पंजाब: कैप्टन अमरिंदर ने हटाई बाजवा की सुरक्षा, अब बाजवा ने उठाई नेतृत्व परिवर्तन की मांग

प्रताप सिंह बाजवा का आरोप है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह राज्य में चल रहे खनन, शराब, केबल, ड्रग और ट्रांसपोर्ट माफिया पर नकेल कसने में नाकाम रहे हैं. उनके मुताबिक यही वे मुद्दे थे जिनके बलबूते पर राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी थी. इन मुद्दों को उठाने वाले प्रताप सिंह बाजवा अकेले नेता नहीं हैं.

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कैप्टन अमरिंदर सिंह कैप्टन अमरिंदर सिंह

मनजीत सहगल

  • चंडीगढ़,
  • 09 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 3:55 PM IST

  • अमरिंदर सिंह और बाजवा में छिड़ी वर्चस्व की जंग
  • शराब कांड में बाजवा ने सीबीआई जांच की मांग की

पंजाब में पार्टी की सरकार होते हुए भी कांग्रेस बैकफुट पर है. कारण है राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके धुर विरोधी राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा के बीच छिड़ी वर्चस्व की जंग. दोनों नेताओं के बीच वर्षों से 36 का आंकड़ा रहा है. दोनों राज्य में पार्टी की सरकार बनने के बाद भी गाहे-बगाहे एक दूसरे पर निशाना साधते आए हैं.

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दोनों के बीच ताजा विवाद पंजाब में जहरीली शराब पीने से हुई 120 से ज्यादा मौतों को लेकर है. प्रताप सिंह बाजवा ने कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शराब माफियाओं पर नकेल कसने की बात की थी. लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो बाजवा एक अन्य राज्यसभा सांसद शमशेर सिंह दूलो के साथ मिलकर राज्यपाल से अपनी ही सरकार के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग कर बैठे.

उसके बाद मामला अचानक बिगड़ गया और पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने बाजवा और दूलो को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने की मांग कर दी. जाहिर है जो हरकत इन दोनों नेताओं ने की थी उससे राज्य की कांग्रेस सरकार कठघरे में खड़ी कर दी गई है. विपक्ष जहरीली शराब से हुई मौतों को लेकर पहले ही हमलावर था.

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पंजाब में चल रहे माफिया के मुद्दे उठाए

प्रताप सिंह बाजवा का आरोप है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह राज्य में चल रहे खनन, शराब, केबल, ड्रग और ट्रांसपोर्ट माफिया पर नकेल कसने में नाकाम रहे हैं. उनके मुताबिक यही वे मुद्दे थे जिनके बलबूते पर राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी थी. इन मुद्दों को उठाने वाले प्रताप सिंह बाजवा अकेले नेता नहीं हैं. इससे पहले नवजोत सिंह सिद्धू भी इन माफिया पर कार्रवाई न होने से नाराज होकर सरकार से किनारा कर गए. इन दोनों नेताओं का मानना है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके मातहत माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उनके खिलाफ आवाज उठाने वालों के ही पर कुतर देते हैं.

एक तरफ जहां नवजोत सिंह सिद्धू का विभाग बदल दिया गया, वहीं अब मुख्यमंत्री के खिलाफ आवाज उठाने वाले प्रताप सिंह बाजवा का सुरक्षा कवच वापस ले लिया गया है. हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बाजवा के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन बाजवा अब जमकर भड़ास निकाल रहे हैं. उन्होंने पार्टी हाईकमान से पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर दी है. एक बयान जारी करके बाजवा ने आरोप लगाया है कि उनका सुरक्षा कवर इसलिए हटाया गया, क्योंकि उन्होंने कैप्टन सरकार की नाकामियों की बात की थी.

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क्यों हटाई बाजवा की सुरक्षा

पंजाब सरकार ने प्रताप सिंह बाजवा का सुरक्षा कवर हटाने के बाद सफाई दी है कि सिक्योरिटी ऑडिट में सामने आया कि उनको किसी भी तरह का कोई बड़ा खतरा नहीं है, इसलिए उनकी सुरक्षा हटाई गई. सरकार के मुताबिक गृह मंत्रालय ने मार्च के महीने में पहले ही प्रताप सिंह बाजवा का सुरक्षा कवच वाई कैटेगरी से बढ़ाकर जेड कैटेगरी कर दिया गया. इस वक्त बाजवा की सुरक्षा में 25 सीआईएसएफ सुरक्षा जवान और दो एस्कॉर्ट ड्राइवर तैनात हैं.

पंजाब में बाजवा की सुरक्षा वापस लेने से पहले उनकी सुरक्षा में पंजाब पुलिस के 14 जवान तैनात थे. राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के बाद उनकी सुरक्षा से पहले ही 8 जवान वापस ले लिए गए थे और बाकी के जवान सिक्योरिटी ऑडिट के बाद हटाने का फैसला लिया गया. पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ का आरोप है कि प्रताप सिंह बाजवा एकमात्र ऐसे कांग्रेसी नेता हैं जिन्हें गृह मंत्रालय ने जिनकी सुरक्षा का कवर घटाने के बजाए बढ़ा दिया, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की सुरक्षा हटाई गई है.

पंजाब सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार ने बाजवा को सुरक्षा देने से पहले राज्य सरकार से कोई राय नहीं ली. अमूमन किसी नेता की सुरक्षा बढ़ाने से पहले संबंधित राज्य सरकार के गृह विभाग से सूचना एकत्र की जाती है.

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चुनावों पर कैप्टन और बाजवा की नजर

दरअसल प्रताप सिंह बाजवा सहित दूसरे कैप्टन अमरिंदर सिंह विरोधी मुख्यमंत्री के उस बयान से खार खाए हुए हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस साल 2022 के विधानसभा चुनाव भी उन्हीं की सरपरस्ती में लड़े जाएंगे. इस वक्त कैप्टन अमरिंदर सिंह की उम्र 78 साल है और चुनाव के समय वह 80 वर्ष को पार कर जाएंगे. बाजवा की उम्र 63 साल है और सुनील जाखड़ 66 साल के हैं. उम्र के लिहाज से अब भाजपा की नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है. यही कारण है कि वह पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहे हैं.

दूसरी ओर, एआईसीसी सचिव और पंजाब मामलों की प्रभारी आशा कुमारी ने साफ किया है कि अगर बाजवा के पास कोई शिकायत थी तो उसे पार्टी के स्तर पर ही उठाया जाना चाहिए था. पार्टी प्लेटफार्म से बाहर जाकर उन्होंने न केवल सरकार बल्कि पार्टी विरोधी काम भी किया है. आशा कुमारी ने पंजाब कांग्रेस की तरफ से शिकायत मिलने की पुष्टि नहीं की है. लेकिन उन्होंने साफ किया है कि अगर प्रताप सिंह बाजवा के खिलाफ कोई शिकायत मिलती है तो उसे पार्टी की अनुशासन समिति को भेजा जाएगा.

आशा कुमारी ने एक बार फिर से साफ किया है कि चुनाव किस नेता की सरपरस्ती में लड़े जाएंगे, यह नेता का कद तय करता है और फिलहाल पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह सरीखा कोई भी कद्दावर नेता नहीं है. देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस पार्टी हाईकमान प्रताप सिंह बाजवा और शमशेर सिंह दूलो के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है या फिर पार्टी के दोनों गुटों को शांत करने के लिए मामले को दबा दिया जाता है.

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