6 साल में सेना ने खरीदा 960 करोड़ का खराब गोला-बारूद, आ सकती थीं 100 तोपें: रिपोर्ट

सेना की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन खराब क्वालिटी के गोला बारूद से ना सिर्फ पैसों का नुकसान हुआ है, बल्कि कई घटनाओं में मानवीय क्षति भी हुई है.

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गोला बारूद को लेकर सेना की रिपोर्ट में दावा गोला बारूद को लेकर सेना की रिपोर्ट में दावा

शिव अरूर

  • नई दिल्ली,
  • 29 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 2:57 PM IST
  • गोला बारूद को लेकर सेना की आंतरिक रिपोर्ट
  • सरकारी फैक्ट्री में मिला खराब क्वालिटी का सामान

ऐसे वक्त में जब भारतीय सेना चीन के साथ सीमा पर संघर्ष की स्थिति में है, तब सेना में आई एक इंटरनल रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े किए हैं. पिछले 6 साल में सरकारी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड से जितने रुपये में खराब गोला बारूद खरीदा है, उतने में सेना को करीब 100 आर्टिलरी गन मिल सकती थीं. ये दावा सेना के अंतर्गत की गई एक रिपोर्ट में किया गया है, जिसे रक्षा मंत्रालय को दिया गया है. 

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साल 2014 से 2020 के बीच जो खराब क्वालिटी की गोला बारूद खरीदा गया है, उसकी कीमत करीब 960 करोड़ रुपये तक पहुंचती है. इतने दाम में 150-MM की मीडियम आर्टिलरी गन सेना को मिल सकती थीं. 

आपको बता दें कि ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड (OFB) का संचालन रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत ही होता है और ये दुनिया की सबसे पुरानी सरकारी ऑर्डिनेंस प्रोडक्शन यूनिट में से एक है. इसी के तहत सेना के लिए गोलाबारूद बनाया जाता है, जिसकी सेना ने आलोचना की है. जिन प्रोडक्ट में खामी पाई गई है, उनमें 23-MM के एयर डिफेंस शेल, आर्टिलरी शेल, 125 MM का टैंक राउंड समेत अलग-अलग कैलिबर की बुलेट्स शामिल हैं.

सेना की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन खराब क्वालिटी के गोला बारूद से ना सिर्फ पैसों का नुकसान हुआ है, बल्कि कई घटनाओं में मानवीय क्षति भी हुई है. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि खराब क्वालिटी के प्रोडक्शन के कारण जो घटनाएं और मानवीय क्षति होती है, वह औसतन एक हफ्ते में एक होती है. 

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इस आंतरिक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2014 के बाद से खराब क्वालिटी के गोला बारूद के कारण 403 घटनाएं हुई हैं, हालांकि ये लगातार कम भी हुए हैं. लेकिन ये चिंताजनक है. 

2014 – 114 घटनाएं
2017 – 53
2018 – 78
2019 - 16

रक्षा मंत्रालय को सौंपी गई है रिपोर्ट

इन घटनाओं में करीब 27 जवानों की मौत हुई है जबकि 159 के करीब जवान घायल हुए हैं. इस साल अभी तक 13 घटनाएं हुई हैं हालांकि किसी की मौत नहीं हुई है. इन 960 करोड़ रुपये की खरीद में 658 करोड़ रुपये का खर्च 2014-2019 के बीच शेल्फ में हुआ, जबकि अन्य 303 करोड़ रुपये तक की कीमत के माइन्स को महाराष्ट्र में लगी आग के बाद खत्म किया गया.

पिछले दो साल में सेना की ओर से प्राइवेट सेक्टर का रुख किया गया है, ताकि उनकी ओर से गोलाबारूद की सप्लाई को चालू रखा जा सके. हालांकि, अभी भी पूरी तरह से प्राइवेट कंपनियों से OFB जैसी सप्लाई करवाने के लिए जोर आजमाइश की जरूरत है. 

इसी महीने की शुरुआत में सेना में गोला बारूद की खपत को देखने वाले MGO लेफ्टिनेंट जनरल उपाध्याय ने कहा था कि OFB की ओर से सेना को आपूर्ति मिल रही है, लेकिन साथ ही साथ एक ऐसी व्यवस्था खड़ी करने की जरूरत है जो उससे अलग काम कर सके. भले ही वो अभी उतनी क्षमता का ना हो, लेकिन शुरुआत करनी जरूरी है.  

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हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से भी लगातार OFB में बदलाव की कोशिशें की जा रही हैं. बीते दिनों ही एक एजेंसी को इसमें बदलाव करने की रूपरेखा तैयार करने के लिए कहा गया है, ताकि इसे आधुनिक बनाया जा सके. दूसरी ओर छोटी-बड़ी निजी कंपनियों से हाथ मिलाकर गोलाबारूद की आपूर्ति को पूरा करने की कोशिश जारी है. ऐसे वक्त में जब सीमा पर चीन के साथ तनाव बरकरार है, तब गोला बारूद की क्वालिटी और क्वांटिटी पर सवाल खड़े होना चिंता का विषय बन सकता है.


 

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