जिनपिंग से अचानक मुलाकात PM मोदी का 'बड़ा' कदम, चीन भी समझेगा भारत का महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 27-28 अक्टूबर को बातचीत होगी. इस मुलाकात पर दोनों देशों की जनता के साथ-साथ दुनिया की नजरें टिकी हैं. क्योंकि अचानक पीएम मोदी के चीन दौरे को लेकर कोई बातचीत का खास एजेंडा तय नहीं है. ऐसे में जिन मुद्दों पर बात होगी वो बेहद अहम होंगे.

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पीएम मोदी के साथ जिनपिंग (फाइल फोटो) पीएम मोदी के साथ जिनपिंग (फाइल फोटो)

अमित कुमार दुबे / अनंत कृष्णन

  • नई दिल्ली/बीजिंग,
  • 23 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 11:34 AM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 27-28 अक्टूबर को बातचीत होगी. इस मुलाकात पर दोनों देशों की जनता के साथ-साथ दुनिया की नजरें टिकी हैं. क्योंकि अचानक पीएम मोदी के चीन दौरे को लेकर कोई बातचीत का खास एजेंडा तय नहीं है. ऐसे में जिन मुद्दों पर बात होगी वो बेहद अहम होंगे.

अचानक बातचीत का फैसला साहसिक कदम

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पीएम मोदी का ये दो दिवसीय चीन दौरा कई मामलों में अहम है. पिछले साल जिस तरह से डोलकाम को लेकर 72 दिनों तक सीमा पर दोनों सेनाओं के बीच गतिरोध बना हुआ था, इस दौरान दोनों ओर से भी हुई थी. फिर जिस तरह से NSG में भारत के खिलाफ चीन दीवार बनकर खड़ा हो गया था. ऐसे में नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच अचानक इस मुलाकात को एक तरह 'साहसिक' कदम माना जा रहा है.

रिश्ते सुधारने के लिए नई पहल

पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर ने मोदी और जिनपिंग के बीच होने वाली मुलाकात को एक साहसिक कदम बताया है. जयशंकर का कहना है कि एक अनौपचारिक समिट में हिस्सा लेने के लिए दोनों नेताओं की सहमति ये दिखाती है कि रिश्तों की क्या अहमियत है. बेहतर रास्तों पर आगे बढ़ने के लिए दोनों नेताओं ने जिम्मेदारी को अपनाया है.

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जयशंकर का मानना है कि दो देशों के बीच आजकल व्यक्तिगत संबंध बेहद अहम हो गए हैं. मुझे लगता है कि चीन भी इस बात को बखूबी समझता है और इसलिए ये तालमेल शुरू हुआ है.

यही नहीं, जयशंकर ने कहा, 'मुझे लगता है कि ये पहले की मुलाकातों से इसलिए अलग है, क्योंकि ये बेहद में होगी. इसके लिए एजेंडा निश्चित नहीं है और दोनों नेताओं के पास दो दिन में बात करने के लिए काफी वक्त होगा, जिसमें व्यक्तिगत बातचीत के लिए दूसरी मुलाकातों के लिहाज से काफी वक्त होगा.'

तनाव कम करने पर फोकस

दरअसल शी जिनपिंग और मोदी के बीच यह एक अनौपचारिक शिखर बैठक होगी जिस दौरान दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों के लिए नई पहल की कोशिश करेंगे जो विभिन्न विवादों और मतभेदों के चलते तनावग्रस्त हो गए थे. साल 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी की यह चौथी चीन यात्रा होगी.

रिश्तों को बातचीत से मिलेगी मजबूती

वहीं भारत में चीन के राजदूत लुओ झाओहुई ने भी इस बात की आशा जताई कि इस सप्ताह चीन के वुहान शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच होने वाले अनौपचारिक से दोनों नेताओं का तालमेल और बेहतर होगा और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिलेगी.

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लुओ ने एक वीडियो संदेश में कहा, 'इस सम्मेलन से दोनों की व्यक्तिगत मित्रता उभरकर सामने आएगी और दोनों नेताओं का तालमेल बेहतर होगा. मेरा मानना है कि दोनों नेताओं के मार्गदर्शन और आपके एवं मेरे सहित चीनी और भारतीय लोगों के संयुक्त प्रयास से चीन-भारत संबंधों के नये अध्याय की शुरुआत होगी.  

सुषमा के दौरे से इस मुद्दे पर बनी बात

चीन ने भारत के साथ ब्रह्मपुत्र और सतलज नदी में जल प्रवाह से संबंधित (हाइड्रोलॉजिकल) आंकड़ों को साझा करने की व्यवस्था फिर शुरू करने पर सहमति जताई है. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आज इसकी जानकारी दी. दोनों देशों के सैनिकों के बीच डोकलाम क्षेत्र में तनातनी के बाद से चीन ने इन नदियों के प्रवाह की स्थित की सूचनाएं भारत के साथ साझा करने का सिलसिला बंद कर दिया था जबकि ये आंकड़े बाढ़ का पूर्वानुमान लगाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं.

गौरतलब है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और उनके चीनी समकक्ष वांग यी ने बीजिंग में रविवार को इस बात का ऐलान किया कि मोदी और जिनपिंग 27 से 28 अप्रैल तक वुहान शहर में एक अनौपचारिक शिखर सम्मेलन करेंगे.

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