सपा के राज्यसभा सांसद राम गोपाल यादव ने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के आमरण अनशन खत्म करने की शर्तों और पीएम मोदी के इस मामले के लिए फस्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के ऐलान पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि लाखों युवाओं का भविष्य तो बर्बाद हो गया.
दरअसल, एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने वीडियो जारी कर कहा है कि यदि सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों पर बल प्रयोग न करने और एफआईआर या कानूनी कार्रवाई न करने का लिखित भरोसा दे दे तो वह अनशन खत्म कर देंगे. इस पर रामगोपाल यादव ने कहा कि वांगचुक की बात बिल्कुल सही है. सबकी यही मांग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत इस्तीफा दें और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए.
दूसरी ओर जब राम गोपाल से पीएम द्वारा इस मामले में दोषियों को जल्द और कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के ऐलान और सरकार के सदन में पेपर लीक पर चर्चा के लिए तैयार की बातें कहने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सरकार चर्चा के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है. सरकार सारे देश को गुमराह कर रही है. सारा देश देख रहा है कि आप भी देख रहे होंगे की पार्लियामेंट चलती ही नहीं है.
एक मिनट भी नहीं चल रहा सदन
उन्होंने दावा किया कि एक वक्या भी विपक्ष के नेता खड़े होकर बोलते हैं तो हाउस से स्थगित हो जाता है, राज्यसभा का तो मैं देख रहा हूं. एक दिन भी हाउस नहीं चल पा रहा है. सुबह 11:00 बजे हाउस हुआ, पेपर लैइंग हुई. और उसके बाद जैसे ही, सवाल करने के लिए खड़े हुए. उसके तुरंत बाद हाउस स्थगित हो जाता है. इसके बाद दोपहर 12 बजे सदन शुरू होता है, फिर अगर कोई खड़ा होता है तो सदन को फिर दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दिया जाता है और दो बजे कोई खड़ा होता है तो फिर स्थगित हो जाता है. उन्होंने कहा कि जब आप किसी को दो मिनट सुनने के लिए तैयार नहीं है तो आप क्या चर्चा करेंगे.
पीएम के ऐलान पर राम गोपाल का पलटवार
वहीं, जब राम गोपाल से पीएम की एक्स पोस्ट (युवाओं के भविष्य से ज्यादा कुछ भी जरूरी नहीं है) के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि तो फिर ये आंदोलन क्यों हो रहा है. क्यों नहीं युवाओं की बात सुन रहे हैं प्रधानमंत्री. युवाओं का भविष्य तो बर्बाद हो गया लाखों का. कितने पेपर लीक हुए हैं और ओवर एज हो गए लोग.
'बीमारी का इलाज के बजाए... लक्षण की बात'
वहीं, पीएम की घोषणा के बाद सीजेपी लीडर आशुतोष रांका ने कहा कि हमारी स्पष्ट मांग है कि हम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा की मांग कर रहे हैं.
उन्होंने पेपर लीक को बीमारी बताते हुए कहा कि आप बीमारी का इलाज करने के बजाए आप उसके लक्षण की बात कर रहे हैं. सबसे ज्यादा जरूरी है कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें.
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