3 करोड़ के नोटों से सजी गणेश प्रतिमा की कहानी... आस्था और उत्सव के बीच पंडाल में दिखी अनोखी थीम

गणेश चतुर्थी पर आपने गणपति की मूर्तियों को फूलों, मालाओं, सोने-चांदी और रंग-बिरंगी लाइटों से सजा हुआ तो खूब देखा होगा. लेकिन तेलंगाना के पालवंचा में इस बार गणपति की सजावट कुछ ऐसी हुई कि देखने वाले भी रुक गए. यहां दो गणेश प्रतिमाओं को 2.90 करोड़ रुपये के नोटों से सजाया गया. यह अनोखी सजावट देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे.

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गणेश उत्सव पर तेलंगाना के पंडालों में उमड़े श्रद्धालु. (Photo: ITG) गणेश उत्सव पर तेलंगाना के पंडालों में उमड़े श्रद्धालु. (Photo: ITG)

अब्दुल बशीर

  • हैदराबाद,
  • 19 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:29 PM IST

तेलंगाना के पालवंचा में गणेश चतुर्थी पर इस बार कुछ ऐसा हुआ कि पंडाल में पहुंचे लोग बस गणपति को देखते रह गए. वजह थी मूर्ति की सजावट... फूलों, मालाओं और लाइटों से तो गणेश जी की सजावट आपने खूब देखी होगी, लेकिन यहां गणपति के आसपास करेंसी नोटों की ऐसी सजावट की गई कि रकम सुनकर ही मामला बड़ा लगने लगेगा. कुल कितने रुपये? 2 करोड़ 90 लाख रुपये... हां, इतनी बड़ी रकम के करेंसी नोटों से पालवंचा में दो अलग-अलग गणेश प्रतिमाओं को सजाया गया.

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मामला तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम जिले के पालवंचा का है. यहां बापूजी नगर में कपु समुदाय की ओर से गणेश प्रतिमा स्थापित की गई थी. गणेश चतुर्थी पर जब पंडाल में लोग पहुंचे तो उनकी नजर सीधे प्रतिमा की सजावट पर गई. गणपति के आसपास करेंसी नोटों की सजावट थी. आयोजकों के मुताबिक, इस सजावट में करीब 1.40 करोड़ रुपये के नोट लगाए गए थे.

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यानी गणपति की प्रतिमा के सामने श्रद्धालुओं की भीड़ थी और चारों तरफ नजर डालिए तो फूलों के बीच करेंसी नोट दिखाई दे रहे थे. यह सजावट इतनी अलग थी कि इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचने लगे. इसी इलाके में एक दूसरी गणेश प्रतिमा भी इसी वजह से चर्चा में आ गई. यहां टीम एका दंथा यूथ ऑर्गनाइजेशन ने गणेश प्रतिमा को करीब 1.50 करोड़ रुपये के करेंसी नोटों से सजाया.

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पहली प्रतिमा पर 1.40 करोड़ और दूसरी पर 1.50 करोड़... दोनों को जोड़िए तो रकम पहुंचती है 2.90 करोड़ रुपये. मतलब पालवंचा में गणेश उत्सव के दौरान दो गणेश प्रतिमाएं ऐसी थीं, जिनकी सजावट में ही करोड़ों रुपये के नोट लगाए गए थे.

लेकिन इतने सारे नोट आए कहां से?

अब सवाल यही कि करोड़ों रुपये के नोट आखिर जुटाए कैसे गए? आयोजकों ने बताया कि इस बार गणेश उत्सव को बड़े स्तर पर मनाने का फैसला किया गया था. इसके लिए स्थानीय कारोबारियों ने मिलकर योगदान दिया. यानी सजावट के लिए रकम किसी एक व्यक्ति की ओर से नहीं, बल्कि स्थानीय कारोबारियों के सहयोग से जुटाई गई. आयोजकों ने यह भी बताया कि करेंसी नोट उपलब्ध कराने में बैंकों ने मदद की. उनके मुताबिक, सजावट के लिए नए करेंसी नोट उपलब्ध कराए गए.

गणेश चतुर्थी के दौरान वैसे तो हर पंडाल में अलग-अलग तरह की सजावट देखने को मिलती है. कहीं फूलों से मंदिर बनाया जाता है, कहीं लाइटिंग से पूरा पंडाल चमकता है और कहीं गणपति की थीम ही अलग रखी जाती है. लेकिन पालवंचा में थीम कुछ ऐसी थी, जिसे लोग देखते ही रह गए.

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गणपति की प्रतिमा और उसके चारों तरफ करेंसी नोट... इस अनोखी सजावट की खबर फैली तो बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंडालों तक पहुंचे. लोग इस खास सजावट को देखने के लिए जमा होते रहे.

दो गणपति, 2.90 करोड़ की सजावट

गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की भक्ति के अपने-अपने तरीके हैं. पालवंचा में आयोजकों ने इस बार उत्सव को भव्य बनाने के लिए करोड़ों रुपये के नोटों से सजावट का तरीका चुना. यही वजह है कि इन दोनों गणेश प्रतिमाओं की तस्वीरें और सजावट वहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के बीच खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं.

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