक ने आरोप लगाया कि ट्रूमैन प्रशासन ने स्थिति को घोर कुप्रबंधन के कारण चीन को खो दिया. अन्य रिपब्लिकन, विशेष रूप से सीनेटर जोसेफ मैकार्थी , ने तो और भी आगे बढ़कर दावा किया कि विदेश विभाग ने साम्यवाद के प्रति नरम रुख अपनाया था. मैकार्थी ने तो और भी बेपरवाही से यह भी सुझाव दिया कि विभाग में साम्यवाद समर्थक भी मौजूद थे.

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अमेरिका ने चीन में नवगठित कम्युनिस्ट सरकार को मान्यता देने से इनकार कर दिया. 1950 में कोरियाई युद्ध के शुरू होने पर कम्युनिस्ट चीनी और अमेरिकी सेनाओं के बीच युद्ध भी हुआ. दोनों देशों के बीच दूरियां और भी बढ़ गईं. 

इसके बाद के वर्षों में ताइवान द्वीप पर स्थापित च्यांग गणराज्य चीन को अमेरिका का निरंतर समर्थन और संयुक्त राष्ट्र में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को स्थान देने से इनकार कर दिया. इस वजह से दोनों देशों के राजनयिक संबंध असंभव हो गए. राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने फरवरी 1972 में कम्युनिस्ट चीन की अपनी यात्रा से इस गतिरोध को तोड़ा. फिर अमेरिका ने 1979 में औपचारिक राजनयिक मान्यता प्रदान की.

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