तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस और डीएमके बीच ऑल आउट वॉर शुरू चल रहा है. डीएमके ने कांग्रेस को 'पीठ में छूरा घोंपना वाला', 'नासमझ' और गलत तरीका का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे आने तक कांग्रेस और डीएमके की सियासी दोस्ती मिसालें पेश करने लायक थीं. लेकिन विधानसभा चुनाव में डीएमके की हार ने सारे समीकरण को उलट-पुलट दिया है.
DMK ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने विधानसभा चुनावों में INDIA ब्लॉक के सहयोगियों को जीतने से रोकने के लिए "गलत तरीके" अपनाए, ताकि लोकसभा चुनावों में उनका समर्थन हासिल किया जा सके. पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी के कहने पर ही कांग्रेस ने हाल ही में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में पार्टी के साथ "धोखाधड़ी" की, जिसके कारण उनका दशकों पुराना गठबंधन टूट गया.
अपने आधिकारिक मुखपत्र 'मुरासोली' के एक संपादकीय में DMK ने हाल ही में हुई INDIA ब्लॉक की बैठक में एकता की बात करने के लिए राहुल गांधी का मज़ाक उड़ाया और इसे "देर से आई समझ" का मामला बताया.
राहुल ने विपक्षी एकता को नुकसान पहुंचाया
मुरासोली में लिखा गया है कि क्या राहुल गांधी ही वह व्यक्ति नहीं हैं जिन्होंने हर राज्य में विपक्ष की एकता को नुकसान पहुंचाया है. इसमें यह भी कहा गया कि वामपंथी दलों, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल ने उनकी कड़ी आलोचना की है और कहा है कि उनके व्यवहार से विपक्ष की एकजुटता कमज़ोर हुई है.
राहुल की सहमति से पीठ घोंपा में छुरा
इसमें आरोप लगाया गया कि गठबंधन में रहते हुए भी कांग्रेस द्वारा DMK के साथ "पीठ में छुरा घोंपने" जैसा काम राहुल गांधी की सहमति से हुआ.
अखबार ने राहुल गांधी के उस भरोसे का ज़िक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें DMK पर "100 प्रतिशत" यकीन है और वे उसकी गारंटी ले सकते हैं.
'मुरासोली' ने फिर पूछा कि क्या कांग्रेस के लिए यह शर्मनाक नहीं है कि वह राज्य चुनावों में INDIA गठबंधन के सहयोगियों के खिलाफ काम करे और फिर लोकसभा चुनावों में उनसे समर्थन मांगे? इसमें यह भी दावा किया गया कि DMK के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया उसे लेकर अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, उमर अब्दुल्ला, NCP और VCK सभी ने कांग्रेस पर आरोप लगाए थे, और राहुल गांधी को ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी.
संपादकीय में कहा गया कि BJP का विरोध करने के लिए बुलाई गई बैठक में BJP-विरोधी भावना के बजाय कांग्रेस-विरोधी भावना ज़्यादा हावी रही, जिसकी वजह राहुल गांधी की "नासमझी और ईमानदारी की कमी" थी, और उन्हें इसकी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए.
संपादकीय में कहा गया कि INDIA गठबंधन की बैठक में CPI(M) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास की बातें खास तौर पर अहम थीं. केरल का ज़िक्र करते हुए इसमें कहा गया कि राज्य की दो प्रभावशाली पार्टियों-कांग्रेस और CPI(M) ने अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी और उस सीधी टक्कर पर किसी ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी.
अखबार ने राहुल गांधी के उस आरोप को बेतुका बताया जो उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान लगाया था, "पीएम मोदी ने पिनराई विजयन को गिरफ़्तार क्यों नहीं किया? दोनों के बीच कोई गुप्त समझौता है." DMK के अखबार के अनुसार CPI(M) ने इसे एक गंभीर आरोप माना.
"लेफ्ट अब लेफ्ट नहीं रहा"
संपादकीय में CPI के जनरल सेक्रेटरी डी. राजा की उस प्रतिक्रिया का भी जिक्र किया गया जिसमें उन्होंने राहुल गांधी के इस बयान को कि "लेफ्ट अब लेफ्ट नहीं रहा", राजनीतिक अपरिपक्वता का संकेत बताया था. इसमें यह भी कहा गया कि जहां राहुल ने तथ्यों के आधार पर अपनी बात कही और तर्क दिया कि लेफ्ट सरकार ही अडानी को केरल लाई थी, वहीं लेफ्ट पार्टियों ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि असल में कांग्रेस ही इस ग्रुप को राज्य में लाई थी.
DMK के मुखपत्र ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के हवाले से यह भी कहा कि INDIA गठबंधन से DMK और AAP का बाहर निकलना एक बड़ा झटका है.
कांग्रेस के DMK के नेतृत्व वाले गठबंधन को छोड़कर सत्ताधारी TVK में शामिल होने के घटनाक्रम पर 'मुरासोली' ने लिखा है कि तमिलनाडु में क्या हुआ, यह सब जानते हैं.
अनघा