Beat Report: धर्मांतरण पर कसेगी नकेल, NGOs पर भी सख्ती... फॉरेन फंडिंग को लेकर नए नियम लागू

केंद्र सरकार ने विदेशी चंदे को लेकर FCRA नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए निगरानी और जवाबदेही को और सख्त कर दिया है. नए नियमों के तहत धार्मिक गतिविधियों की स्पष्ट सूची जारी की गई है, जबकि धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है.

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फॉरेन फंडिंग पर सख्ती करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संशोधित FCRA कानून लागू किए. (Photo: ITG/@GFX) फॉरेन फंडिंग पर सख्ती करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संशोधित FCRA कानून लागू किए. (Photo: ITG/@GFX)

जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 23 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:11 PM IST

केंद्र सरकार ने विदेशी चंदे को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन नियम, 2026 (FCRA Amendment Rules, 2026) लागू कर दिए हैं. गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी नए नियमों के तहत अब धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए विदेश से मिलने वाले फंड की निगरानी पहले से कहीं ज्यादा सख्त होगी. सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य विदेशी धन के उपयोग को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाना है, ताकि उसका इस्तेमाल केवल घोषित और वैध उद्देश्यों के लिए ही हो सके.

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नए नियमों में धार्मिक गतिविधियों की स्पष्ट परिभाषा, धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध, विदेशी नागरिकों की भूमिका पर सख्ती, सोशल मीडिया खातों के खुलासे और विदेशी फंड के उपयोग की नई शर्तें प्रमुख बदलावों के रूप में सामने आई हैं. FCRA यानी फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट वह कानून है, जिसके तहत भारत में काम करने वाले गैर-सरकारी संगठन (NGOs), ट्रस्ट, सोसायटी और अन्य संस्थाएं विदेश से आर्थिक सहायता प्राप्त करती हैं. यह कानून पहली बार 1976 में लागू किया गया था और बाद में 2010 में इसे नए स्वरूप में लागू किया गया. 

नए FCRA कानून में क्या प्रावधान हैं?

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी फंड का इस्तेमाल देश की संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक सद्भाव और सार्वजनिक हित के खिलाफ न हो. गृह मंत्रालय ने पहली बार धार्मिक उद्देश्यों के लिए स्वीकार्य गतिविधियों की विस्तृत सूची जारी की है. अब विदेशी चंदा केवल उन्हीं धार्मिक गतिविधियों के लिए उपयोग किया जा सकेगा जिन्हें सरकार ने निर्धारित किया है. इनमें मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा, मठ और अन्य पूजा स्थलों का निर्माण व रखरखाव, धार्मिक ग्रंथों का संरक्षण और डिजिटलीकरण, धार्मिक शोध संस्थानों को सहायता, तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं, धर्मशाला और लंगर संचालन, धार्मिक शिक्षा, सत्संग, प्रवचन, ध्यान शिविर और धार्मिक सांस्कृतिक गतिविधियों का संरक्षण शामिल है.

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नए नियमों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध है. गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि विदेशी धन का उपयोग किसी भी प्रकार की धर्मांतरण गतिविधि में नहीं किया जा सकेगा. हालांकि धार्मिक शिक्षा, आध्यात्मिक कार्यक्रम और नैतिक शिक्षण जैसी गतिविधियों की अनुमति जारी रहेगी, लेकिन किसी व्यक्ति या समुदाय को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने, प्रोत्साहित करने या सहायता देने वाली गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी. संशोधित नियमों में 'Key Functionary' यानी प्रमुख पदाधिकारी की नई परिभाषा भी जोड़ी गई है. अब किसी संस्था के निदेशक, ट्रस्टी, साझेदार, पदाधिकारी, प्रबंधन समिति के सदस्य और संस्था के संचालन से जुड़े अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों को भी जवाबदेही के दायरे में लाया गया है.

NGOs के की फंडिंग की भी निगरानी

अब एफसीआरए पंजीकरण प्राप्त करने वाली संस्थाओं को यह स्पष्ट करना होगा कि वे विदेशी धन किस उद्देश्य से प्राप्त करना चाहती हैं और किन राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों में अपनी गतिविधियां संचालित करेंगी. पहले से पंजीकृत संस्थाओं को भी एक वर्ष के भीतर अपनी गतिविधियों और कार्यक्षेत्र की जानकारी सरकार को देनी होगी. नए नियमों के अनुसार जिन संस्थाओं में विदेशी नागरिक प्रमुख पदों पर होंगे, उन्हें सामान्य रूप से FCRA पंजीकरण नहीं दिया जाएगा. हालांकि विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार ऐसे मामलों में अनुमति दे सकती है. सरकार ने विदेशी फंड की अगली किस्त जारी करने के लिए भी नई शर्त लागू की है. अब किसी संस्था को दूसरी या अगली किस्त तभी मिलेगी जब वह पहले प्राप्त फंड का कम से कम 75 प्रतिशत उपयोग कर चुकी होगी.

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इसके लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट का उपयोगिता प्रमाणपत्र, बैंक खाते का विवरण, खर्च का रिकॉर्ड और गतिविधियों की रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा. इसके अलावा अब विदेशी चंदा प्राप्त करने वाले NGOs और संस्थाओं को अपनी आधिकारिक वेबसाइट, सोशल मीडिया अकाउंट, पुस्तकों, पत्रिकाओं, समाचार पत्रों में प्रकाशित लेखों और अन्य प्रकाशनों की जानकारी भी सरकार को देनी होगी. सरकार का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और निगरानी आसान होगी. पंजीकरण शुल्क व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है. यदि कोई संस्था एक से अधिक राज्यों में काम करना चाहती है या एक से अधिक उद्देश्यों के लिए पंजीकरण कराना चाहती है तो उसे अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है.

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