12 घंटे सर्जरी, डॉक्टरों की टीम; महिला को लगाए ब्रेन डेड शख्स के दोनों हाथ, ऐसे हुआ चमत्कार

Organ Donation Success Story: दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में एक महिला की जिंदगी बदल देने वाली सर्जरी की गई है. दोनों हाथ गंवा चुकी दो बच्चों की मां का सफल हाथ ट्रांसप्लांट हुआ है. यह संभव हुआ एक ब्रेन-डेड व्यक्ति के परिवार की मदद से, जिन्होंने उसके हाथ दान करने की अनुमति दी.

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महिला के दोनों हाथ चारा काटने वाली मशीन में कट गए थे. (Representational Image: courtesy Pixabay) महिला के दोनों हाथ चारा काटने वाली मशीन में कट गए थे. (Representational Image: courtesy Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:27 PM IST

दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में एक ऐसी सर्जरी हुई है, जिसने एक महिला की जिंदगी बदल दी. दो बच्चों की मां जिसने एक हादसे में अपने दोनों हाथ खो दिए थे, अब फिर से सामान्य जीवन की ओर लौटने की उम्मीद कर रही है. अस्पताल के डॉक्टरों ने उसका सफलतापूर्वक दोनों हाथों का ट्रांसप्लांट किया है.

जानकारी के मुताबिक, महिला के दोनों हाथ चारा काटने वाली मशीन में कट गए थे. इस हादसे के बाद वह अपने रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम भी खुद नहीं कर पाती थी. खाना खाना, कपड़े पहनना, बच्चों की देखभाल करना, हर काम के लिए उसे दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था. ऐसे में हाथों का ट्रांसप्लांट उसके लिए नई जिंदगी जैसा साबित हुआ.

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ब्रेन-डेड व्यक्ति था डोनर
यह सर्जरी तब संभव हो सकी जब एक ब्रेन-डेड व्यक्ति के परिवार ने उसके हाथ दान करने की सहमति दी. उनके इस फैसले ने एक जरूरतमंद महिला को फिर से जीने का मौका दिया. अस्पताल ने इस परिवार के प्रति आभार जताया और इसे इंसानियत की मिसाल बताया.

12 घंटे तक चली सर्जरी
डॉक्टरों के अनुसार, यह सर्जरी करीब 12 घंटे तक चली. इसमें डोनर के दोनों हाथ महिला के शरीर से जोड़े गए. दाहिना हाथ कोहनी के ऊपर से और बायां हाथ कलाई के पास से जोड़ा गया. डॉक्टरों ने हड्डियां, नसें, मांसपेशियां, खून की नलियां और टेंडन बहुत सावधानी से जोड़े, ताकि हाथों में फिर से ब्लड सर्कुलेशन और हरकत आ सके.

अस्पताल के विशेषज्ञों ने बताया कि यह बेहद कठिन और संवेदनशील प्रक्रिया होती है, जिसमें हर मिनट की अहमियत होती है. अगर समय पर सही तरीके से काम न हो, तो ट्रांसप्लांट किए गए अंग को बचाना मुश्किल हो सकता है.

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डॉक्टरों का कहना है कि सर्जरी सफल होने के बाद भी असली सफर अब शुरू हुआ है. महिला को लंबे समय तक दवाएं लेनी होंगी ताकि शरीर नए हाथों को स्वीकार कर सके. इसके साथ ही उसे नियमित फिजियोथेरेपी और अभ्यास की जरूरत होगी, जिससे वह धीरे-धीरे हाथों का इस्तेमाल सीख सके. 

यह अस्पताल में किया गया दूसरा ऐसा ट्रांसप्लांट है. इस पूरी प्रक्रिया में प्लास्टिक सर्जरी, हड्डी रोग, एनेस्थीसिया, न्यूरोलॉजी, फिजियोथेरेपी और कई अन्य विभागों के डॉक्टर शामिल थे.

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