देश के सबसे महत्वपूर्ण रक्षा प्रोजेक्ट्स में से एक, तेजस विमान योजना को बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी कंपनी GE की तरफ से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को मिले छठे इंजन में तकनीकी खराबी पाई गई है. इस नई रुकावट के कारण फाइटर जेट की डिलीवरी में और देरी होने की आशंका गहरा गई है. समय पर लड़ाकू विमान न मिलने से नाराज रक्षा मंत्रालय अब HAL पर भारी जुर्माना या कानूनी कार्रवाई करने की सोच रहा है. वायुसेना में विमानों की घटती संख्या को देखते हुए मंत्रालय जल्द से जल्द इन फाइटर जेट्स को बेड़े में शामिल करना चाहता है.
सूत्रों के मुताबिक खराबी की चपेट में आया यह छठा इंजन इसी साल मई में भारत पहुंचा था. जब इसके जरूरी क्वालिटी चेक किए जा रहे थे, तभी यह बड़ी तकनीकी दिक्कत सामने आई. इसके बाद HAL ने अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस के सामने इस गंभीर मुद्दे को आधिकारिक तौर पर उठाया है. खराबी को ठीक करने के लिए अब अमेरिकी कंपनी के इंजीनियर जल्द ही भारत आकर इस इंजन की बारीकी से जांच करेंगे.
डिलीवरी में देरी पर रक्षा मंत्रालय सख्त
जांच के बाद अगर यह तकनीकी खराबी भारत में ठीक होने लायक निकली, तो यहीं रिपेयरिंग का काम पूरा किया जाएगा. ऐसा न होने पर अमेरिकी कंपनी को इस इंजन के बदले दूसरा नया इंजन देना होगा. इन सब प्रक्रियाओं के बीच अगला यानी सातवां इंजन अगले महीने तक मिलने की उम्मीद है. दोनों कंपनियों के बीच साल 2021 में करीब 5,375 करोड़ रुपये का सौदा हुआ था, जिसके तहत 99 F404-IN20 इंजन की सप्लाई होनी है.
इंजन डिलीवरी में हो रही लगातार देरी ने वायुसेना की चिंताएं बढ़ा दी हैं. विमानों के समय पर न बनने से प्रोजेक्ट का पूरा शेड्यूल बुरी तरह बिगड़ चुका है. रक्षा मंत्रालय ने HAL को साफ संदेश दे दिया है कि कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के मुताबिक उन पर वित्तीय जुर्माना लगाया जा सकता है. फिलहाल HAL जुर्माने से जुड़ी जरूरी डिटेल्स मिलने का इंतजार कर रहा है. वह वायुसेना की तरफ से बताए गए जरूरी बदलावों को विमान में शामिल करने में जुटा है. अगर वायुसेना संशोधनों से संतुष्ट रहती है, तो साल 2026 के अंत तक तेजस Mk1A के पहले पांच लड़ाकू विमान सौंपे जा सकते हैं.
शिवानी शर्मा