बागी TMC सांसदों के NCPI में विलय पर संवैधानिक बहस तेज, कानूनी राय लेंगे ओम बिरला

तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों द्वारा नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने और एनडीए को समर्थन देने की घोषणा के बाद मामला संवैधानिक बहस का विषय बन गया है. बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से अलग समूह के रूप में मान्यता और अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है.

Advertisement
टीएमसी के बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर पत्र सौंपा और सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की. (Photo: PTI) टीएमसी के बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर पत्र सौंपा और सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:46 PM IST

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों द्वारा नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की घोषणा के बाद उत्पन्न संवैधानिक और कानूनी सवालों के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस मामले में कानूनी राय लेने की तैयारी कर रहे हैं. संसदीय सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी. सूत्रों के अनुसार, टीएमसी के बागी सांसदों की ओर से अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग पर कोई भी फैसला संसद के मानसून सत्र से पहले लिया जाएगा. आमतौर पर मानसून सत्र जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है.

Advertisement

उन्होंने बताया कि इस मामले में अंतिम निर्णय केंद्रीय कानून मंत्रालय की लिखित राय के आधार पर लिया जाएगा. कानून मंत्रालय किसी वरिष्ठ विधि अधिकारी से परामर्श के बाद अपनी राय देगा. लिखित कानूनी राय इसलिए ली जा रही है ताकि अध्यक्ष का निर्णय यदि अदालत में चुनौती दी जाए तो वह न्यायिक समीक्षा की कसौटी पर खरा उतर सके. इस बीच, लोकसभा के पूर्व महासचिव और संवैधानिक विशेषज्ञ पी.डी.टी. आचार्य ने संविधान की 10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के पैरा-4 का हवाला देते हुए कहा कि केवल कोई राजनीतिक दल ही दूसरे राजनीतिक दल में विलय कर सकता है, केवल सांसद या विधायक अपने स्तर पर किसी अन्य दल में विलय नहीं कर सकते.

यह भी पढ़ें: 'हम तृणमूल में ही है लेकिन अलग गुट', शर्मीला सरकार के दावे से बदले समीकरण

Advertisement

आचार्य ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा, 'यदि किसी राजनीतिक दल का नेतृत्व दूसरे दल में विलय का फैसला करता है, तो उसके सांसदों और विधायकों को उस निर्णय से सहमत होना पड़ता है. लेकिन केवल सांसद या विधायक अपने दम पर किसी दूसरे राजनीतिक दल में विलय नहीं कर सकते. संविधान में यही प्रावधान है.' वहीं, निर्वाचन आयोग के एक पूर्व अधिकारी, जिन्होंने राजनीतिक दलों से जुड़े मामलों को संभाला था, उन्होंने टीएमसी बागियों की मौजूदा योजना को एक इनोवेशन करार दिया. उनका कहना है कि ऐसी व्यवस्था का उल्लेख न तो दल-बदल विरोधी कानून में है और न ही जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में.

टीएमसी के भीतर 14 जून को संकट और गहरा गया, जब असंतुष्ट सांसदों ने एनसीपीआई में शामिल होने की घोषणा की और लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की. अध्यक्ष से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि 20 टीएमसी सांसदों ने अध्यक्ष को सौंपे गए ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं. उन्होंने कहा, 'टीएमसी के दो-तिहाई सांसदों ने अलग बैठने की व्यवस्था की मांग करते हुए अध्यक्ष को पत्र दिया है. हम नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी में शामिल होंगे और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करेंगे.'

Advertisement

यह भी पढ़ें: तृणमूल की ‘टूट' बीजेपी के लिए बंगाल से ज्यादा दिल्ली में फायदेमंद

निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, एनसीपीआई का पंजीकरण जनवरी 2023 में एक राजनीतिक दल के रूप में हुआ था. पार्टी का पता पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के संकरैल स्थित एक भवन में दर्ज है. अब तक अपेक्षाकृत कम चर्चित रही यह पार्टी अचानक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है, क्योंकि टीएमसी के 20 बागी लोकसभा सांसदों ने इस पार्टी में शामिल होने की घोषणा कर दी. बता दें कि 2024 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी के 29 सांसद जीते थे. टीएमसी सांसद हाजी नूरुल इस्लाम के निधन के कारण बसीरहाट लोकसभा सीट फिलहाल रिक्त है. राज्य में बीजेपी के 12 और कांग्रेस का 1 सांसद है. बंगाल में लोकसभा की 42 सीटें हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »