प्रधानमंत्री आवास के सामने कांग्रेस का धरना प्रदर्शन जारी है. राहुल गांधी-प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई कांग्रेसी नेता धरने पर हैं. इस प्रदर्शन के बीच केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह धरना स्थल पर पहुंचे और उन्होंने राहुल गांधी से बातचीत की. इस दौरान उन्हें मनाकर प्रदर्शन रोकने की कोशिश की गई. केंद्र मंत्री से इस बातचीत के दौरान कांग्रेस ने उनसे पांच मांगे रखी हैं.
पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है. साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर बयान दें. वहीं कांग्रेस ने इस पूरे मामले पर संसद में विस्तृत चर्चा कराने, छात्रों से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से सुने जाने और प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की. इन मांगों को सुनने के बाद केंद्रीय मंत्री वापस चले गए. सामने आया है कि वह अब गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करने जा रहे हैं. उधर पीएम आवास के सामने कांग्रेस का प्रदर्शन जारी है. यहां से लगातार 'इस्तीफा दो' के नारे लग रहे हैं.
क्या है कांग्रेस की पांच मांगें?
1. शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
2. गृहमंत्री का दोनों सदनों में बयान
3. सदन में इस मामले की विस्तृत चर्चा
4. छात्रों के मुद्दे को सुना जाए
5. प्रदर्शन के दौरान हिंसा की निष्पक्ष जांच
राहुल गांधी ने धरना स्थल से की देशवासियों से अपील
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों के समर्थन में लोगों से प्रधानमंत्री आवास के सामने चल रहे धरने में शामिल होने की अपील की है. उन्होंने कहा कि छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है और उनकी आवाज़ को अनदेखा नहीं किया जा सकता. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा, "छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है. प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि वे बिना जवाब दिए और बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा."
उन्होंने आगे कहा, "मैं हर उस देशभक्त भारतीय से अपील करता हूं, जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए, वह प्रधानमंत्री आवास के सामने हमारे धरने में शामिल हो. भारत के छात्रों की आवाज़ को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता." राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब छात्रों पर हुई कथित कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च और धरना-प्रदर्शन कर रही है. पार्टी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाबदेही तय करने और कार्रवाई की मांग कर रही है.
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