जंतर मंतर प्रोटेस्ट की जांच कमेटी पर उठे सवाल... सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

जंतर मंतर विरोध प्रदर्शन के दौरान घटनाओं की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई हाई पावर जांच कमेटी को दोबारा गठित करने की मांग करते हुए अर्जी दाखिल हुई है. CJI सूर्यकांत के सामने अर्जी पर सुनवाई हुई.

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सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट

सृष्टि ओझा / संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 25 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:24 PM IST

जंतर मंतर विरोध प्रदर्शन से जुड़ी घटनाओं की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के पुनर्गठन की मांग की जा रही है. कोर्ट में दायर याचिका में कमेटी के मौजूदा सदस्यों पर सवाल उठाया गया. याचिकाकर्ता ने कमेटी के पुनर्गठन की मांग की है. 

याचिका में मांग की गई कि इस कमेटी की अध्यक्षता किसी सेवानिवृत्त CJI से कराई जाए. साथ ही, कमेटी में ऐसे गैर न्यायिक सदस्यों को शामिल करने की मांग की गई है जो पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष हों. 

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वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रह्मण्यम का कहना है कि जो कमेटी बनी है उसके पुनर्गठन के लिए याचिकाकर्ता ने कुछ सेवानिवृत्त जजों के नाम भी सुझाए हैं. याचिकाकर्ता का दावा है कि कमेटी के कुछ गैर न्यायिक सदस्यों के केंद्रीय गृह मंत्री और सरकार से पुराने संबंध रहे हैं. उनका कहना है कि ऐसे में निष्पक्ष जांच को लेकर संदेह पैदा होता है. हालांकि याचिका में यह भी कहा गया है कि किसी की व्यक्तिगत ईमानदारी पर नहीं बल्कि कमेटी की सरंचना और स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाया गया है. 

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याचिकाकर्ता के मुताबिक कमेटी में ऐसे विशेषज्ञों को शामिल किया जाना चाहिए जिन्हें पुलिस बल, भीड़ नियंत्रण, आपराधिक जांच, फॉरेंसिक जांच, नागरिक अधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच का अनुभव हो.

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कोर्ट ने क्या कहा?

सॉलिसिटर जनरल ने इसे एक शरारतपूर्ण याचिका बताया है. उनका कहना है कि इस तरह की अर्जी को अनुमति नहीं दी जा सकती. उन्होंने इसे राजनीति से प्रेरित बताया है. वही CJI सूर्यकांत का कहना है कि जो भी काम करेगा वह सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में होगा. CJI का कहना है कि मामले का निपटारा नहीं किया गया है. 

CJI ने यह भी कहा है कि सभी लोग कमेटी की मदद के लिए हैं. सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया कि हर संस्था में कुछ याचिकाकर्ताओं को शंकाएं होती हैं. 

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