महाराष्ट्र में किसानों की डरावनी हालत, चार महीने में 808 ने की खुदकुशी

महाराष्ट्र में किसानों की खुदकुशी रुकने का नाम नहीं ले रही. इस साल शुरू के चार महीने में जो आंकड़े आए हैं, वह भी चौंकाने वाले हैं. मानसून में देरी से परेशानी और भी बढ़ सकती है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 जून 2019,
  • अपडेटेड 12:38 PM IST

महाराष्ट्र में किसानों की स्थिति दयनीय है. परेशान किसान खुदकुशी करने को मजबूर हैं. अंग्रेजी 'अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया' में छपी खबर के मुताबिक इस साल शुरुआती चार महीने में कुल 808 किसानों ने खुदकुशी की है. हालांकि यह पिछले साल के शुरुआती चार महीने के आंकड़ों से 88 कम है. पिछले साल अप्रैल तक 896 किसानों ने खुदकुशी की थी.

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किस इलाके में कितने किसानों ने की खुदकुशी

खबर के मुताबिक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के इलाके विदर्भ में इस साल जनवरी से अप्रैल तक सबसे ज्यादा 344 किसानों ने खुदकुशी की है. जल संकट से जूझ रहे मराठवाड़ा में 269 किसानों ने आत्महत्या की है. उत्तर महाराष्ट्र में 161 और चीनी बेल्ट वाले पश्चिम महाराष्ट्र में 34 किसानों ने खुदकुशी की है. अच्छी बात यह है कि कोंकण इलाके में कोई खुदकुशी का मामला सामने नहीं आया है.

सूखे के कारण किसान परेशान

प्रदेश के किसानों के लिए 2018-19 का साल मुसीबत भरा रहा है. क्योंकि महाराष्ट्र के 42 फीसदी तहसील सूखे की चपेट में है. इस कारण प्रदेश के 60 फीसदी किसान प्रभावित हुए हैं और उनकी फसल को भारी नुकसान पहुंचा है. राज्य सरकार ने 2017 में किसानों का लोन माफ किया था. इस साल केंद्र सरकार ने भी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत छोटे किसानों को 6000 रुपये की आर्थिक सहायता दी है.

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महाराष्ट्र में कब आएगा मानसून

महाराष्ट्र के किसान नेताओं के मुताबिक सूखा और जल संकट के कारण किसान पहले से ही परेशान हैं और मानसून में देरी के कारण कृषि को और भी नुकसान हो सकता है. मानसून में देरी के कारण मवेशियों के लिए भी चारा संकट होगा. महाराष्ट्र मं 17 जून तक मानसून आने की संभावना है. सरकार अच्छे मानसून की उम्मीद लगाए बैठे है ताकि इससे किसानों को राहत मिले.

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