देहरादून में शिक्षा और अपने अधिकारों को लेकर चल रही Gen Z और Gen Alpha की मुहिम अब दृष्टि दिव्यांग छात्रों तक भी पहुंच गई है. राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIEPVD) के छात्र-छात्राओं ने अपनी समस्याओं को सामने रखते हुए संस्थान की व्यवस्थाओं पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं. छात्रों का कहना है कि उनकी जरूरतों से जुड़े कई अहम मुद्दे लंबे समय से बने हुए हैं.
NIEPVD यानी National Institute for the Empowerment of Persons with Visual Disabilities देहरादून, उत्तराखंड में स्थित भारत सरकार का प्रमुख संस्थान है. यहां दृष्टिबाधित लोगों की शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास से जुड़े काम किए जाते हैं. ऐसे में यहां पढ़ने वाले छात्रों का कहना है कि संस्थान में उन्हें अपनी रोजमर्रा की पढ़ाई और जरूरी सुविधाओं को लेकर कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
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आजतक ने संस्थान के छात्र-छात्राओं से बातचीत की. बातचीत के दौरान उन्होंने ब्रेल प्रेस में इस्तेमाल होने वाली डिवाइस की कीमत से लेकर स्कॉलरशिप तक कई मुद्दे उठाए. उनका आरोप है कि जरूरी उपकरणों की उपलब्धता और उनकी लागत को लेकर पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पा रही है. छात्रों ने अपनी पढ़ाई से जुड़ी जरूरतों को लेकर भी सवाल खड़े किए.
ब्रेल डिवाइस और स्कॉलरशिप को लेकर सवाल
छात्रों ने ब्रेल प्रेस से जुड़ी महंगी डिवाइस का मुद्दा उठाया. उनका कहना है कि दृष्टि दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई में ब्रेल सामग्री बेहद महत्वपूर्ण है, ऐसे में इससे संबंधित उपकरणों तक आसान पहुंच जरूरी है. विद्यार्थियों ने स्कॉलरशिप को लेकर भी सवाल किए और कहा कि आर्थिक सहायता से जुड़े मामलों में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
छात्राओं ने बातचीत के दौरान संस्थान में अपने साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किए जाने की शिकायत भी सामने रखी. उनका कहना है कि परिसर में छात्राओं के साथ व्यवहार को लेकर गंभीर समस्या है. उन्होंने इस मामले में बेहतर व्यवस्था और संवेदनशील रवैये की जरूरत बताई.
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी विद्यार्थियों ने अपनी परेशानी साझा की. उनका आरोप है कि डिस्पेंसरी में स्वास्थ्य संबंधी मामलों को लेकर अपेक्षित स्तर की तत्परता नहीं दिखाई जाती. छात्रों के मुताबिक, दृष्टि दिव्यांग छात्रों के लिए स्वास्थ्य सुविधा आसानी से उपलब्ध होना बेहद जरूरी है, लेकिन उन्हें इस मोर्चे पर भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
मोबिलिटी इंस्ट्रक्टर्स की कमी से बढ़ी परेशानी
छात्रों ने मोबिलिटी इंस्ट्रक्टर्स की भारी कमी का मुद्दा भी उठाया. उनका कहना है कि दृष्टि दिव्यांग छात्रों के लिए Mobility Instructor की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इससे उन्हें स्वतंत्र रूप से आवाजाही और दैनिक गतिविधियों में मदद मिलती है. स्टाफ की कमी के कारण कई विद्यार्थी हॉस्टल में रहने के लिए मजबूर हो जाते हैं.
छात्रों के मुताबिक, अगर पर्याप्त संख्या में मोबिलिटी इंस्ट्रक्टर्स उपलब्ध हों तो उन्हें अपनी जरूरत के मुताबिक बाहर आने-जाने और दूसरी गतिविधियों में अधिक स्वतंत्रता मिल सकती है. उनका कहना है कि मौजूदा स्थिति में इस कमी का सीधा असर उनके सामान्य जीवन और पढ़ाई पर पड़ रहा है.
पढ़ाई से जुड़ी एक और समस्या विद्यार्थियों ने सामने रखी. छात्रों ने बताया कि कुछ विषयों में English से Hindi में बदलाव किया गया है, लेकिन संबंधित किताबें अभी तक उन्हें नहीं मिल पाई हैं. छात्रों का कहना है कि भाषा में बदलाव के बाद अगर अध्ययन सामग्री उपलब्ध नहीं होगी तो इसका असर उनकी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी पर पड़ना स्वाभाविक है.
संस्थान के इंचार्ज के स्थायी न होने पर भी सवाल
छात्रों ने NIEPVD के इंचार्ज के स्थायी नहीं होने का मुद्दा भी उठाया. उनका कहना है कि संस्थान जैसे महत्वपूर्ण केंद्र में नेतृत्व की स्थायी व्यवस्था होना जरूरी है. छात्रों के मुताबिक, प्रशासनिक स्तर पर स्थिरता रहने से उनकी समस्याओं का समाधान बेहतर तरीके से हो सकता है.
इन तमाम मुद्दों को लेकर विद्यार्थी अपनी आवाज उठा रहे हैं. उनका कहना है कि वे सिर्फ अपनी शिकायतें दर्ज नहीं करा रहे, बल्कि ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं जिसमें दृष्टि दिव्यांग छात्रों की जरूरतों को गंभीरता से समझा जाए और शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, आवागमन, छात्रवृत्ति तथा अध्ययन सामग्री जैसी मूलभूत सुविधाएं बेहतर तरीके से उपलब्ध हों.
आजतक ने छात्रों की मांगों और उनके आरोपों को लेकर NIEPVD के प्रिंसिपल से बात करने की कोशिश की. हालांकि, प्रिंसिपल ने फिलहाल इस मामले पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. संस्थान की ओर से इन आरोपों और विद्यार्थियों की शिकायतों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद उसका पक्ष भी इस रिपोर्ट में शामिल किया जा सकता है.
अंकित शर्मा