UPI से पेमेंट करने वालों के बीच पिछले कुछ दिनों से एक सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा था, क्या अब हर ट्रांजेक्शन पर पैसे देने होंगे? सरकार ने शनिवार को इस भ्रम पर पूरी तरह विराम लगा दिया. साफ कहा गया कि आम लोगों के लिए UPI पहले की तरह मुफ्त रहेगा. यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजे जाने वाले किसी भी UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगेगा. इतना ही नहीं, ज्यादातर दुकानों और कारोबारियों को किए जाने वाले UPI भुगतान भी बिना किसी शुल्क के जारी रहेंगे.
यह सफाई पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A में प्रस्तावित संशोधन के बाद आई है. इस बदलाव को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें चल रही थीं. कई लोगों को लगने लगा था कि सरकार अब UPI पर शुल्क लगाने जा रही है. सरकार ने कहा कि ऐसा नहीं है. कानून में किया गया बदलाव सिर्फ भविष्य के लिए एक व्यवस्था बनाने का प्रावधान (Enabling Provision) है. इसका मतलब यह नहीं है कि UPI पर तुरंत MDR लागू हो जाएगा.
तो फिर MDR कब लग सकता है?
एजेंसी के मुताबिक, सरकार का कहना है कि अगर भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का फैसला होता भी है, तो वह हर ट्रांजेक्शन पर नहीं लगेगा. यह केवल तय सीमा से ऊपर के कुछ मर्चेंट ट्रांजेक्शन तक सीमित रहेगा. इसकी दर भी डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले MDR से काफी कम होगी.
सरकार ने यह भी साफ किया कि संसद से टैक्स संशोधन बिल (Taxation and Other Laws Amendment Bill, 2026) पास होने के बाद NPCI की कमेटी ही इस पर आखिरी फैसला लेगी.
सरकार ने क्यों किया यह बदलाव?
सरकार का कहना है कि UPI का दायरा तेजी से बढ़ रहा है. हर महीने रिकॉर्ड संख्या में ट्रांजेक्शन हो रहे हैं. ऐसे में केवल सरकारी सब्सिडी के भरोसे सिस्टम को आगे नहीं चलाया जा सकता. नेटवर्क को आत्मनिर्भर बनाने, नई कंपनियों को बढ़ावा देने, साइबर सुरक्षा और फ्रॉड रोकने के लिए लगातार निवेश की जरूरत है. इसी वजह से कानून में यह प्रावधान जोड़ा गया है, ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर टिकाऊ व्यवस्था बनाई जा सके.
सरकार का मकसद UPI को मजबूत बनाना है, न कि आम लोगों पर नया बोझ डालना. साथ ही ग्रामीण और छोटे शहरों तक इसकी पहुंच बढ़ाने के लिए भी मजबूत वित्तीय मॉडल जरूरी है.
विदेशी दबाव की बातें पूरी तरह भ्रामक
सरकार ने उन दावों को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि किसी बाहरी या विदेशी दबाव में आकर यह फैसला लिया गया है. सरकार ने कहा कि यह दावा पूरी तरह गलत है. अगर ऐसा कोई दबाव होता तो सरकार जनवरी 2020 से UPI को बिल्कुल फ्री न रखती. यह भारत का अपना इनोवेशन है और आम जनता के लिए आगे भी पूरी तरह फ्री रहेगा..
रिपोर्ट के मुताबिक, 2016-17 में शुरू हुआ UPI आज दुनिया का सबसे बड़ा रियल टाइम पेमेंट सिस्टम बन चुका है. सिर्फ जुलाई 2026 में इसके जरिए 2,366 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए, जिनकी कुल कीमत 29.9 लाख करोड़ रुपये रही. UPI अब 11 देशों तक पहुंच चुका है और कई अन्य देश भी इसे अपनाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं.
फिलहाल, सरकार ने लोगों से अपील की है कि UPI को लेकर फैल रही अफवाहों पर भरोसा न करें. किसी भी जानकारी के लिए केवल वित्त मंत्रालय, RBI और NPCI के आधिकारिक बयान को ही सही माना जाए.
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