धार्मिक बैठकों में धर्मांतरण को लेकर जारी विवाद के बीच छत्तीसगढ़ के धमतरी शहर में कम से कम आठ चर्चों ने गैर-ईसाइयों के प्रार्थना के लिए प्रवेश पर रोक लगा दी है. चर्चों के बाहर लगाए गए बैनर में कहा गया है कि दूसरे धर्मों के लोग अगर स्वेच्छा से चर्च में प्रवेश करते हैं तो वे अपने कार्यों के लिए खुद जिम्मेदार होंगे.
ईसाई समुदाय ने कहा कि यह कदम अपने सदस्यों की सुरक्षा के लिए एहतियात के तौर पर उठाया गया है. यह कदम राज्य में नए धर्मांतरण विरोधी कानून के लागू होने के कुछ महीने बाद उठाया गया है. इस कानून के तहत अवैध धर्मांतरण के दोषी पाए जाने पर सात से 10 साल तक की सजा और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक हो सकती है, साथ ही 25 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
116 साल पुराने सुंदरगंज मेनोनाइट चर्च के बाहर लगाए गए एक नोटिस में लिखा है, 'चर्च प्रबंधन के नियमों के अनुसार, चर्च भवन में प्रार्थना के लिए प्रवेश केवल ईसाइयों के लिए है. अन्य लोग अगर स्वेच्छा से प्रवेश करते हैं तो वे इसके लिए खुद जिम्मेदार होंगे.'
क्यों लिया गया फैसला?
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, धमतरी जिला क्रिश्चियन फोरम के महासचिव डायमंड फिलुस ने बताया कि बैनर लगाने का फैसला इसी महीने की शुरुआत में लिया गया था. हालांकि, इसे 15 सितंबर को जिला कलेक्ट्रेट में हुई बैठक के बाद लागू किया गया. इस बैठक में हिंदू संगठनों, सर्व आदिवासी समाज और क्रिश्चियन फोरम के प्रतिनिधि शामिल हुए थे. फिलुस ने कहा कि अधिकारियों ने ईसाई प्रतिनिधियों को बैठक में शामिल होने के लिए बुलाया था, लेकिन उन्हें यह नहीं बताया गया था कि दक्षिणपंथी संगठनों के सदस्य भी बैठक में मौजूद रहेंगे.
उन्होंने दावा किया कि हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों ने गैर-ईसाइयों के चर्चों में जाने का मुद्दा उठाया और मांग की कि जिन लोगों ने धर्म परिवर्तन नहीं किया है, उन्हें चर्च में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. फिलुस ने आगे कहा कि बैठक में मौजूद कुछ अधिकारियों ने भी इस मांग का समर्थन किया.
उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक धर्मांतरण के आरोपों को लेकर ईसाई प्रार्थना सभाओं के दौरान कार्यकर्ताओं द्वारा पहले की गई घटनाओं और हंगामे के कारण समुदाय ने एहतियाती कदम उठाने का फैसला किया. क्रिश्चियन फोरम ने जिले के अन्य हिस्सों में चर्चों और प्रार्थना सभा स्थलों के बाहर भी इसी तरह के नोटिस लगाने के लिए समुदाय के सदस्यों से कहा है. फोरम ने कहा कि 15 सितंबर की बैठक राज्य के नए धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत जिला कलेक्ट्रेट में 1,000 से अधिक लोगों द्वारा स्व-घोषणा फॉर्म जमा किए जाने के बाद हुई थी.फोरम के मुताबिक, घोषणाओं में कहा गया था कि संबंधित लोग चर्चों या प्रार्थना सभा स्थलों में स्वेच्छा से और अपनी जिम्मेदारी पर धार्मिक बैठकों में शामिल हो रहे थे.
अधिकारियों ने बोलने से किया इंकार
धमतरी की अतिरिक्त कलेक्टर इंदिरा सिंह देहरी ने कहा कि वह इस मुद्दे पर टिप्पणी करने के लिए अधिकृत नहीं हैं. जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि मामला सुलझा लिया गया है, लेकिन उन्होंने इसकी जानकारी देने से इनकार कर दिया.
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