146 साल में सबसे सूखा जून... 40% से ज्यादा बारिश की कमी, ये पांच मौसमीय कारण बने मानसून की सुस्ती की वजह

जून 2026 भारत में 146 साल में सबसे सूखे महीनों में शामिल रहा. मानसून केरलम में समय पर पहुंचा लेकिन 15 जून के बाद रुक गया जिससे देश में 40 प्रतिशत और मध्य भारत में 60 प्रतिशत तक बारिश की कमी रही. 23 जून के बाद बारिश में कुछ सुधार आया है लेकिन पूरे साल बारिश सामान्य से कम यानी लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है.

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जून में मानसून की रफ्तार थमने से देश के कई हिस्सों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई (Photo: PTI) जून में मानसून की रफ्तार थमने से देश के कई हिस्सों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 जून 2026,
  • अपडेटेड 9:28 AM IST

मानसून भारत में आ गया है. लेकिन देश का बड़ा हिस्सा अभी भी बारिश का इंतजार कर रहा है. जून 2026 बीते 146 साल में सबसे सूखे महीनों में से एक रहा है. मॉनसून केरल में 4 जून को पहुंचा था. इसके बाद यह दक्षिण, पूर्व और पूर्वोत्तर के ज्यादातर हिस्सों में फैल गया था. लेकिन 15 जून के बाद यह अचानक रुक गया. 

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करीब दो हफ्ते तक देश के बड़े हिस्से में बारिश नहीं हुई. इस दौरान देश में 40 प्रतिशत से ज्यादा बारिश की कमी देखी गई. मध्य भारत में यह कमी 60 प्रतिशत से भी ज्यादा रही. अब कुछ इलाकों में बारिश लौट आई है. लेकिन जून में हुई कमी को पूरा होने में अभी समय लगेगा.

मौसम विभाग के मुताबिक मॉनसून के रुकने की वजह कोई एक कारण नहीं है. इस बार पांच अलग अलग सिस्टम एक साथ बारिश के खिलाफ काम कर रहे थे.

पहला कारण है कमजोर एमजेओ यानी मैडेन जूलियन ऑसिलेशन. यह बादलों और तूफान की एक बड़ी लहर है जो हर 30 से 60 दिन में पूरी दुनिया का चक्कर लगाती है. जब यह हिंद महासागर के ऊपर आती है तो बारिश तेज हो जाती है. जून में यह आगे बढ़ गई और बारिश की रफ्तार भी इसके साथ चली गई.

दूसरा कारण है कमजोर सोमाली जेट. यह एक हवा है जो अफ्रीका से अरब सागर के रास्ते भारत तक नमी लाती है. इस बार यह हवा बहुत कमजोर थी.

तीसरा कारण है उत्तर पश्चिम भारत और पश्चिम एशिया के रेगिस्तान से आई गर्म और सूखी हवा. इस हवा ने मध्य भारत के ऊपर एक ढक्कन जैसा असर डाला जिससे बादल बारिश में नहीं बदल पाए.

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यह भी पढ़ें: मुंबई में मानसून की धमाकेदार एंट्री, चिलचिलाती गर्मी के बाद हुई झमाझम बारिश

चौथा कारण है इंडियन ओशन डाइपोल का सामान्य बना रहना. यह हिंद महासागर के दो हिस्सों के तापमान का अंतर होता है. इस बार यह न्यूट्रल रहा जिससे मॉनसून को जरूरी मदद नहीं मिली.

पांचवां कारण है बंगाल की खाड़ी में कम दबाव वाले सिस्टम का न बनना. यही सिस्टम बारिश को देश के भीतरी हिस्सों तक खींचकर लाते हैं.

अल नीनो को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. अमेरिकी एजेंसी एनओएए ने जून के दूसरे हफ्ते में अल नीनो की घोषणा की है. लेकिन मौसम विभाग का कहना है कि जून की कमी में इसका असर बहुत कम था. इसका बड़ा असर जुलाई, अगस्त और सितंबर में दिख सकता है.

23 जून के बाद बारिश में सुधार दिखा है. मुंबई और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में बारिश लौटी है. लेकिन मौसम विभाग का अनुमान है कि इस साल कुल बारिश सामान्य से कम यानी लगभग 90 प्रतिशत ही रह सकती है. वैज्ञानिकों की चिंता यह भी है कि गर्म होती हवा ज्यादा पानी रोक पाती है. इससे आगे लंबे सूखे के बाद अचानक तेज बारिश का खतरा बढ़ सकता है.

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