बागी बनाम TMC की लड़ाई... पार्टी का संविधान किसका देगा साथ?

पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस में दो नेशनल वर्किंग कमेटी के गठन को लेकर सियासी और कानूनी विवाद गहराता जा रहा है. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे ने चुनाव आयोग को अपनी पुनर्गठित कमेटी की जानकारी दी है.

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TMC की दो नेशनल वर्किंग कमेटी के गठन के बाद पार्टी पर कानूनी हक को लेकर विवाद गहरा गया है TMC की दो नेशनल वर्किंग कमेटी के गठन के बाद पार्टी पर कानूनी हक को लेकर विवाद गहरा गया है

अमित भारद्वाज

  • नई दिल्ली,
  • 23 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:55 PM IST

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे सियासी घमासान ने अब कानूनी लड़ाई का रूप ले लिया है. पिछले तीन दिनों में पार्टी की दो-दो 'नेशनल वर्किंग कमेटी' (NWC) सामने आ चुकी हैं. एक कमेटी में ममता बनर्जी को पार्टी की चेयरपर्सन बताया गया है, जबकि दूसरे बागी गुट की ओर से गठित कमेटी ने ममता को पद से हटाकर अरूप रॉय को नया चेयरपर्सन घोषित कर दिया है. इतना ही नहीं, बागी गुट खुद को अब 'असली TMC' भी बता रहा है.

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लेकिन सवाल यह है कि क्या बागी गुट का यह कदम तृणमूल कांग्रेस के संविधान के अनुसार है? पार्टी के संविधान को देखें तो शुरुआती बढ़त ममता बनर्जी के खेमे को मिलती दिख रही है.

ममता खेमे ने पहले बनाई NWC

सूत्रों के अनुसार, 22 जून की सुबह तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग को अपनी पुनर्गठित नेशनल वर्किंग कमेटी की जानकारी दी. इस 24 सदस्यीय सूची में ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन, डोला सेन, महुआ मोइत्रा और कुणाल घोष जैसे वरिष्ठ नेताओं के नाम शामिल थे. ममता बनर्जी के हस्ताक्षर वाले इस दस्तावेज की तारीख 22 जून है, जबकि इसमें शामिल सदस्यों की सूची 20 जून तक की स्थिति के आधार पर तैयार की गई थी. यानी आधिकारिक तौर पर पार्टी ने चुनाव आयोग को पहले ही अपनी कार्यसमिति की जानकारी दे दी थी.

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उधर, उसी दिन बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक होटल में बैठक हुई, जिसमें नई NWC गठित करने और ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटाने का दावा किया गया. बागी गुट ने अरूप रॉय को नया चेयरपर्सन चुने जाने की घोषणा की और ममता बनर्जी के लिए 'सलाहकार' की भूमिका प्रस्तावित की.

TMC संविधान क्या कहता है?

तृणमूल कांग्रेस का संविधान, जिसकी प्रति चुनाव आयोग के पास जमा है और जिसका नवीनतम संस्करण मार्च 2026 में पार्टी नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा प्रमाणित किया गया था, NWC के गठन की स्पष्ट प्रक्रिया बताता है.

संविधान के अनुच्छेद 12(ए) के अनुसार-

"नेशनल वर्किंग कमेटी में चेयरमैन/चेयरपर्सन सहित कुल 20 सदस्य होंगे. इनमें से 9 सदस्य AITC समिति द्वारा चुने जाएंगे और शेष सदस्यों को चेयरपर्सन नियुक्त करेंगे."
यानी कार्यसमिति के आधे से अधिक सदस्यों की नियुक्ति का अधिकार सीधे चेयरपर्सन के पास है.

इस प्रावधान का मतलब है कि NWC के गठन के लिए पहले पार्टी की राष्ट्रीय समिति की ओर से चुनाव होना जरूरी है. इसके बाद चेयरपर्सन अपने हिस्से के सदस्यों को नामित करते हैं. ममता समर्थकों का सवाल है कि क्या बागी गुट ने 9 सदस्यों के चुनाव की यह प्रक्रिया पूरी की? यदि नहीं, तो उनकी कार्यसमिति का गठन ही संविधान सम्मत नहीं माना जाएगा.

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विधायक और सांसद अपने आप बनते हैं सदस्य

संविधान में यह भी स्पष्ट है कि संसद और विभिन्न राज्यों की विधायक दलों के नेता NWC के पदेन (Ex-officio) सदस्य होते हैं और उन्हें मतदान का अधिकार भी प्राप्त होता है. इसके अलावा पार्टी का कोषाध्यक्ष, महासचिव और कई महत्वपूर्ण पद भी चेयरपर्सन की सिफारिश पर तय होते हैं. यही वजह है कि NWC केवल संगठनात्मक इकाई नहीं, बल्कि पार्टी की संपत्तियों, ट्रस्टों और वित्तीय ढांचे पर भी प्रभाव रखती है.

चेयरपर्सन के पास कितनी ताकत?

तृणमूल कांग्रेस का संविधान चेयरपर्सन के पद को बहुत शक्तिशाली बनाता है. पार्टी की विभिन्न समितियों, प्रकोष्ठों और संगठनात्मक इकाइयों के गठन, पुनर्गठन और भंग करने का अधिकार काफी हद तक चेयरपर्सन के पास है. यही कारण है कि बागी गुट की ओर से ममता बनर्जी को हटाने का दावा केवल राजनीतिक नहीं बल्कि कानूनी विवाद का भी विषय बन गया है.

TMC का चेयरपर्सन कैसे चुना जाता है?

पार्टी संविधान के अनुसार चेयरपर्सन का चुनाव हर पांच साल में होता है. ममता बनर्जी 2012, 2017 और 2022 में लगातार तीन बार पार्टी की चेयरपर्सन चुनी जा चुकी हैं. उनका वर्तमान कार्यकाल 2027 तक है और अगला चुनाव उसी वर्ष होना है. संविधान के मुताबिक चेयरपर्सन का चुनाव पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों और डेलीगेट्स से बने इलेक्टोरल कॉलेज द्वारा किया जाता है.

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दस्तावेज में साफ लिखा है कि "विभिन्न राज्यों से चुने गए प्रतिनिधि मिलकर इलेक्टोरल कॉलेज बनाएंगे और वही पार्टी के चेयरमैन या चेयरपर्सन का चुनाव करेंगे." अगर चुनाव होता है तो मतदान गुप्त मतपत्र (Secret Ballot) के जरिए कराया जाता है.

सवाल है कि क्या बीच कार्यकाल में चेयरपर्सन हटाया जा सकता है? यहीं पर बागी गुट की दावेदारी सबसे कमजोर नजर आती है. ममता खेमे के नेताओं का कहना है कि यदि चेयरपर्सन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना भी हो, तो इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है. एक वरिष्ठ तृणमूल नेता ने दावा किया कि चेयरपर्सन को पहले नोटिस देना होगा, डेलीगेट्स की बैठक बुलानी होगी और फिर तय प्रक्रिया के तहत मतदान कराना होगा. उनका सवाल है, 'जब पार्टी के डेलीगेट्स को ही नहीं बुलाया गया, तब चेयरपर्सन को हटाने की प्रक्रिया कैसे शुरू हो सकती है?'

डेलीगेट्स की संख्या बनी अहम
ममता बनर्जी खेमे का सबसे बड़ा तर्क यह है कि पार्टी में असली शक्ति विधायकों और सांसदों की संख्या से नहीं, बल्कि डेलीगेट्स से तय होती है. एक सांसद ने कहा कि जब अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी ने दो-तिहाई समर्थन की बात कही थी, तो उसका मतलब केवल विधायक या सांसद नहीं थे, बल्कि पूरी पार्टी के डेलीगेट्स थे. उनके अनुसार 2022 में लगभग 1000 डेलीगेट्स ने ममता बनर्जी को फिर से चेयरपर्सन चुना था और बागी गुट के कई नेता स्वयं डेलीगेट भी नहीं हैं.

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कानूनी लड़ाई में किसका पलड़ा भारी?
राजनीतिक लड़ाई अपनी जगह है, लेकिन यदि मामला चुनाव आयोग या अदालत तक पहुंचता है तो पार्टी का संविधान सबसे अहम दस्तावेज साबित होगा. अब तक उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ममता बनर्जी खेमा यह दावा कर रहा है कि, 'NWC गठन की संवैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ. चेयरपर्सन को हटाने के लिए जरूरी नोटिस नहीं दिया गया. डेलीगेट्स की बैठक नहीं बुलाई गई. इलेक्टोरल कॉलेज की मंजूरी नहीं ली गई. बागी गुट के कई नेता निर्णय लेने के अधिकृत प्रतिनिधि नहीं हैं. ऐसे में 'असली TMC' की लड़ाई केवल राजनीतिक समर्थन पर नहीं, बल्कि पार्टी संविधान की व्याख्या पर भी निर्भर करेगी.

फिलहाल बागी गुट अरूप रॉय के नेतृत्व में खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बता रहा है, लेकिन पार्टी का संविधान ममता बनर्जी के पक्ष में एक मजबूत कानूनी ढाल बनता दिखाई दे रहा है. अगर बागी गुट के पास डेलीगेट्स का व्यापक समर्थन नहीं है, तो अदालत और चुनाव आयोग के सामने उनकी राह आसान नहीं होगी. आने वाले दिनों में यह लड़ाई पार्टी, चुनाव चिह्न और करोड़ों रुपये की संपत्तियों तक पहुंच सकती है, लेकिन शुरुआती कानूनी बढ़त फिलहाल ममता बनर्जी के पास नजर आती है.

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