बारिश हो रही थी. सड़क पर पानी भरा था. लोगों को लग रहा था कि ये बस बारिश का जमा हुआ पानी है. लेकिन उस पानी के नीचे एक खुला नाला था. किसी को दिखाई नहीं दिया. और देखते ही देखते एक 70 साल के बुजुर्ग उसी नाले में समा गए. कुछ सेकेंड में वो आंखों से ओझल हो गए. अब पुलिस, SDRF और HYDRA की टीमें उन्हें तलाश रही हैं.
मामला हैदराबाद के मियापुर इलाके का है. मंगलवार को शहर में तेज बारिश हो रही थी. वैषाली नगर रेलवे अंडरपास के पास स्टॉर्म वॉटर ड्रेन यानी बरसाती नाले की मरम्मत का काम चल रहा था. इसी इलाके से हफीजपेट के प्रेम नगर के रहने वाले 70 साल के बुजुर्ग बलैया गुजर रहे थे.
बारिश का पानी सड़क पर इतना भर चुका था कि रास्ता और नाला, दोनों एक जैसे दिख रहे थे. आरोप है कि निर्माणाधीन ड्रेन का मैनहोल खुला छोड़ दिया गया था. न उसके चारों ओर बैरिकेडिंग थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड. बलैया को अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि जिस पानी पर वे कदम रख रहे हैं, उसके नीचे कई फीट गहरा खुला नाला है.
जैसे ही उनका पैर उस जगह पड़ा, वे सीधे ड्रेन में गिर गए. बारिश का तेज बहाव उन्हें अपने साथ बहाकर ले गया. आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले वह पानी में गायब हो चुके थे.
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घटना की सूचना मिलते ही मियापुर पुलिस मौके पर पहुंची. इसके बाद HYDRA और SDRF की टीमों को बुलाया गया. कई घंटों से नालों, पाइपलाइन और ड्रेनेज नेटवर्क में उनकी तलाश जारी है. बचाव दल मशीनों और विशेष उपकरणों की मदद से सर्च ऑपरेशन चला रहा है. हालांकि खबर लिखे जाने तक बलैया का कोई सुराग नहीं मिला था.
इस घटना के बाद इलाके के लोगों का गुस्सा भी फूट पड़ा. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर निर्माण एजेंसी ने सुरक्षा के बुनियादी नियमों का पालन किया होता, तो शायद यह हादसा नहीं होता. उनका आरोप है कि ठेकेदार ने खुला मैनहोल छोड़ दिया था. बारिश का पानी पूरे गड्ढे को ढक चुका था, इसलिए किसी राहगीर के लिए खतरे का अंदाजा लगाना मुश्किल था.
सवाल है कि शहरों में चल रहे निर्माण कार्यों की निगरानी कौन कर रहा है? क्या हर मानसून में लोगों को खुले नालों, टूटी सड़कों और बिना बैरिकेड वाले गड्ढों के भरोसे छोड़ दिया जाएगा? फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि पहले रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा किया जाएगा. इसके बाद यह देखा जाएगा कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं हुआ.
अब्दुल बशीर