बुलेट ट्रेन का रास्ता साफ, जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों की याचिका हाई कोर्ट से खारिज

किसानों के लिए मुआवजे के मुद्दे पर फैसला करते हुए कोर्ट ने कहा कि किसान अपनी मांगों को जायज ठहराने के लिए अन्य परियोजनाओं में अधिक मुआवजे के सबूत पेश कर सकते हैं.

Advertisement
फोटो-PTI फोटो-PTI

गोपी घांघर

  • अहमदाबाद,
  • 19 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 11:41 PM IST

  • कोर्ट ने 100 से अधिक याचिकाओं को खारिज कर दिया
  • 508 किमी. लंबी बुलेट ट्रेन परियोजना का काम जारी

अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर गुजरात हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना को पूरी तरह से मंजूरी दे दी. कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया व अपर्याप्त मुआवजे के खिलाफ किसानों की ओर से दायर 100 से अधिक याचिकाओं को खारिज कर दिया.

Advertisement

सुप्रीम कोर्ट जाएंगे किसान

न्यायमूर्ति अनंत दवे और बीरेन वैष्णव की पीठ ने अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया. वहीं, याचिकाकर्ता आनंद याग्निक ने कहा कि अब किसान सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगें. हाई कोर्ट के फैसले से किसान दुखी हैं.

वहीं, याचिकाकर्ता जयेश पटेल ने कहा कि किसानों की और से जमीन के दाम को लेकर याचिका डाली गई थी. किसानों की मांग थी कि प्रोजेक्ट के लिए जो भूमि अधिग्रहण की जा रही है उसका मार्केट रेट से 4 गुना दाम मिले. उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई जारी रहेगी और हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे.  

गौरतलब है कि नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन द्वारा 508 किलोमीटर लंबी बुलेट ट्रेन परियोजना शुरू की जा रही है. केंद्रीय भूमि अधिग्रहण कानून का हवाला देकर कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि यह परियोजना कई राज्यों से संबंधित है, लेकिन केंद्र ने भूमि अधिग्रहण करने के लिए गुजरात को कार्यकारी शक्ति की मंजूरी दी.

Advertisement

गुजरात की ओर से सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट (एसआईए) के बिना भूमि अधिग्रहण को अधिसूचित करने के मुद्दे पर भी कोर्ट ने स्पष्टता जाहिर की. कोर्ट ने कहा कि राज्य द्वारा परियोजना से पहले सामाजिक आकलन, पुनर्वास जैसे केंद्रीय कानून के अनिवार्य प्रावधानों को छोड़ते हुए अधिसूचना जारी करना भी वैध है.

कोर्ट ने कहा कि जापान इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी (जेआईसीए) के दिशानिर्देशों के तहत की गई एसआईए प्रक्रिया उचित और संतोषजनक है. किसानों के लिए मुआवजे के मुद्दे पर फैसला करते हुए कोर्ट ने कहा कि किसान अपनी मांगों को जायज ठहराने के लिए अन्य परियोजनाओं में अधिक मुआवजे के सबूत पेश कर सकते हैं.

60 फीसदी किसानों को आपत्ति

बता दें कि परियोजना से प्रभावित कुल 6900 किसानों में से लगभग 60 फीसदी ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज की थी. सूरत जिले के पांच किसानों ने 2018 में गुजरात के भूमि अधिग्रहण अधिसूचना के खिलाफ कोर्ट का रुख किया. उन्होंने दावा किया कि केंद्र के पास ही अधिसूचना जारी करने की शक्ति है, जबकि राज्य सरकार के पास कई राज्यों से संबंधित इस रेल परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण करने का अधिकार नहीं है.

इन पांच याचिकाकर्ताओं ने हालांकि बाद में अपनी याचिका वापस ले ली, लेकिन गुजरात के दक्षिण और मध्य जिलों के 100 से अधिक किसानों ने केंद्रीय भूमि अधिग्रहण कानून में किए गए संशोधनों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »