जब ऐपल ने बनाया पहला आईपॉड, ला दी थी म्यूजिक इंडस्ट्री में क्रांति

आज के दिन ही ऐपल ने अपना पहला आईपॉड लॉन्च किया था. इसने म्यूजिक इंडस्ट्री की तस्वीर ही बदल दी थी.

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ऐपल का पहला आईपॉड आज ही लॉन्च हुआ था (Photo - Pexels) ऐपल का पहला आईपॉड आज ही लॉन्च हुआ था (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 6:29 AM IST

23 अक्टूबर 2001 को ऐपल ने एक ऐसा डिवाइस पेश किया, जिसने संगीत सुनने का अंदाज बदलने की शुरुआत की. इसका नाम था आईपॉड (iPod). यह छोटा-सा म्यूजिक प्लेयर हजारों गानों को जेब में लेकर चलने का सपना सच करने की दिशा में बड़ा कदम था. आईपॉड ने न सिर्फ लोगों के गाने सुनने का तरीका बदला, बल्कि म्यूजिक इंडस्ट्री को भी नई दिशा दी.

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आज मोबाइल फोन पर गाने सुनना और अपनी पसंद की प्लेलिस्ट बनाना बेहद आसान है. लेकिन एक वक्त ऐसा भी था, जब सफर में गाने सुनने के लिए लोगों को कैसेट या सीडी प्लेयर साथ रखना पड़ता था. फिर आईपॉड लॉन्च हुआ.  इसने डिजिटल गानों को लोकप्रिय बनाने में मदद की और ऐपल को सिर्फ कंप्यूटर बनाने वाली कंपनी से आगे बढ़ाकर उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय टेक्नोलॉजी ब्रांड बनाने में अहम भूमिका निभाई. आगे चलकर इसी बदलाव ने आईफोन जैसे डिवाइस के लिए भी रास्ता तैयार किया.

कैसे आया आईपॉड बनाने का आइडिया?
2001 तक डिजिटल म्यूजिक का चलन बढ़ने लगा था. लोग कैसेट और सीडी की जगह MP3 प्लेयर इस्तेमाल करने लगे थे. लेकिन उस समय के कई प्लेयर इस्तेमाल करने में आसान नहीं थे और उनमें सीमित संख्या में ही गाने रखे जा सकते थे.

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ऐपल के तत्कालीन सीईओ स्टीव जॉब्स ने इस मौके को पहचाना. उन्होंने 2001 की शुरुआत में टोनी फैडेल को आईपॉड के विकास में मदद के लिए टीम से जोड़ा. कंपनी की कोशिश थी कि ऐसा छोटा और आसान डिवाइस बनाया जाए, जिसमें लोग अपनी पसंद के ढेर सारे गाने रख सकें.

टीम ने तेजी से काम किया और तय समय से पहले डिवाइस तैयार कर लिया. आईपॉड की घोषणा 23 अक्टूबर 2001 को की गई, जबकि इसकी बिक्री 10 नवंबर 2001 से शुरू हुई.

ताश की गड्डी जितना छोटा था पहला आईपॉड
पहला आईपॉड आकार में ताश की गड्डी जितना था. इसमें बीच में एक सिलेक्शन बटन और उसके चारों ओर चार कंट्रोल बटन दिए गए थे. इसका सबसे खास हिस्सा था मैकेनिकल स्क्रॉल व्हील, जिसे घुमाकर यूजर गानों की सूची में आगे-पीछे जा सकते थे.

इसका डिजाइन भी काफी अलग था. सफेद रंग का फ्रंट, स्टेनलेस स्टील का पिछला हिस्सा और सफेद ईयरफोन इसे दूसरे म्यूजिक प्लेयर से अलग पहचान देते थे. इसका इंटरफेस इतना सरल था कि इसमें अलग से ऑन-ऑफ स्विच तक नहीं था.

पहले आईपॉड की कीमत 399 डॉलर रखी गई थी. इसमें 5GB की हार्ड ड्राइव थी, जिसमें करीब 1,000 गाने स्टोर किए जा सकते थे. इसकी बैटरी करीब 10 घंटे तक चल सकती थी और इसमें बैकलिट स्क्रीन भी दी गई थी.

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स्टीव जॉब्स ने इसे पेश करते हुए कहा था कि आईपॉड के साथ संगीत सुनने का तरीका पहले जैसा नहीं रहेगा. उस समय यह बात भले ही बड़ी लगती हो, लेकिन आने वाले वर्षों में डिजिटल म्यूजिक का चलन तेजी से बढ़ा.

शुरुआत में धीमी रही बिक्री, फिर बदल गया बाजार
आईपॉड की शुरुआत अच्छी रही, लेकिन इसकी बिक्री तुरंत आसमान पर नहीं पहुंची. पहले साल करीब 3.5 लाख डिवाइस बिके. इसकी एक बड़ी वजह यह थी कि शुरुआती आईपॉड केवल ऐपल के कंप्यूटर के साथ काम करता था.

साल 2002 में कंपनी ने विंडोज कंप्यूटर इस्तेमाल करने वालों के लिए भी आईपॉड का वर्जन पेश किया. इससे इसके संभावित ग्राहकों की संख्या बढ़ गई.

इसके बाद 2003 में ऐपल ने आईट्यून्स म्यूजिक स्टोर शुरू किया. यहां से लोग बड़ी संख्या में उपलब्ध गानों को कानूनी रूप से खरीदकर डाउनलोड कर सकते थे. आईपॉड और आईट्यून्स ने मिलकर संगीत खरीदने और सुनने के तरीके को बदलने में अहम भूमिका निभाई.

पहले लोग ज्यादातर पूरी म्यूजिक एल्बम खरीदते थे, लेकिन डिजिटल स्टोर से अपनी पसंद का सिर्फ एक गाना खरीदना भी आसान हो गया. इससे सीडी की जगह डिजिटल डाउनलोड का चलन बढ़ने लगा और म्यूजिक इंडस्ट्री के पुराने कारोबारी मॉडल में बदलाव आया.

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गानों से आगे बढ़कर वीडियो भी दिखाने लगा आईपॉड
समय के साथ ऐपल ने आईपॉड में नए फीचर जोड़ने शुरू किए. साल 2005 में कंपनी ने पॉडकास्ट डाउनलोड करने की सुविधा दी. पॉडकास्ट नाम के लोकप्रिय होने में भी आईपॉड की भूमिका रही.

इसी साल आईपॉड क्लासिक की पांचवीं पीढ़ी में वीडियो देखने के लिए स्क्रीन दी गई. इसके जरिए लोग टीवी शो और फिल्में भी देख सकते थे. यानी यह डिवाइस केवल गाने सुनने तक सीमित नहीं रहा.

ऐपल ने अलग-अलग दौर में आईपॉड की कई सीरीज पेश कीं. इनमें आईपॉड क्लासिक, मिनी, शफल, नैनो और टच शामिल थे. कंपनी ने इन सभी श्रेणियों को मिलाकर अनुमानित तौर पर करीब 45 करोड़ आईपॉड बेचे.

आईफोन ने खत्म कर दिया आईपॉड का दौर
आईपॉड की सफलता ने ऐपल को यह समझने में मदद की कि लोग छोटे, आसान और आकर्षक डिवाइस में डिजिटल कंटेंट इस्तेमाल करना पसंद करते हैं. साल 2007 में कंपनी ने आईफोन पेश किया, जिसमें फोन के साथ गाने और वीडियो चलाने की सुविधा भी थी.

धीरे-धीरे स्मार्टफोन ने म्यूजिक प्लेयर की जरूरत कम कर दी. अब लोगों को गाने सुनने के लिए अलग डिवाइस रखने की जरूरत नहीं रही. फोन पर ही संगीत, वीडियो और कई दूसरे काम किए जा सकते थे. आखिरकार, ऐपल ने मई 2022 में आईपॉड टच की बिक्री बंद करने का ऐलान किया. इसके साथ ही आईपॉड के सफर का अंत हो गया.

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लेकिन आईपॉड की कहानी सिर्फ एक म्यूजिक प्लेयर के बाजार से गायब होने की कहानी नहीं है. यह उस दौर की शुरुआत की कहानी है, जब डिजिटल म्यूजिक लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनने लगा. आईपॉड ने संगीत को जेब में लेकर चलना आसान बनाया और ऐपल को उस मुकाम तक पहुंचाने में मदद की, जहां से उसने दुनिया के टेक्नोलॉजी बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई.

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