घड़ियाल, मगरमच्छों से भरी है भारत की ये नदी... इसमें उतरने से भी डरते हैं लोग!

भारत की चंबल नदी अपनी साफ जलधारा के साथ-साथ घड़ियाल, मगरमच्छ, गंगा डॉल्फिन और कई दुर्लभ वन्यजीवों के लिए जानी जाती है. यही वजह है कि लोग इस नदी में गिरने से भी डरते हैं.

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चंबल नदी घड़ियाल और मगरमच्छ ही नहीं, बल्कि गंगा डॉल्फिन, कछुए भी रहते हैं. ( Photo: ITG) चंबल नदी घड़ियाल और मगरमच्छ ही नहीं, बल्कि गंगा डॉल्फिन, कछुए भी रहते हैं. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:24 AM IST

भारत में कई नदियां खूबसूरती और धार्मिक महत्व के लिए जानी जाती हैं. लेकिन एक नदी ऐसी है जिसका नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं. इस नदी का नाम चंबल नदी है, जिसे देश की सबसे साफ नदियों में माना जाता है. लेकिन इसकी पहचान सिर्फ साफ पानी नहीं है. यहां बड़ी संख्या में घड़ियाल, मगरमच्छ, गंगा डॉल्फिन और कछुआ भी रहते हैं. इसी वजह से लोग नहाने या तैरने की हिम्मत नहीं करते.

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चंबल नदी के एक बड़े हिस्से को नेशनल चंबल सेंचुरी घोषित किया गया है. यह सेंचुरी राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच 400 से 600 किलोमीटर तक फैला हुआ है. इसकी स्थापना 1978-79 में घड़ियालों के संरक्षण के लिए की गई थी. आज यह दुनिया के सबसे बड़े घड़ियाल संरक्षित क्षेत्र माना जाता है.

1978 में क्यों बनाया गया नेशनल चंबल सेंचुरी?
चंबल नदी के पानी काफी हद तक साफ और प्रदूषण मुक्त है. नदी के आसपास कम उद्योग और शहर होने के कारण इसका प्राकृतिक रूप बरकरार है. इसलिए यहां कई दुर्लभ जलीय जीव आसानी से रह सकते हैं. घड़ियाल और मगरमच्छ दोनों ही नदी में रहते हैं. घड़ियाल के मुंह लंबे और पतले होते हैं, जो मछलियां पकड़ने में मदद करते हैं. वह मछलियां ही खाता है.

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मगरमच्छ के मुंह चौड़े होते हैं और उसे कई अन्य जानवरों का शिकार करने में मदद मिलती है. इसलिए नदी में दोनों प्रजातियों के होने से लोग बेहद सावधान रहते हैं. नदी में उतरने से जरूर हमला हो सकता है, लेकिन वन विभाग लोगों को बिना अनुमति नहाने से बचने की सलाह देता है. नदी के कई हिस्से वन्यजीवों के लिए सुरक्षित हैं. स्थानीय लोग भी इस नदी का सम्मान करते हैं और अनावश्यक रूप से नहाने से बचते हैं.

भारत की सबसे अनोखी नदी क्यों कहलाती है चंबल?
चंबल नदी घड़ियाल और मगरमच्छ ही नहीं, बल्कि गंगा डॉल्फिन, कछुए और बड़ी संख्या में पक्षी भी रहते हैं. यहां 130 से अधिक पक्षी प्रजातियां और कई दुर्लभ जलीय जीव रहते हैं. इसलिए यह वन्यजीव प्रेमियों के लिए बेहद खास जगह है. हर साल हजारों पर्यटक इस नदी के पास आते हैं. लेकिन वे नदी में नहीं जाते. वे बोट सफारी में जाते हैं. गाइड और वन विभाग की निगरानी में पर्यटक घड़ियाल, मगरमच्छ, डॉल्फिन और रंग बिरंगे पक्षियों को अच्छी तरह देख सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर चंबल नदी और इसके आसपास रखी गई विशेष देखभाल रही, तो घड़ियाल और अन्य दुर्लभ जीवों की संख्या बढ़ सकती है.

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आज भी अवैध रेत खनन, प्रदूषण और शिकार जैसी चुनौतियां हैं, लेकिन संरक्षण के कारण चंबल आज भी इन जीवों के लिए सबसे सुरक्षित ठिकानों में गिनी जाती है. इसलिए चंबल नदी को सिर्फ एक नदी नहीं बल्कि दुर्लभ वन्यजीवों का घर माना जाता है. नदी के साफ पानी, बीहड़ और घड़ियाल और मगरमच्छ इसे भारत की सबसे अनोखी नदियों में शामिल करते हैं. अगर आप यहां घूमने जाएं तो नदी में उतरने की बजाय सुरक्षित दूरी से इसके प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों का आनंद लें. यही इस अनोखी नदी को देखने का सबसे अच्छा और सुरक्षित तरीका है.

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