क्या कोविंद बनाएंगे सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड, देखें अभी किसके नाम सबसे बड़ी जीत

अब सवाल उठता है कि आखिर उन्हें कितने प्रतिशत वोट मिलेंगे, क्या रामनाथ कोविंद सर्वाधिक वोटों के साथ कोई नया इतिहास रचेंगे. इससे पहले भी ऐसे कई राष्ट्रपति चुनाव हुए हैं, जिनमें कांटे का मुकाबला हुआ है या फिर काफी भारी अंतर से जीत हुई है. इसी पर एक नजर डालते हैं.

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क्या नया रिकॉर्ड बनाएंगे रामनाथ कोविंद? क्या नया रिकॉर्ड बनाएंगे रामनाथ कोविंद?

मोहित ग्रोवर

  • नई दिल्ली,
  • 20 जुलाई 2017,
  • अपडेटेड 12:56 PM IST

देश का अगला राष्ट्रपति कौन होगा इसका फैसला गुरुवार शाम तक हो जाएगा. संसद में अभी वोटों की गिनती चल रही है. शाम तक यह तय होगा कि एनडीए के रामनाथ कोविंद और यूपीए की मीरा कुमार में से विजेता कौन है. अभी तक हालातों पर नजर डालें तो उम्मीद की जा रही है कि रामनाथ कोविंद आसानी से यह चुनाव जीत जाएंगे.

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लेकिन अब सवाल उठता है कि आखिर उन्हें कितने प्रतिशत वोट मिलेंगे, क्या रामनाथ कोविंद सर्वाधिक वोटों के साथ कोई नया इतिहास रचेंगे. इससे पहले भी ऐसे कई राष्ट्रपति चुनाव हुए हैं, जिनमें कांटे का मुकाबला हुआ है या फिर काफी भारी अंतर से जीत हुई है. इसी पर एक नजर डालते हैं.

- 1957 में पहले राष्ट्रपति के कार्यकाल खत्म होने से पहले ही दूसरे राष्ट्रपति का चुनाव हुआ था. इसमें राजेंद्र प्रसाद को 459698 वोट मिले थे, जबकि नारायण दास को 2000 और हरिराम चौधरी को मात्र 2672 वोट ही मिले थे. डॉ. राजेंद्र प्रसाद लगातार दूसरी बार देश के राष्ट्रपति बने थे.

- 1962 में डॉ. के बाद सर्वपल्लि राधाकृष्णन देश के राष्ट्रपति बने थे. उनके सामने उस दौरान चौधरी हरि राम और यमुना प्रसाद त्रिसूला खड़े हुए थे. राधाकृष्णन को कुल 5,53,067 वोट मिले थे वहीं अन्य दोनों उम्मीदवारों को मिलाकर कुल 10,000 वोट ही मिल पाए थे. (यह गिनती 1951 की जनसंख्या के आधार पर हुई थी.)

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- 1969 में तत्कालीन राष्ट्रपति जाकिर हुसैन की मौत के बाद तत्कालीन उपराष्ट्रपति वीवी गिरी ने उनका कार्यभार संभाला था. उसके बाद हुए चुनाव में गिरी को 4,01,515 वोट मिले थे, वहीं उनके खिलाफ खड़े संजीव रेड्डी को 3,13,548 वोट मिले थे.

- 1977 में तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली की अचानक मौत के बाद हुए राष्ट्रपति चुनाव में कुल 37 उम्मीदवार खड़े हुए थे. लेकिन 36 का नॉमिनेशन ही रद्द कर दिया गया था, और नीलम संजीव रेड्डी राष्ट्रपति बने थे. यह पहली बार था कि जब निर्विरोध कोई राष्ट्रपति चुना गया था.

- 1997 में के आर नारायण ने टीएन शेषन को भारी अंतर से हराया था. नारायण को 9,56,290 वोट मिले थे, जबकि शेषन को मात्र 50,631 वोट ही मिल पाए थे.

- 2002 में डॉ. भी काफी बड़े अंतर से जीते थे. उन्हें 9,22,884 वोट मिले थे, जबकि उनके सामने लक्ष्मी सहगल को 1,07,336 वोट ही मिले थे.

 

- 2012 में प्रणब मुखर्जी को लगभग 69 प्रतिशत वोट मिले थे, वहीं 2007 में प्रतिभा पाटिल को 67 वोट हासिल हुए थे..

 

 

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