सीएम योगी आदित्यनाथ का दावा- सोनभद्र में कांग्रेस नेता ने कब्जाई 6 हजार एकड़ जमीन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सोनभद्र और मिर्जापुर में एक लाख हेक्टेयर जमीन कब्जाई गई है. कांग्रेस के एक बड़े नेता ने सब सोसाइटी बनाकर 6 हजार एकड़ से अधिक जमीन पर कब्जा किया.

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटोः India Today) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटोः India Today)

कुमार अभिषेक / शिवेंद्र श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 04 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 11:37 PM IST

  • मिर्जापुर और सोनभद्र में फर्जी सोसाइटी बनाकर 1 लाख हेक्टेयर ज़मीन कब्जाई गई: मुख्यमंत्री
  • आईएएस रेणुका कुमार की समिति करेगी जांच, 3 माह में सौंपेगी रिपोर्ट: योगी

सोनभद्र के उम्भा जमीन विवाद में 17 जुलाई को हुए नरसंहार के मुद्दे पर हमलावर रही कांग्रेस अब खुद घिरती नजर आ रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सोनभद्र और मिर्जापुर में एक लाख हेक्टेयर जमीन कब्जाई गई है. कांग्रेस के एक बड़े नेता ने सब सोसाइटी बनाकर 6 हजार एकड़ से अधिक जमीन कब्जा की.

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मुख्यमंत्री ने जमीन पर कब्जा करने के लिए किए गए फर्जीवाड़े की जांच करने के लिए आईएएस रेणुका कुमार के नेतृत्व में चार सदस्यीय समिति गठित करने की घोषणा करते हुए कहा कि यह समिति तीन माह में जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी. इस मामले में संलिप्त पाए गए दो दर्जन से ज्यादा लोगों के खिलाफ FIR और निलंबन की कार्रवाई की गई है. मुख्यमंत्री ने डीआईजी जे रवींद्र गौड़ के नेतृत्व में सभी मुकदमों की विवेचना के लिए एसआईटी गठित किए जाने की भी जानकारी दी.

जमीन हड़पने के लिए 1952 में बनी थी फर्जी सहकारी समिति

जांच में जमीन हड़पने के लिए 10 अक्टूबर 1952 को आदर्श सहकारी कृषि समिति नाम से फर्जी सहकारी समिति के गठन की बात सामने आई है. 12 सदस्यीय इस समिति के प्रबंधक दुर्गा प्रसाद राय थे. यह सोसाइटी बिहार के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल चंद्रशेखर प्रसाद नारायण सिंह के चाचा और उस समय बिहार से राज्यसभा सांसद रहे महेश्वर प्रसाद नारायण द्वारा गठित की गई थी और सोसाइटी के सभी सदस्य कांग्रेस नेता के रिश्तेदार थे. 1989 में सोसाइटी की जमीन का हस्तांतरण व्यक्तियों के नाम कर दिया गया.

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आईएएस अधिकारी और पत्नी भी संलिप्त

जांच में सामने आया है कि नरसंहार की घटना का मुख्य आरोपी ग्राम प्रधान यज्ञ दत्त समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक रमेश चंद्र दुबे का करीबी है. यज्ञदत्त ने पिछले चुनाव में समाजवादी पार्टी का प्रचार भी किया था. इस मामले में बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी भानु प्रकाश शर्मा और उनकी पत्नी विनीता शर्मा की संलिप्तता भी सामने आ रही है. शर्मा दंपति के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया गया है. सोसाइटी की मूल जमीन, ग्राम सभा की थी, अपने नाम कराने के लिए शर्मा दंपति के साथ ही आईएएस प्रभात कुमार मिश्रा की पत्नी आशा मिश्रा के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है.

पुलिस-प्रशासन की लापरवाही

जांच में पाया गया कि सोनभद्र के उम्भा गांव के लगभग 140 किसान परिवार इस जमीन पर पिछले 40 साल से खेती कर रहे थे. कब्जे को लेकर इन लोगों ने जिलाधिकारी सोनभद्र के सामने 11 बार अपील की, लेकिन जिलाधिकारी ने 6 जुलाई 2019 को किसानों की अपील खारिज कर दी. इस मामले में पुलिस ने भी बेहद लापरवाह रवैया अपनाया. पुलिस ने उल्टे ग्रामीणों के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर गुंडा एक्ट लगा दिया. इससे आरोपी ग्राम प्रधान यज्ञ दत्त की हिम्मत और बढ़ती चली गई और उसने 17 जुलाई को इस घटना को अंजाम दे दिया.

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शुरुआती दौर के अधिकारियों के खिलाफ भी मुकदमा

बताया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत राबर्ट्सगंज के तत्कालीन तहसीलदार कृष्ण मालवीय द्वारा 17 दिसंबर 1955 को पारित किए गए एक गलत आदेश से हुई. मालवीय के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है. हालांकि वह जिंदा हैं भी या नहीं, इस संबंध में भी प्रशासन के पास कोई जानकारी नहीं है. साल 1989 के तत्कालीन परगना अधिकारी अशोक कुमार श्रीवास्तव व तहसीलदार जय चंद्र सिंह के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं.

एसडीएम समेत कई निलंबित

सहायक अभिलेख अधिकारी सोनभद्र राजकुमार के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज होगी. कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ निलंबन और एफआईआर की कार्रवाई की गई है, जिनमें उप जिलाधिकारी (एसडीएम) घोरावल विजय प्रकाश तिवारी, क्षेत्राधिकारी (सीओ) घोरावल अभिषेक सिंह, उपनिरीक्षक लल्लन प्रसाद यादव, निरीक्षक अरविंद कुमार मिश्र, बीट कांस्टेबल सत्यजीत यादव शामिल हैं. क्षेत्राधिकारी अभिषेक सिंह के खिलाफ पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाने और फर्जी तरीके से गुंडा एक्ट लगाने के लिए एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं.

इस मामले में सहायक निबंधक सहकारी समितियां वाराणसी, विजय कुमार अग्रवाल को निलंबित करने के साथ ही एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं. इन सभी अधिकारियों के अलावा जिले में तैनात रहे सभी अवकाश प्राप्त जीवित अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं. इनमें घोरावल के एसडीएम रहे विजय प्रकाश तिवारी मणिकंदन, प्रभारी निरीक्षक आशीष कुमार सिंह, शिव कुमार मिश्र, विवेकानंद तिवारी और राहुल मिश्रा के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है.

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