जस्टिस कर्णन की 6 महीने की सजा हुई पूरी, जेल से हुए रिहा

सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई को कर्णन को अदालत, न्यायिक प्रक्रिया और पूरी न्याय व्यवस्था की अवमानना का दोषी मानते हुए छह महीने की सजा सुनाई थी. सुप्रीम कोर्ट से आदेश मिलने के बाद जस्टिस कर्णन को गिरफ्तार करते हुए जेल भेज दिया गया था.

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फाइल फोटो फाइल फोटो

केशवानंद धर दुबे

  • नई दिल्ली,
  • 20 दिसंबर 2017,
  • अपडेटेड 2:01 PM IST

कलकत्ता उच्च न्यायालय के रिटायर्ड जस्टिस कर्णन 6 महीने बाद जेल से रिहा हो गए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई को कर्णन को अदालत, न्यायिक प्रक्रिया और पूरी न्याय व्यवस्था की अवमानना का दोषी मानते हुए छह महीने की सजा सुनाई थी. सुप्रीम कोर्ट से आदेश मिलने के बाद जस्टिस कर्णन को गिरफ्तार करते हुए जेल भेज दिया गया था.

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बता दें कि पत्नी सरस्वती कर्णन रिहाई से पहले उन्हें  घर वापस लाने के लिए मंगलवार शाम को कोलकाता पहुंची थी. 

20 जून को हुई थी गिरफ्तारी

सर्वोच्च न्यायालय की ओर से सजा सुनाने के बाद से ही कर्णन फरार चल रहे थे. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस खेहर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मई में जस्टिस कर्णन को गिरफ्तार करने के लिए डीजीपी को एक कमेटी बनाने के आदेश दिए थे. इस आदेश के बाद सीएस कर्णन को 20 जून को तमिलनाडु के कोयंबटूर से  गिरफ्तार किया गया था. बता दें कि कर्णन 12 जून को सेवानिवृत्त हुए थे.

लगाए थे भ्रष्टाचार के आरोप

जस्टिस कर्णन ने मद्रास हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कई जजों के खिलाफ के आरोप लगाए थे, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की बेंच ने इस सिलसिले में जस्टिस कर्णन की लिखी चिट्ठियों का स्वत: संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना का मुकदमा शुरू किया था.

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इस सिलसिले में जस्टिस कर्णन 31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे. ऐसा करने वाले वह किसी भी के पहले जज थे. वहीं, जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को असंवैधानिक बताया था. उन्होंने कहा था कि 8 फरवरी से ये सात जज मुझे कोई भी न्यायिक और प्रशासनिक कार्य नहीं करने दे रहे हैं. इन लोगों ने मुझे परेशान कर दिया है और मेरा सामान्य जीवन खराब कर दिया है. इसलिए, मैं सभी सात न्यायाधीशों से मुआवजे के रूप में 14 करोड़ रुपये लूंगा.

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