दर्शन ने रेणुकास्वामी पर बेरहमी से किया हमला, प्राइवेट पार्ट पर मारी लात, आरोपी प्रदोष ने किया खुलासा

रेणुकास्वामी हत्याकांड में आरोपी प्रदोष की कोर्ट में दाखिल अर्जी से सनसनीखेज खुलासा हुआ है. अर्जी के मुताबिक, कन्नड़ अभिनेता दर्शन और उनके साथियों ने रेणुकास्वामी को अमानवीय यातनाएं दीं और हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए पैसों व झूठी कहानियों का सहारा लिया.

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रेणुकास्वामी मर्डर केस में आया बड़ा ट्विस्ट. (File photo: ITG) रेणुकास्वामी मर्डर केस में आया बड़ा ट्विस्ट. (File photo: ITG)

सगाय राज

  • नई दिल्ली,
  • 10 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:24 AM IST

रेणुकास्वामी मर्डर केस में आरोपी नंबर 14 प्रदोष ने कोर्ट में एक अर्जी दाखिल की है. इसमें रेणुकास्वामी पर हुए कथित हमले और उसके बाद अपराध को छिपाने की कोशिशों के बारे में विस्तार से आरोप लगाए गए हैं. ये आरोप प्रदोष की उस अर्जी का हिस्सा हैं, जिसमें उसने CrPC की धारा 307 के तहत माफी (अप्रूवर बनने) की मांग की है. जबकि कोर्ट ने सभी पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

इंडिया टुडे/आजतक के हाथ वो अर्ज़ी लग गई है, जिसे कोर्ट में पेश किया गया था. इसमें अभिनेता दर्शन, पवित्रा गौड़ा और कई अन्य आरोपियों से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल केस में प्रदोष ने 'अप्रूवर' का दर्जा मांगा है.

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रेणुकास्वामी के साथ बर्बरता

प्रदोष की अर्ज़ी के मुताबिक, दर्शन ने कथित तौर पर रेणुकास्वामी से पवित्रा गौड़ा को भेजे गए मैसेज के बारे में सवाल-जवाब किए और उसके साथ गाली-गलौज व मारपीट की. प्रदोष का दावा है कि हमले के दौरान रेणुकास्वामी के सिर से खून बहता देखा गया था. अर्जी में ये भी आरोप लगाया गया है कि पवित्रा गौड़ा से पीड़ित का सामना करने और उसे अपनी चप्पल से मारने के लिए कहा गया था.

अर्जी में कहा गया है कि इसके बाद रेणुकास्वामी के कपड़े उतारकर उसे सिर्फ अंडरवियर में छोड़ दिया गया और फिर दूसरे आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की. नंदिश, पवन और नागराज ने कथित तौर पर लकड़ी की लाठियों और नायलॉन की रस्सी से उसे पीटा. प्रदोष का आरोप है कि नंदिश ने रेणुकास्वामी को टाटा ऐस गाड़ी से लटकाने की कोशिश की, जबकि नागराज नायलॉन की रस्सी से उसे मारता रहा और बाकी लोगों ने लकड़ी की लाठियों का इस्तेमाल किया.

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प्राइवेट पार्ट पर किया वार

अर्जी में आगे आरोप लगाया गया है कि दर्शन ने नायलॉन की रस्सी ली और रेणुकास्वामी के हाथों और पीठ पर कई बार वार किए, जबकि पीड़ित के मोबाइल फोन से मैसेज जोर-जोर से पढ़े जा रहे थे. अर्जी के मुताबिक, एक और मौके पर रेणुकास्वामी के सारे कपड़े उतार दिए गए और दर्शन ने कथित तौर पर उसके प्राइवेट पार्ट्स पर बार-बार लात मारी.

प्रदोष का दावा है कि उसने एक से ज्यादा बार बीच-बचाव किया और चेतावनी दी कि लगातार मारपीट जानलेवा साबित हो सकती है. खाना-पानी दिए जाने के बाद भी अर्जी में आरोप है कि दर्शन ने रेणुकास्वामी की गर्दन और छाती पर लात मारी, जिससे वह गिर पड़ा.

अर्ज़ी में ये भी दावा किया गया है कि दर्शन पीड़ित की छाती पर दोनों पैरों से खड़ा हो गया और ज़ोर से दबाया, जिसके बाद प्रदोष ने फिर से बीच-बचाव किया और उसे दूर हटाया.

हत्या को छिपाने के लिए गढ़ी कहानी

अर्जी में रेणुकास्वामी की मौत के बाद अपराध को छिपाने की कथित कोशिश का भी ब्योरा दिया गया है. प्रदोष का दावा है कि रेणुकास्वामी की मौत के बाद दर्शन ने कथित तौर पर धमकी दी कि यदि मदद नहीं की गई तो वह खुद को गोली मार लेंगे. इसके बाद पुलिस को गुमराह करने के लिए एक फर्जी कहानी गढ़ी गई. दर्शन ने नकद रुपयों का बैग लाकर नागराज को ₹5 लाख और विनय को ₹10 लाख दिए. प्लान के तहत राघवेंद्र, कार्तिक और निखिल को पैसों के बदले सरेंडर करने के लिए तैयार किया गया ताकि केस को पैसों के विवाद का रूप दिया जा सके.

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जमानत का दिया भरोसा

याचिका में ये भी आरोप लगाया गया है कि सरेंडर करने वाले आरोपियों को जमानत का भरोसा दिया गया और शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की गई. एप्लीकेशन के अनुसार, सुमनहल्ली के पास एक जगह चुनी गई; एक अन्य ड्राइवर के मदद करने से इनकार करने के बाद रेणुकास्वामी के शव को सफेद स्कॉर्पियो में अपराध स्थल से ले जाया गया और गाड़ी की आगे और पीछे की नंबर प्लेट हटा दी गईं. शव को कथित तौर पर सुमनहल्ली के पास एक नाले में फेंक दिया गया, ताकि ये दिखाया जा सके कि घटना कहीं और हुई थी.

आरोपी ने मांगी माफी

प्रदोष ने माफी मांगते हुए कोर्ट को बताया कि वह मर्डर और अन्य आरोपियों की भूमिका के बारे में अपनी जानकारी के सभी तथ्यों का पूरा और सच-सच खुलासा करने के लिए तैयार है. उसका तर्क है कि घटना के गवाह के तौर पर उसकी गवाही अभियोजन पक्ष के मामले में एक अहम कड़ी बन सकती है.

जानकारी के अनुसार, प्रदोष पहला आरोपी था. जिसने हत्या से जुड़ी परिस्थितियों का पूरा और सच-सच खुलासा करने के बदले कानून के तहत माफी के लिए कोर्ट में अर्जी दी. इसके तुरंत बाद आरोपी नंबर 8 और 10- रवि शंकर और विनय  ने भी सरकारी गवाह बनने के लिए अर्जियां दाखिल कीं.

प्रदोष ने अदालत से अपनी सुरक्षा की गुहार लगाते हुए जेल में अलग बैरक में रखने और अलग पेशी की मांग की है. उन्होंने कहा कि सह-आरोपियों के साथ बैरक शेयर करने से उन पर दबाव डाला जा सकता है या उन्हें डराया-धमकाया जा सकता है. उन्होंने भविष्य की सुनवाई के दौरान अदालत में अलग से पेश किए जाने की भी मांग की.

उधर, अभियोजन पक्ष की चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि प्रदोष को दर्शन से 30 लाख रुपये मिले थे और उन्होंने अन्य आरोपियों के सरेंडर (आत्मसमर्पण) में अहम भूमिका निभाई थी. जांचकर्ताओं का दावा है कि वह पट्टानागेरे शेड में मौजूद थे, जहां रेणुकास्वामी को कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया था. उन्होंने दर्शन को पीड़ित की मौत की जानकारी दी, सह-आरोपी पवित्रा गौड़ा को शेड तक लाए और कथित साजिश में शामिल रहे. उन पर हत्या, सबूत मिटाने और सामूहिक आपराधिक दायित्व वाले अपराधों के आरोप लगाए गए हैं.

जांच में ये भी आरोप लगाया गया है कि मारपीट के दौरान प्रदोष वहां मौजूद थे और उन्होंने दर्शन से रेणुकास्वामी पर हमला रोकने की अपील की थी. अगर उन्हें 'अप्रूवर' (सरकारी गवाह) का दर्जा मिल जाता है, तो उनकी गवाही अभियोजन पक्ष के मामले का अहम हिस्सा बन सकती है, क्योंकि रेणुकास्वामी की मौत से जुड़ी घटनाओं में उनकी भूमिका कथित तौर पर एक चश्मदीद और एक भागीदार दोनों की रही है.

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कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

अभियोजन पक्ष ने 'अप्रूवर' का दर्जा पाने के प्रदोष के अनुरोध का समर्थन किया है, लेकिन इसके लिए पूरी और सच्ची जानकारी देने की शर्तें रखी हैं. वहीं, 59वीं सेशंस कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस अर्ज़ी पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है.

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