प्रदूषण रोकने के लिए पराली न जलाएं किसान, लेकिन इनकी समस्याएं कौन सुनेगा?

पंजाब और हरियाणा के किसानों का दावा है कि सरकार की ओर से कोई वित्तीय मदद नहीं मिलने के कारण वे धान का पराली जलाने के लिए मजबूर हैं.

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पंजाब के किसान (फोटो-ANI) पंजाब के किसान (फोटो-ANI)

सना जैदी / मनजीत सहगल

  • चंडीगढ़,
  • 15 अक्टूबर 2018,
  • अपडेटेड 12:50 PM IST

देश की राजधानी दिल्ली समेत आस-पास के इलाकों में हवा की क्वालिटी बेहद खराब होने के चलते पराली जलाने वाले पंजाब के किसान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निशाने पर हैं. इस सीजन में अब तक पंजाब में 330 किसानों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा चुके हैं.

पराली जलाने पर किसानों के खिलाफ मामले दर्ज

पड़ोसी राज्य हरियाणा में भी पराली जलाने के आरोपी किसानों पर मामले दर्ज हो रहे हैं. अब तक इस राज्य में 701 किसानों को आरोपी बनाया गया है. पंजाब के किसानों से 2500 रुपये प्रति एकड़ जुर्माना वसूल किया जा रहा है. पहले से ही कर्ज के बोझ के नीचे दबे पंजाब के किसान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सख्ती से ज्यादा तनाव में आ गए हैं.

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धान की पराली जलाने को मजबूर किसान

मोहाली के किसान रतनपाल के मुताबिक एक एकड़ से धान की पराली हटाने का खर्चा कम से कम ₹2000 आता है. अबकी बार उन्होंने जिस खेत को तीन लाख रुपये की लीज पर लिया था, उसमें सिर्फ डेढ़ लाख रुपये की धान की फसल काटी गई है. ऐसे में प्रति एकड़ 2000 रुपये और खर्चा करना उसके बस से बाहर है.

पंजाब के किसान और किसान संघ सरकार से पराली के वैज्ञानिक नियंत्रण के लिए ₹2000 से ₹5000 प्रति एकड़ मुआवजे की मांग कर रहे हैं. लेकिन सरकार ने कोई मुआवजा तय करने के बजाए उल्टा उनसे जुर्माना वसूलने का फैसला किया है.

किसानों के सामने ये बड़ी समस्या

राज्य सरकार हैप्पी सीडर और स्ट्रॉ रीपर जैसी मशीनों की खरीद पर 50 फ़ीसदी सब्सिडी देने का दावा कर रही है, लेकिन ये महंगी मशीनें आम किसान के बूते से बाहर हैं. किसानों का मानना है कि वह पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे हैं और सरकार उनको महंगी मशीनें खरीदने के लिए और कर्जा लेने पर मजबूर कर ही है.

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उधर मौके का फायदा उठाते हुए को नियंत्रित करने वाली मशीन निर्माताओं ने अचानक मशीनों की कीमतें बढ़ा दी हैं. रोटावेटर नाम की मशीन जो पहले ₹85000 में बिक रही थी अब ₹1.30 लाख रुपये में बेची जा रही है.

मशीनें खरीदने में असमर्थ किसान

हालांकि राज्य सरकार द्वारा घोषित की गई सब्सिडी स्कीम का फायदा उठाते हुए कुछ पैसे वाले किसानों ने मशीनें खरीद ली हैं, लेकिन वह गरीब किसानों से 5000 से ₹6000 प्रति एकड़ के हिसाब से दाम वसूल रहे हैं. किसानों द्वारा पराली के वैज्ञानिक नियंत्रण के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मशीनों को न खरीदने का बड़ा कारण आए दिन बढ़ रही तेल की कीमतें भी हैं. तेल की कीमत बढ़ने से पहले से ही कृषि लागत बढ़ गई है, किसान ज्यादा एमएसपी की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार उन पर जुर्माना ठोक रही है. कुछ किसानों ने पराली प्रबंधन की मशीनें खरीदने की कोशिश की लेकिन उनके ट्रैक्टर के इंजन कम शक्ति के हैं जो इन मशीनों को नहीं खींच पाते.

दरअसल, राज्य के किसानों को जलाने से होने वाले नुकसान की जानकारी नहीं है. वह पराली जलाने को सस्ता और समय बचाने वाला तरीका समझते हैं. धान की कटाई के बाद अगली फसल यानी गेहूं और आलू की फसल के लिए सिर्फ 15-20 दिन का समय बचता है. इसलिए किसान समय बचाने के लिए पराली को आग के हवाले कर देते हैं.

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पंजाब में पराली नियंत्रण की मशीनें न खरीदने का बड़ा कारण किसानों की लगातार खराब होती माली हालत भी है. राज्य में किसान कर्ज के बोझ से दबे हैं और हर साल दर्जनों की संख्या में आत्महत्या कर रहे हैं. एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2013 से 2016 के बीच पंजाब के 542 किसानों और खेत मजदूरों ने आत्महत्या की. इनमें से 271 आत्महत्याएं हैं तो सिर्फ वर्ष 2016 में ही की गई थी.

केंद्र सरकार ने पराली के वैज्ञानिक नियंत्रण के लिए पंजाब को 656 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद की घोषणा की है. जब तक मदद किसानों तक पहुंचेगी वह फसल काट चुके होंगे. यानी अबकी बार भी वह पराली जलाकर दिल्ली के लोगों के नाक में दम करने वाले हैं.

प्रदूषण के खिलाफ दिल्ली में इमरजेंसी प्लान

वहीं दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए इमरजेंसी एक्शन प्लान लागू किया जा रहा है. सेंट्रर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) ने कहा कि वायु प्रदूषण को रोकने के लिए सोमवार से आपात कार्य योजना लागू की जाएगी.

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