जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में रुचिका सिंह के खिलाफ दर्ज जीरो एफआईआर का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. इस मामले में अब सौरव दास खुलकर रुचिका सिंह के समर्थन में उतर आए हैं. उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि 25 साल की एक युवती के खिलाफ आपराधिक कानूनों का इस्तेमाल पूरी तरह अस्वीकार्य है.
सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि रुचिका सिंह के खिलाफ आपराधिक कानूनों का इस्तेमाल पूरी तरह अस्वीकार्य है. अभद्र भाषा (Profanity) अपने आप में किसी आपराधिक मुकदमे का आधार नहीं बनती. लोकसभा के लगभग 50 प्रतिशत सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें करीब 100 सांसद भाजपा के हैं. पुलिस को अपनी ऊर्जा उनके मामलों पर लगानी चाहिए, न कि 25 साल की एक युवती के पीछे. युवाओं का उत्पीड़न तुरंत बंद होना चाहिए.
जंतर-मंतर के प्रदर्शन से शुरू हुआ पूरा विवाद
पूरा मामला 23 जुलाई 2026 का है. उस दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में बड़ी संख्या में छात्र और युवा प्रदर्शन कर रहे थे. इसी प्रदर्शन के दौरान रुचिका सिंह नाम की युवती का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी करती दिखाई दी. वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद इस पर कानूनी कार्रवाई की मांग उठने लगी. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि युवती द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा के खिलाफ है और इससे समाज में वैमनस्य फैलने तथा सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका पैदा होती है.
नोएडा में दर्ज हुई जीरो एफआईआर, दिल्ली भेजा गया मामला
शिकायत के आधार पर 29 जुलाई 2026 को गौतमबुद्ध नगर के एक्सप्रेसवे थाने में रुचिका सिंह के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की गई. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत मामला दर्ज किया. चूंकि घटना दिल्ली के संसद मार्ग थाना क्षेत्र में हुई थी, इसलिए जीरो एफआईआर दर्ज करने के बाद पूरा मामला आगे की जांच के लिए संसद मार्ग थाने को भेज दिया गया. अब इसी मामले की जांच दिल्ली पुलिस करेगी और उपलब्ध वीडियो, शिकायत तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी.
एफआईआर में क्या कहा गया
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे देश के प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची. शिकायत में यह भी कहा गया कि ऐसी टिप्पणी से लोगों के बीच दुर्भावना फैल सकती है और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है. इन्हीं आरोपों के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया.
अब सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस
रुचिका सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर के बाद अब मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक विरोध और कानून के इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है. सौरव दास की टिप्पणी ने इस बहस को और तेज कर दिया है. एक पक्ष का कहना है कि प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद के खिलाफ कथित आपत्तिजनक भाषा पर कार्रवाई जरूरी है, जबकि दूसरा पक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के अनुपातिक इस्तेमाल का मुद्दा बता रहा है. फिलहाल मामला संसद मार्ग थाने में जांच के अधीन है. जांच पूरी होने के बाद पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी. वहीं, सौरव दास की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला सोशल मीडिया से निकलकर राजनीतिक बहस का भी हिस्सा बन गया है.
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