कांग्रेस के कहा- महाभियोग के फैसले के बारे में मीडिया को बताना गलत नहीं

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी ने रविवार को कहा कि दिसंबर 2009 में जास्टिस दिनाकरन के खिलाफ जब महाभियोग प्रस्ताव राज्यसभा के सभापति को सौंपा गया था, उसके तुरंत बाद उसके बारे में बीजेपी नेता अरुण जेटली और माकपा नेता सीताराम येचुरी ने मीडिया को संबोधित किया था. उन्होंने कहा, इसलिए महाभियोग प्रस्ताव सौंपने के बाद मीडिया से मुखातिब होकर हमने कुछ गलत नहीं किया.

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केटीएस तुलसी केटीएस तुलसी

कुमार विक्रांत / वरुण शैलेश

  • नई दिल्ली,
  • 22 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 3:01 PM IST

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के संबंध में मीडिया को संबोधित करने को लेकर उठे सवाल पर विपक्ष ने जवाब दिया है. कांग्रेस का कहना है कि उसने इस संदर्भ में मीडिया के सामने बता कर नियमों का उल्लंघन नहीं किया है.

के वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी ने रविवार को कहा कि दिसंबर 2009 में जास्टिस दिनाकरन के खिलाफ जब महाभियोग प्रस्ताव राज्यसभा के सभापति को सौंपा गया था, उसके तुरंत बाद उसके बारे में बीजेपी नेता अरुण जेटली और माकपा नेता सीताराम येचुरी ने मीडिया को संबोधित किया था. उन्होंने कहा, इसलिए महाभियोग प्रस्ताव सौंपने के बाद मीडिया से मुखातिब होकर हमने कुछ गलत नहीं किया.

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कांग्रेस नेता ने कहा कि महाभियोग प्रस्ताव को लेकर ऐसा कोई नियम नहीं है, जिसकी चर्चा नहीं की जा रही है. वहीं कांग्रेस के एक अन्य नेता विवेक तन्खा ने कहा, एक मंत्री कहते हैं कि ये ओडिशा का अपमान है, चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया पूरे देश के हैं. इस तरह के बयान को ठीक नहीं कहा जा सकता है.

तन्खा ने कहा, आज हम पर तमाम बातें की जा रही हैं, 2009 में दिनाकरन को लेकर आपने क्या किया था? चीफ जस्टिस को खुद ही उन आक्षेपों के खिलाफ जांच बैठा देनी चाहिए, जो उन पर लगे हैं. यही बेहतर होगा. जब तक महाभियोग प्रस्ताव का मामला चल रहा है, तब तक खुद चीफ जस्टिस को सोचना चाहिए कि उन्हें बतौर जज काम करना है या नहीं. कांग्रेस नेता ने कहा कि बीजेपी मुख्य न्यायधीश के पक्ष में खड़ी होती है तो ये उनके ही ऑफिस का अपमान है.

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बता दें कि मीडिया में बयान देने पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई थी. दरअसल इस मुद्दे पर एक एनजीओ ने शीर्ष कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि इस संबंध में मीडिया कवरेज पर रोक लगाई जानी चाहिए. हालांकि कोर्ट ने मीडिया पर किसी भी तरह की पाबंदी से इंकार कर दिया था.

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