मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केसः वकीलों की हड़ताल, आज नहीं आएगा कोर्ट का फैसला

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस में दिल्ली की साकेत कोर्ट 12 दिसंबर को फैसला सुनाएगा. कोर्ट के मुताबिक वकीलों की हड़ताल के चलते आरोपियों को कोर्ट मे नहीं लाया जा सकता, इसलिए आज यानी गुरुवार को फैसले को टाल दिया गया है.

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सांकेतिक तस्वीर (Courtesy- ANI) सांकेतिक तस्वीर (Courtesy- ANI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 10:54 AM IST

  • TISS की रिपोर्ट में बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न का हुआ था खुलासा
  • सुप्रीम कोर्ट ने मामले को बिहार से दिल्ली कर दिया था ट्रांसफर

बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में दिल्ली की साकेत कोर्ट को आज यानी गुरुवार को अपना फैसला सुनाना था लेकिन कोर्ट के मुताबिक वकीलों की हड़ताल के चलते आरोपियों को कोर्ट में नहीं लाया जा सकता, इसलिए फैसले को टाल दिया गया है. कोर्ट ने ब्रजेश ठाकुर समेत 21 आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो कानून, बलात्कार, आपराधिक साजिश समेत अन्य धाराओं में आरोप तय किए हैं. सीबीआई ने इस मामले में ब्रजेश ठाकुर को मुख्य आरोपी बनाया है.

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यह पूरा मामला मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम में 40 नाबालिग बच्चियों और लड़कियों से दुष्कर्म से जुड़ा है. टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज यानी TISS की रिपोर्ट के बाद ये पूरा मामला सामने आया था. इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी. सीबीआई के मुताबिक जिस शेल्टर होम में बच्चियों के साथ दुष्कर्म हुआ है, उसको ब्रजेश ठाकुर चला रहे थे.

ब्रजेश ठाकुर के अलावा मामले में के कर्मचारी और बिहार सरकार के समाज कल्याण के अधिकारी भी आरोपी बनाए गए हैं. जब यह मामला मीडिया की सुर्खियों में आया, तो मामले को सुप्रीम कोर्ट ने 7 फरवरी को बिहार से दिल्ली ट्रांसफर किया था. अब मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस में दिल्ली की साकेत कोर्ट 12 दिसंबर को फैसला सुनाएगी.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने बिहार सरकार को पीड़ितों को मुजावजा देने और उनकी चिकित्सा, शैक्षणिक और वित्तीय मदद करने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 23 फरवरी से ही इस मामले कीमें सुनवाई चल रही थी.

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इस मामले में करीब 7 महीने की नियमित सुनवाई के बाद सितंबर में साकेत कोर्ट ने सुनवाई करके अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. 

लड़कियों और युवतियों ने सुनाई थी आपबीती

में सुनवाई के दौरान मामले की पीड़ित लड़कियों और युवतियों ने अपने बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए थे और दर्दनाक आपबीती सुनाई थी. सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले को दिल्ली की साकेत अदालत में ट्रांसफर करने का मकसद भी यही था कि पीड़ित लड़कियां इस मामले में बिना किसी दबाव के हकीकत बयां कर सकें. कोर्ट के आदेश पर इन लड़कियों को पुलिस सुरक्षा भी दी गई थी.

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