अकाल तख्त में पंजाब सरकार की पेशी थी. पंजाब सरकार के वह मंत्री और विधायक सोमवार को अकाल तख्त के सामने पेश हुए, जो सिख समुदाय से आते हैं. अकाल तख्त ने उनसे यह कहा है कि प्रस्तावित बेअदबी कानून को फिलहाल स्थगित रखा जाए. अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने मंत्रियों और विधायकों से कहा कि यह हमारा आदेश है.
उन्होंने मंत्रियों-विधायकों से दो टूक कहा कि आपने ऐसा काम किया है, जो आपके अधिकार क्षेत्र में ही नहीं था. अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने कहा कि आपने (पंजाब सरकार ने) हमारे अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप किया है. जब तक अकाल तख्त की सभी आपत्तियों का समाधान नहीं हो जाता, तब तक प्रस्तावित कानून स्थगित रखा जाए.
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने कहा कि अकाल तख्त की ओर से उठाई गई सभी आपत्तियों का समाधान एक महीने के भीतर किया जाए. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए. सरकार जो भी प्रक्रिया ठीक समझे, उसे अपनाए. ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने मंत्रियों और विधायकों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह अकाल तख्त साहिब का आदेश है.
उन्होंने अकाल तख्त की सभी आपत्तियों का समाधान होने तक बेअदबी से संबंधित यह कानून लागू करने की प्रक्रिया रोकने को कहा. अकाल तख्त साहिब ने पंजाब विधानसभा से पारित श्रीगुरुग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक 2026 में जरूरी संशोधन के लिए एक महीने का समय दिया है. गौरतलब है कि इसे लेकर अकाल तख्त ने सिख समुदाय से आने वाले पंजाब सरकार के सभी मंत्रियों, पक्ष-विपक्ष के सभी विधायकों को तलब किया था.
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अकाल तख्त के तलब करने पर पेश होने पहुंचे सभी मंत्री-विधायक अपने साथ लिखित रूप में स्पष्टीकरण लेकर पहुंचे थे. सभी ने अपने लिखित स्पष्टीकरण पांच सिंह साहिबानों के सामने प्रस्तुत किए. पंजाब सरकार की ओर से विधानसभा की सेलेक्ट कमेटी के अध्यक्ष डॉक्टर इंद्रबीर सिंह निज्जर ने पक्ष रखा. उन्होंने अकाल तख्त साहिब से इस अधिनियम के उन प्रावधानों को स्पष्ट करने की गुजारिश की, जिनमें बदलाव की जरूरत है.
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अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने कहा कि कानून बनाना सरकार का अधिकार है, लेकिन धर्म से जुड़े किसी भी कानून में संशोधन करने या नया प्रावधान जोड़ने के पहले यह जरूरी है कि अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की राय ली जाए. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सिख धर्म से जुड़े मामलों में सरकार को सिख संस्थाओं की राय लेनी चाहिए, उसे प्राथमिकता देनी चाहिए.
असीम बस्सी